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सब भाषाओं की जननी है संस्कृत
Mirzapur
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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लालगंज। सांसारिक पदार्थ नाशवान है। मन को आडंबर से मुक्त रखो। यह शरीर पंचतत्वों से मिलकर बना है। न कोई प्रिय है न कोई अप्रिय। भगवान के चरणों में ध्यान लगाओ। गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि हे अर्जुन चित्त को निवृत करो मुझमें लगाओ, भटकने बचो, विजय पथ पर बढ़ते जाओ। यह बातें गुरुवार को जैकर ग्राम के भुकभुकिया आश्रम पर सत्संग के दौरान स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने कहीं।
स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने मानव की उत्पत्ति व साधना विषय पर बोलते हुए कहा कि मन वायु से वेगवान है। मन को साधने की जरूरत है। जिसने नहीं साधा रावण की तरह असुर राह पर चलने लगा। स्वामी जी ने कहा कि संस्कृत भाषा सब भाषा की जननी है और मानवता की मार्गदर्शक है। संस्कृत की शिक्षा से समाज की अज्ञानता का नाश होता है। उन्होेंने कहा कि गीता में भगवान कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि मन को मेरे पर केंद्रित करो। मन को साधो क्योंकि मन बड़ा वेगवान है। उसे सही तरीके से साधने की जरूरत है। स्वामी जी ने कहा कि पूजा केवल एक ईश्वर की करो। इस अवसर पर आयोजित विशाल भंडारे में बड़ी संख्या में नर और नारियों सहित बच्चों ने प्रसाद ग्र्रहण किया।
इस दौरान भावानंद जी महराज, अधिवक्ता रामयतन यादव, सुभाष यादव, जय सिंह, गणेश यादव, अरविंद यादव, कमला पटेल, तुफानी यादव, संतोष यादव, राजेंद्र तिवारी, डा सुरेंद्र सिंह यादव, राधेश्याम तिवारी सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में नर-नारी एवं बच्चे आए हुए थे।
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स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने मानव की उत्पत्ति व साधना विषय पर बोलते हुए कहा कि मन वायु से वेगवान है। मन को साधने की जरूरत है। जिसने नहीं साधा रावण की तरह असुर राह पर चलने लगा। स्वामी जी ने कहा कि संस्कृत भाषा सब भाषा की जननी है और मानवता की मार्गदर्शक है। संस्कृत की शिक्षा से समाज की अज्ञानता का नाश होता है। उन्होेंने कहा कि गीता में भगवान कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि मन को मेरे पर केंद्रित करो। मन को साधो क्योंकि मन बड़ा वेगवान है। उसे सही तरीके से साधने की जरूरत है। स्वामी जी ने कहा कि पूजा केवल एक ईश्वर की करो। इस अवसर पर आयोजित विशाल भंडारे में बड़ी संख्या में नर और नारियों सहित बच्चों ने प्रसाद ग्र्रहण किया।
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इस दौरान भावानंद जी महराज, अधिवक्ता रामयतन यादव, सुभाष यादव, जय सिंह, गणेश यादव, अरविंद यादव, कमला पटेल, तुफानी यादव, संतोष यादव, राजेंद्र तिवारी, डा सुरेंद्र सिंह यादव, राधेश्याम तिवारी सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में नर-नारी एवं बच्चे आए हुए थे।
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