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हर धर्म में हजरत मुहम्मद का जिक्र आया
Mirzapur
Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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मिर्जापुर।स्थानीय कटरा कोतवाली पर आईआरडीसी इस्लामिक रिसर्च एंड दाबा सेंटर व मदरसा मुहम्मदिया के संयुक्त तत्वावधान में नौवां वार्षिक समारोह तलाशे हक कांफ्रेंस संपन्न हुई। शनिवार की रात करीब ढाई बजे तक चले इस कार्यक्रम में मुसलिम समाज के लोगों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम कटरा कोतवाली के पीछे मुहम्मदी गली में हुआ।
कार्यक्रम का प्रारंभ अब्दुल्ला मुहम्मदी के तिलावते कुरआन से हुआ। मदरसा मुहम्मदिया के बच्चों अब्दुल करीम, अब्दुल सत्तार, अब्दुल रशीद, वसीम, खदीजा, आयशा ने तकरीरें पेश की। इसके बाद आइआरडीसी के सदर खुर्शीद मुहम्मदी ने हजरत मुहम्मद (सल्ल.) और भारतीय धर्मग्रंथ र्शीषक पर हवालों के साथ तकरीर पेश की। हिंदू धर्म की पुस्तकों, जैन धर्म, बौद्ध आदि की पुस्तकों के श्लोक पढ़कर, हवाले देते हुए साबित किया कि हर धर्म में हजरत मुहम्मद (सल्ल.) का जिक्र आया है। कहीं नराशंस, कहीं महामद, कहीं कल्कि अवतार आदि के नामों से और डा. एम ए श्रीवास्तव, डा. वेद प्रकाश उपाध्याय आदि की पुस्तकों के हवाले भी पेश किया।
इसके बाद अपनी संस्था के कार्यों की संक्षिप्त जानकारी दी। इसके बाद हिंदू अतिथियों को पवित्र ग्रंथ कुरआन का हिंदी अनुवाद व अन्य कई पुस्तकें भी भेंट स्वरूप प्रदान की गईं। भेंट पाने वालों में सलिल पांडेय, अजित दूबे, संतोष सिंह, कमला कांत तिवारी, लल्लू जायसवाल, अजय, अशोक, श्रीश कुमार रहे। कार्यक्रम में 8 वर्ष के नन्हे अब्दुल लतीफ मुहम्मदी ने अहलेहदीस का वुजुद नबी (सल्ल.) के दौर से बल्कि आदम (अलै.) के दौर से है और कयामत तक रहेंगे। इस अवसर पर नेपाल से आए अजीमुद्दीन रिजवीं ने तकरीर पेश की । अमीर मुर्तजा कासिमी मदिनी ने शिर्क और बिदअत पर इल्मी बयान पेश किया। कार्यक्रम की सदारत अमीर जमाअत महमूदुल हसन फैजी ने की।
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कार्यक्रम का प्रारंभ अब्दुल्ला मुहम्मदी के तिलावते कुरआन से हुआ। मदरसा मुहम्मदिया के बच्चों अब्दुल करीम, अब्दुल सत्तार, अब्दुल रशीद, वसीम, खदीजा, आयशा ने तकरीरें पेश की। इसके बाद आइआरडीसी के सदर खुर्शीद मुहम्मदी ने हजरत मुहम्मद (सल्ल.) और भारतीय धर्मग्रंथ र्शीषक पर हवालों के साथ तकरीर पेश की। हिंदू धर्म की पुस्तकों, जैन धर्म, बौद्ध आदि की पुस्तकों के श्लोक पढ़कर, हवाले देते हुए साबित किया कि हर धर्म में हजरत मुहम्मद (सल्ल.) का जिक्र आया है। कहीं नराशंस, कहीं महामद, कहीं कल्कि अवतार आदि के नामों से और डा. एम ए श्रीवास्तव, डा. वेद प्रकाश उपाध्याय आदि की पुस्तकों के हवाले भी पेश किया।
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इसके बाद अपनी संस्था के कार्यों की संक्षिप्त जानकारी दी। इसके बाद हिंदू अतिथियों को पवित्र ग्रंथ कुरआन का हिंदी अनुवाद व अन्य कई पुस्तकें भी भेंट स्वरूप प्रदान की गईं। भेंट पाने वालों में सलिल पांडेय, अजित दूबे, संतोष सिंह, कमला कांत तिवारी, लल्लू जायसवाल, अजय, अशोक, श्रीश कुमार रहे। कार्यक्रम में 8 वर्ष के नन्हे अब्दुल लतीफ मुहम्मदी ने अहलेहदीस का वुजुद नबी (सल्ल.) के दौर से बल्कि आदम (अलै.) के दौर से है और कयामत तक रहेंगे। इस अवसर पर नेपाल से आए अजीमुद्दीन रिजवीं ने तकरीर पेश की । अमीर मुर्तजा कासिमी मदिनी ने शिर्क और बिदअत पर इल्मी बयान पेश किया। कार्यक्रम की सदारत अमीर जमाअत महमूदुल हसन फैजी ने की।
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