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विंध्याचल धाम: नेपाल राजवंश, गुरु गोविंद से लेकर राजघरानों, अखाड़ों, नगर वधुओं और सपेरों के भी तीर्थ पुरोहित

Thu, 15 Oct 2026 05:33 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर।
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर। Published by: Pragati Chand Updated Thu, 15 Oct 2026 05:33 AM IST
सार

मिर्जापुर जिले स्थित विंध्याचल धाम में नेपाल राजवंश, गुरु गोबिंद सिंह से लेकर राजघरानों, अखाड़ों, नगर वधुओं और सपेरों के भी तीर्थ पुरोहित हैं। धाम में 1200 तीर्थ पुरोहित पंजीकृत हैं। 14वीं शताब्दी तक के यजमानों का बहीखाता यहां संरक्षित है। 

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Vindhyachal Dham pilgrimage priests from Nepalese Guru Gobind Singh akhada nagarvadhu and snake charmer family
विंध्याचल धाम का इतिहास - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन कराने वाले तीर्थ पुरोहितों और उनके यजमानों के रिश्ते पीढ़ियों से दर्ज हैं। 14वीं शताब्दी तक के यजमानों की बही पुरोहितों के पास संरक्षित हैं, जिनमें यजमानों के अनुभव तक दर्ज हैं। श्री विंध्य पंडा समाज में पंजीकृत 1200 पुरोहितों में से कोई नेपाल राजवंश का तो कोई गुरु गोविंद सिंह, महाराजा रणजीत सिंह का तीर्थ पुरोहित है। इनमें देश के कई राजघरानों के अलावा अखाड़ों, सपेरों और नगर वधुओं के भी तीर्थ पुरोहित हैं। 

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इन पुरोहितों के पास राजवंश से जारी पत्र और मुहर भी मौजूद हैं। तीर्थ पुरोहित त्रियोगी नारायण मिश्र उर्फ मिट्ठू के पास 14वीं शताब्दी की एक बही है। जीर्ण-शीर्ण हो चुकी बही में 14 से ज्यादा पीढ़ियों के नाम दर्ज हैं। त्रियोगी नारायण मिश्र बताते हैं कि पितृपक्ष में तर्पण के दौरान यजमान फोन करके अपने पितरों के नाम पूछते हैं।
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तीर्थ पुरोहित रामू मिश्रा का दावा है कि नेपाल के तत्कालीन राजा ज्ञानेंद्र प्रताप ने उनके पूर्वजों को लाल मुहर लगाकर एक पत्र दिया था जिसमें पूर्वजों को विंध्य धाम में दर्शन-पूजन के लिए अधिकृत किया गया था, तब से नेपाल राज परिवार को उनका ही परिवार मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन करवाता है। 
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इसी प्रकार राजा मांडा, दशनाम अखाड़ा के पुरोहित तरुण पांडेय छड़हा पंडा हैं। उनके अलावा रंका स्टेट और कश्मीर स्टेट के भी पुरोहित हैं। नगर वधुओं, किन्नरों और सपेरों के हैं अधिकृत पंडा विंध्य धाम में सपेरों, किन्नरों और नगर वधुओं के भी अधिकृत पंडा हैं। आगरा, सतना, जबलपुर, मिर्जापुर से आने वाली नगर वधुओं को पुरोहित मुन्ना मोछा दर्शन कराते हैं। इसी प्रकार तेजन गिरी किन्नर अखाड़ा के श्रद्धालुओं को दर्शन कराते हैं। पम्मी गिरी और भवानी मां को भी वही दर्शन कराते हैं। वहीं शंकरगढ़ सहित विभिन्न जिलों में रहने वाले सपेरों के पंडा बादल मिश्रा हैं।

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प्रमुख राजघराने और उनके पुरोहित

ग्वालियर स्टेट- शेखर शरण उपाध्याय, धमरुआ स्टेट व भिनगा स्टेट- त्रियोगी नारायण मिश्र, टिहरी गढ़वाल नरेश- कृष्ण लाल द्विवेदी, गौतम द्विवेदी। 


विंध्याचल में सिखों के भी हैं पुरोहित 
पुरोहित गौतम द्विवेदी के पास गुरु गोविंद सिंह जी के हुक्मनामे से जुड़े पत्र हैं। उनका दावा है कि पीढ़ियों से पहले गुरु गोविंद सिंह जी और महाराजा रणजीत सिंह ने भी मां के दरबार में मत्था टेका था। उनकी मुहर, गुरुमुखी में अभिलेख उनके पास मौजूद हैं। रतनगंज गुरुद्वारे से इसका परीक्षण भी कराया गया था। कुछ लेख फारसी में हैं। 

गौतम द्विवेदी का कहना है कि हमारा परिवार सिख धर्म के पुरोहित के रूप में जाना जाता है। हुक्मनामा के आधार पर सिखों के लिए कहा गया है कि जो भी सिख दर्शन करने आएगा, इस परिवार के माध्यम से मंदिर में पूजन करने जाएगा। 

पंडा समाज के अध्यक्ष बोले

कन्नौज का तिरवा स्टेट मां विंध्यवासिनी की कृपा आगे बढ़ा। इसी वजह से राजा का नाम दुर्गा नारायण सिंह पड़ा। हमारे परिवार के वो यजमान हैं। ऐसे 15-20 प्रमुख परिवार हैं, जो यहां के जमींदार भी कहे जाते हैं और उनका नाता किसी न किसी स्टेट से पीढ़ियों से चला आ रहा है। -पंकज द्विवेदी, अध्यक्ष श्री विंध्य पंडा समाज 

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