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जानलेवा बीमारी स्वाईन फ्लू से निपटने में मंडलीय अस्पताल फेल
Updated Fri, 18 Aug 2017 12:31 AM IST
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मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में स्वाइन फ्लू जैसी जानलेवा बीमारी से निपटने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। मरीजों को मंडलीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार के अतिरिक्त कोई सुविधा नहीं मिल पाती। गंभीर हालात में आए मरीजों के लिए अस्पताल में कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। पीएचसी व सीएचसी से भेजे गए सामान्य मरीजों को ही भर्ती कर इलाज किया जाता है। गंभीर हालात में मरीज को वाराणसी रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में आए दिन मरीजों के साथ आए तीमारदारों से अव्यवस्था व लापरवाही को लेकर हंगामा होता रहता है।
मंडलीय अस्पताल का हाल किसी से छुपा नहीं है। आए दिन मरीजों, तीमारदारों एवं चिकित्सकों के बीच नोकझोंक आम बात हो गई है। जिला महिला अस्पताल हो या पुरुष, अव्यवस्था के नाम पर दोनों अस्पताल किसी से पीछे नहीं हैं। गंभीर मरीजों को लेकर आने वाले तीमारदारों को मंडलीय अस्पताल में सुविधा के नाम पर चिकित्सकों द्वारा लिखा अन्यत्र रेफर पर्ची उनके हाथों में थमा दिया जाता है। निरीक्षण के दौरान कभी भी अस्पताल में व्यवस्था दुरुस्त नहीं पाई गई है। गोरखपुर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने से हुई मासूम बच्चों की मौत के बाद हरकत में आई प्रदेश सरकार प्रदेश के सभी अस्पतालों की व्यवस्था दुरुस्त करने में जुटी है, लेकिन मंडलीय अस्पताल की व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। बुधवार को नगर मजिस्ट्रेट के औचक निरीक्षण में उन्होंने खामियों के साथ-साथ आधा दर्जन चिकित्सकों को गैरहाजिर पाया था। जिनसे उन्होंने स्पष्टीकरण मांगा है। कई जिलों में जानलेवा बीमारी स्वाइन फ्लू अपने पैर पसार रही है, लेकिन मंडलीय अस्पताल की बात करें तो यहां उससे निपटने की कोई व्यवस्था नहीं है। रेस्प्रेटरी इंफेक्शन से फैलने वाली बीमारी स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए मंडलीय अस्पताल में मात्र रेफर तक की सुविधा है। जबकि स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए अलग से आईसोलेटेड वार्ड होना चाहिए। अस्पताल में तैनात चिकित्सकों ने बताया कि स्वाइन फ्लू जैसी जानलेवा बीमारी से निपटने में अस्पताल अक्षम है।
वर्जन
मंडलीय अस्पताल में दस बेड का स्पेशल वार्ड बनाया गया है। जिसमें सेंट्रल आक्सीजन की व्यवस्था की गई है। वायरल कल्चर की व्यवस्था न होने के बाद भी मरीजों को अस्पताल में पर्याप्त सुविधा दी जाती है। - डा. ओपी साही, एसआईसी।
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मंडलीय अस्पताल का हाल किसी से छुपा नहीं है। आए दिन मरीजों, तीमारदारों एवं चिकित्सकों के बीच नोकझोंक आम बात हो गई है। जिला महिला अस्पताल हो या पुरुष, अव्यवस्था के नाम पर दोनों अस्पताल किसी से पीछे नहीं हैं। गंभीर मरीजों को लेकर आने वाले तीमारदारों को मंडलीय अस्पताल में सुविधा के नाम पर चिकित्सकों द्वारा लिखा अन्यत्र रेफर पर्ची उनके हाथों में थमा दिया जाता है। निरीक्षण के दौरान कभी भी अस्पताल में व्यवस्था दुरुस्त नहीं पाई गई है। गोरखपुर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने से हुई मासूम बच्चों की मौत के बाद हरकत में आई प्रदेश सरकार प्रदेश के सभी अस्पतालों की व्यवस्था दुरुस्त करने में जुटी है, लेकिन मंडलीय अस्पताल की व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। बुधवार को नगर मजिस्ट्रेट के औचक निरीक्षण में उन्होंने खामियों के साथ-साथ आधा दर्जन चिकित्सकों को गैरहाजिर पाया था। जिनसे उन्होंने स्पष्टीकरण मांगा है। कई जिलों में जानलेवा बीमारी स्वाइन फ्लू अपने पैर पसार रही है, लेकिन मंडलीय अस्पताल की बात करें तो यहां उससे निपटने की कोई व्यवस्था नहीं है। रेस्प्रेटरी इंफेक्शन से फैलने वाली बीमारी स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए मंडलीय अस्पताल में मात्र रेफर तक की सुविधा है। जबकि स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए अलग से आईसोलेटेड वार्ड होना चाहिए। अस्पताल में तैनात चिकित्सकों ने बताया कि स्वाइन फ्लू जैसी जानलेवा बीमारी से निपटने में अस्पताल अक्षम है।
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मंडलीय अस्पताल में दस बेड का स्पेशल वार्ड बनाया गया है। जिसमें सेंट्रल आक्सीजन की व्यवस्था की गई है। वायरल कल्चर की व्यवस्था न होने के बाद भी मरीजों को अस्पताल में पर्याप्त सुविधा दी जाती है। - डा. ओपी साही, एसआईसी।
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