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बियार वोटरों पर सबकी नजर

Fri, 03 Feb 2017 12:51 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर Updated Fri, 03 Feb 2017 12:51 AM IST
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Biar conspicuous with the voters
चुनाव - फोटो : demo pic

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प्रत्याशियों नामों की घोषणा के साथ ही चुनार विधानसभा क्षेत्र में चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पार्टियां जातीय समीकरण की गुणागणित में जुट गई हैं। यूं तो इसे पटेल बहुल माना जाता है लेकिन बियार और ब्राम्हण मतदाता निर्णायक होंगे। 

 चुनार विधानसभा क्षेत्र में राजनैतिक समीकरण में अगड़ी जाति का ब्राम्हण और पिछड़ी जाति का बियार मतदाता निर्णायक होगा। यूं तो इनकी कुल संख्या 50 हजार के करीब है लेकिन ये जिस तरफ जाते हैं, उधर पलड़ा भारी हो जाता है। इसमें बियार मतों तो एकतरफा किसी प्रत्याशी के साथ जाता है। यूं तो चुनार विधानसभा कुर्मी बहुल है और यहां लगभग आधे वोट पटेल बिरादरी के ही हैं। यही कारण हैं कि पार्टियां यहां से कुर्मी जाति के नेताओं को ही उम्मीदवार बनाती रही हैं।
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 वर्ष 1980 से लेकर 2012 तक बीते विधानसभा चुनाव तक कुर्मी जाति का ही विधायक चुनार से चुना गया। इस बार भी तीनों प्रमुख पार्टियों ने पटेल नेताओं को ही टिकट दिया है। भाजपा से अनुराग सिंह, बसपा से अनमोल सिंह और समाजवादी पार्टी ने वर्तमान विधायक जगतंबा सिंह पटेल   मैदान में हैं।  
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 क्षेत्र में बियार जाति के लोग एकजुट होकर मतदान करते हैं। यही कारण है कि यहां से बियार जाति भोलानाथ बच्चन, लालता बियार और ब्राम्हण जाति के उम्मीदवार रमेश चंद्र दूबे, नरेंद्र देव पांडेय, आशा पांडेय ने भी कुर्मी जाति के प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दी लेकिन जीत नहीं सके। इससे यहां पर अगड़े ब्राम्हण व पिछड़ी बियार जाति की ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। अबकी इन जातियों के उम्मीदवार चुनावी रणभूमि में नहीं हैं।


ऐसे में बियार व ब्राम्हण वोटों को अपने पक्ष में जुटाने के लिए सभी दल लगे हुे हैं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में ब्राम्हण व बियार समाज के लोग समाजवादी पार्टी के साथ थे और उसे जीत मिली। उससे पहले वे भाजपा के साथ रहते थे और पार्टी यहां से जीतती थी। इस बार भी प्रत्याशी ब्राह्मण और बियार जाति के वोटों को रिझाने के तरह-तरह के यत्न कर रहे हैं। बियार जाति के नेताओं को अपने साथ लाने के लिए सभी प्रत्याशी प्रयास कर रहे हैं। 
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