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Mirzapur News: 35 साल बाद साधु वेश में घर लौटा कार सेवक अमर नाथ

Wed, 19 Feb 2025 12:51 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 19 Feb 2025 12:51 AM IST
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After 35 years, car servant Amar Nath returned home in the guise of a saint.
शेरवां। वर्ष 1992 में अयोध्या में ढांचा विध्वंस के दौरान कार सेवकों की टोली में शामिल जमालपुर के अमर नाथ गुप्ता (72) रविवार को 35 साल के बाद साधु वेश में अपने घर पहुंचे तो परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बूढ़ी मां की आंखें छलक पड़ीं तो पत्नी के आंसू भी थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
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रविवार को देर शाम जब माई कहकर जब किसी ने घर का दरवाज़ा खटखटाया तो 95 साल की प्यारी देवी ने बहू चंद्रावती से कहा कि अतुल की माई, अमर बचवा बोल रहा है। गहरी नींद में सो रही बहू ने कहा सो जा, अब वो कहां आने वाले हैं। फिर मां के कानों में अमर की आवाज गूंजी। माई दरवाजा खोल। बार-बार बेटे की आवाज सुनकर बुढ़ी मां चारपाई पर उठ कर हमार बचवा, बचवा कहकर चिल्लाने लगी। बहू ने दरवाजा खोला तो सामने साधु वेश में उसका पति खड़ा थे। जोर-जोर चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के लोग भी जुट गए। सभी ने साधु की पहचान अमरनाथ के रूप में की। सोमवार को सुबह अमर नाथ से मिलने वालों का तांता लगा रहा। मुंबई में नौकरी कर रहे भाई विजय कुमार, चचेरे भाई त्रिलोकी, संत कुमार और राजू भी उनसे मिलने के लिए जमालपुर आ रहे हैं।
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इनसेट
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स्वप्न में मां को देखकर मन विचलित हो उठा
शेरवां। साधु वेश में घर लौटे अमरनाथ ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि वह एक हफ्ते पहले प्रयागराज महाकुंभ में स्नान के लिए आए थे। वहां उनकी मां स्वप्न में दिखीं, जिससे उनका मन विचलित हो उठा और मां से मिलने के लिए आ गया। दो दिन बाद प्रभु की सेवा में आश्रम लौट जाऊंगा।
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अमरनाथ गुप्ता ढांचा विध्वंस की घटना के बाद अयोध्या में दार्शनिक आश्रम जानकी घाट पर रहने लगे थे। अमरनाथ ने बताया कि कारसेवा के बाद वह ट्रेन पकड़कर घर लौट रहे थे तो जौनपुर में ट्रेन पथराव होने लगा। वह किसी तरह वाराणसी पहुंचे और फिर जमालपुर पैदल आए। इसके बाद पुलिस ने अमरनाथ को पकड़कर मिर्जापुर जेल में बंद कर दिया था। कुछ दिन बाद जमालपुर के मुखिया ने उनकी जमानत कराई। घर में उनका मन नहीं लगा। फिर वह एक रात चुपके से अयोध्या निकल गए। वहां से वृंदावन पहुंचे, जहां बाबा किशोर दास से दीक्षा लेकर वह जयपुर आश्रम में रहने लगे। अमर उजाला से बातचीत में अमरनाथ ने बताया कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बनने से उनका जीवन सफल हो गया।
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