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जिला अस्पताल की बत्ती गुल
Mirzapur
Updated Tue, 06 Aug 2013 05:34 AM IST
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मिर्जापुर। जिला अस्पताल में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। आपूर्ति ठप होने से चिकित्सालय में भर्ती मरीजाें को उमस भरी गर्मी में भारी दिक्कताें का सामना करना पड़ रहा है।
सोमवार की भोर में करीब तीन बजे जिला अस्पताल की आपूर्ति अचानक ठप हो गई। इससे वार्ड में भर्ती छोटे बच्चों से लेकर पुरुष व महिला कहरते नजर आए। करीब एक घंटे तक उमस भरी गर्मी में रहने के बाद मरीजाें ने जब इसकी शिकायत अस्पताल के अधिकारियाें से की तो जेनरेटर चलाया गया। पांच घंटे चलने के बाद जेनरेटर भी खराब हो गया, जिससे और विकट समस्या खड़ी हो गई। चिकित्सक से लेकर वार्डो तक के पंखे बंद हो गए। कंप्यूटर नहीं चलने के कारण कर्मियों ने हाथ से परची काटकर मरीजाें को उपलब्घ कराया। उमस भरी गर्मी के चलते मरीजों का हाल बेहाल रहा। वह मरीज जो बेड से नहीं उठ पा रहे थे परिजन हाथ के पंखे से हवा देने का प्रयास कर रहे थे। वहीं जो मरीज कुछ चल फिर सकते थे वह गर्मी से निजात के लिए बेड छोड़कर बाहर गलियारे में आकर बैठे जाते थे। बताते चलें कि मंडलीय चिकित्सालय में चौबीस घंटे विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था है। बावजूद इसके आए दिन चिकित्सालय की व्यवस्था ठप रहती है। वहीं जेनरेटर भी खराब ही रहता है।
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सोमवार की भोर में करीब तीन बजे जिला अस्पताल की आपूर्ति अचानक ठप हो गई। इससे वार्ड में भर्ती छोटे बच्चों से लेकर पुरुष व महिला कहरते नजर आए। करीब एक घंटे तक उमस भरी गर्मी में रहने के बाद मरीजाें ने जब इसकी शिकायत अस्पताल के अधिकारियाें से की तो जेनरेटर चलाया गया। पांच घंटे चलने के बाद जेनरेटर भी खराब हो गया, जिससे और विकट समस्या खड़ी हो गई। चिकित्सक से लेकर वार्डो तक के पंखे बंद हो गए। कंप्यूटर नहीं चलने के कारण कर्मियों ने हाथ से परची काटकर मरीजाें को उपलब्घ कराया। उमस भरी गर्मी के चलते मरीजों का हाल बेहाल रहा। वह मरीज जो बेड से नहीं उठ पा रहे थे परिजन हाथ के पंखे से हवा देने का प्रयास कर रहे थे। वहीं जो मरीज कुछ चल फिर सकते थे वह गर्मी से निजात के लिए बेड छोड़कर बाहर गलियारे में आकर बैठे जाते थे। बताते चलें कि मंडलीय चिकित्सालय में चौबीस घंटे विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था है। बावजूद इसके आए दिन चिकित्सालय की व्यवस्था ठप रहती है। वहीं जेनरेटर भी खराब ही रहता है।
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