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समर्थ एप से सक्षम होंगे दिव्यांग बच्चे
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जिले के गंभीर दिव्यांग बच्चे भी अब शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। उन्हें घर पर ही शिक्षा और इसके लिए सारी सुविधाएं मिलेंगी। समर्थ एप से बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में पढ़ रहे दिव्यांग बच्चों के साथ ही ड्राप आउट बच्चों की भी निगरानी हो सकेगी। इसके लिए विद्यालय के प्रधानाध्यापक और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की वार्डन को नोडल टीचर नामित किया गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग के विकसित समर्थ एप से पहले चरण में दिव्यांग बच्चों का चिह्नांकन किया जाएगा। फिजियोथेरेपिस्ट और स्पेशल एजुकेटर दिव्यांग बच्चों का पूरा विवरण समर्थ एप में फीड करेंगे। इन बच्चों का सारा डाटा ऑनलाइन किया जाएगा। दिव्यांग बच्चों की साप्ताहिक उपस्थिति दर्ज की जाएगी। जिला समन्वयक केशराज सिंह ने बताया कि प्रति वर्ष दिव्यांग बच्चों का डाटा बेस यू डायस पर इंट्री कराई जाएगी। डाटा फीडिंग के बाद परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक दिव्यांग बच्चों के घर जाकर शिक्षित करेंगे। उन्हें पढ़ाने के लिए कुछ विशेष तरीके भी प्रयोग किए जाएंगे। पहले चरण में जनपद में 3737 बच्चों के विवरण की जियो टैगिंग का लक्ष्य है। समर्थ एप पर काम शुरू हो गया है।
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बेसिक शिक्षा विभाग के विकसित समर्थ एप से पहले चरण में दिव्यांग बच्चों का चिह्नांकन किया जाएगा। फिजियोथेरेपिस्ट और स्पेशल एजुकेटर दिव्यांग बच्चों का पूरा विवरण समर्थ एप में फीड करेंगे। इन बच्चों का सारा डाटा ऑनलाइन किया जाएगा। दिव्यांग बच्चों की साप्ताहिक उपस्थिति दर्ज की जाएगी। जिला समन्वयक केशराज सिंह ने बताया कि प्रति वर्ष दिव्यांग बच्चों का डाटा बेस यू डायस पर इंट्री कराई जाएगी। डाटा फीडिंग के बाद परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक दिव्यांग बच्चों के घर जाकर शिक्षित करेंगे। उन्हें पढ़ाने के लिए कुछ विशेष तरीके भी प्रयोग किए जाएंगे। पहले चरण में जनपद में 3737 बच्चों के विवरण की जियो टैगिंग का लक्ष्य है। समर्थ एप पर काम शुरू हो गया है।
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