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मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन पाते ही निहाल हुए श्रद्धालु
Mirzapur
Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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विंध्याचल। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन-पूजन करने के लिए नर-नारियों का हुजूम उमड़ पड़ा। भोर से मंदिर परिसर के साथ ही गंगा घाटों पर स्नान करने के लिए स्नानार्थियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। स्नान के उपरांत भक्तों ने प्रसाद आदि लेकर मां विंध्यवासिनी के दरबार में मत्था टेककर सुख-समृद्धि की कामना की।
मां विंध्यवासिनी के दरबार में घंटा, घडि़याल, शंख और माता के जयकारे से पूरा विंध्य धाम देवीमय हो रहा था। मां के भव्य स्वरूप की एक झलक पाते ही भक्तजन निहाल हो गए। मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने के कारण अतिरिक्त फोर्स की व्यवस्था की गई थी। विंध्याचल के प्रमुख गंगा घाट पक्का घाट, बाबाघाट, इमिलिया घाट, मल्लहिया घाट पर दूर-दराज से आए भक्तों ने विधिवत स्नान ध्यान किया। गंगा में दूर तक रेत की चादर बिछी होने के कारण भक्तों को कुछ दूर तक पैदल चलकर स्नान करना पड़ा। चिलचिलाते धूप में श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बन रही थी। गंगा घाटों पर स्नान करने के उपरांत नर-नारियों ने दुकानों से नारियल-चुनरी के साथ ही प्रसाद आदि लेकर मां के दरबार में दर्शन-पूजन करने के लिए पहुंचे। मां विंध्यवासिनी देवी के दर्शन को लालायित भक्तजन कतार में खड़े होकर अपनी-अपनी बारी का इंतजार करते हुए माता का जयकारा लगा रहे थे। मां का दर्शन करने के बाद भक्तजन मंदिर परिसर में स्थित सभी देवी-देवताओं के चरणों में भक्ति-भाव पूर्वक मत्था टेका। माता का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्तों ने विंध्य की गलियों में लगी दुकानों पर अपनी-अपनी जरूरत की वस्तुओं की जमकर खरीदारी भी की। विंध्याचल क्षेत्र में अधिक संख्या में वाहनों के आ जाने से कहीं-कहीं मामूली जाम की स्थिति बनी रही। मां विंध्यवासिनी के भव्य स्वरूप का विधिवत दर्शन-पूजन करने के उपरांत श्रद्धालु माता का जयकारा लगाते हुए अपने-अपने गंतव्यों के लिए रवाना हुए।
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मां विंध्यवासिनी के दरबार में घंटा, घडि़याल, शंख और माता के जयकारे से पूरा विंध्य धाम देवीमय हो रहा था। मां के भव्य स्वरूप की एक झलक पाते ही भक्तजन निहाल हो गए। मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने के कारण अतिरिक्त फोर्स की व्यवस्था की गई थी। विंध्याचल के प्रमुख गंगा घाट पक्का घाट, बाबाघाट, इमिलिया घाट, मल्लहिया घाट पर दूर-दराज से आए भक्तों ने विधिवत स्नान ध्यान किया। गंगा में दूर तक रेत की चादर बिछी होने के कारण भक्तों को कुछ दूर तक पैदल चलकर स्नान करना पड़ा। चिलचिलाते धूप में श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बन रही थी। गंगा घाटों पर स्नान करने के उपरांत नर-नारियों ने दुकानों से नारियल-चुनरी के साथ ही प्रसाद आदि लेकर मां के दरबार में दर्शन-पूजन करने के लिए पहुंचे। मां विंध्यवासिनी देवी के दर्शन को लालायित भक्तजन कतार में खड़े होकर अपनी-अपनी बारी का इंतजार करते हुए माता का जयकारा लगा रहे थे। मां का दर्शन करने के बाद भक्तजन मंदिर परिसर में स्थित सभी देवी-देवताओं के चरणों में भक्ति-भाव पूर्वक मत्था टेका। माता का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्तों ने विंध्य की गलियों में लगी दुकानों पर अपनी-अपनी जरूरत की वस्तुओं की जमकर खरीदारी भी की। विंध्याचल क्षेत्र में अधिक संख्या में वाहनों के आ जाने से कहीं-कहीं मामूली जाम की स्थिति बनी रही। मां विंध्यवासिनी के भव्य स्वरूप का विधिवत दर्शन-पूजन करने के उपरांत श्रद्धालु माता का जयकारा लगाते हुए अपने-अपने गंतव्यों के लिए रवाना हुए।
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