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मां षषऌ्टी देवी से मंगलकामना का मांगा वरदान
Updated Sun, 02 Sep 2018 12:08 AM IST
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विंध्याचल। विंध्य पर्वत पर अष्टभुजा मंदिर से करीब चार सौ मीटर दूर मां षष्ठी देवी के मंदिर में बड़ी संख्या में महिलाओं ने दर्शन-पूजन कर पुत्रों के दीर्घायु व मंगलमय भविष्य की कामना की। मंदिर को पुुष्पों एवं रंगीन झालरों से सजाया गया था। दर्शन पूजन का सिलसिला सुबह से देर शाम चलता रहा। मां के धाम में नव दंपती ने गाजे-बाजे के साथ हाजिरी लगाई और पुत्र प्राप्ति की कामना की।
विंध्य पर्वत पर विराजमान पुत्रदायनि मां षष्टी देवी जिन्हें भक्तजन खरष्टि देवी के नाम से भी पुकारते हैं। बता दें कि भाद्र पद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को ललई छट्ठ का पर्व मां विंध्याचल में धूमधाम से मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार ललई छठ पर्व के दिन महिलाएं पुत्र के लंबी उम्र के लिए मां छठ देवी (कात्यायनी) की पूजा अर्चना बड़े श्रद्घा भाव से करती हैं। शनिवार को ललई छठ पर्व पर प्रसिद्घ मां खरष्टि देवी के मेले में आस्थावानों का रेला उमड़ पड़ा। अष्टभुजा पहाड़ के नीचे कजरहवा पोखरा के समीप से ही पहाड़ के ऊपर मां षष्टी देवी तक रोड के दोनों तरफ लगाई गई अस्थाई दूकानों पर ग्राहकों की भीड़ जुटी रही। दूकानों से बच्चों ने खिलौने खरीदे वहीं खान-पान, पूजन सामग्री व मिठाई आदि की दूकानों पर भी ग्राहक डटे रहे। मां का दरबार शहनाइयों और नगाड़ो के धुन से गूंज उठा। बहुत सारे ऐसे भी परिवार से लोग बाजे गाजे से आये जिनके मन्नत को मां ने पूरा किया। प्रसाद के रूप में हलवा-पूड़ी, फल, बताशा, महुआ व पेड़ा आदि का भोग माता के दरबार में लगता रहा। मेला क्षेत्र में पुलिस के जवानो की ड्यूटी लगायी गयी थी। अष्टभुजा चौकी की तरफ से पुलिस के जवान मौजूद घथे, बड़े वाहनों को ऊपर चढ़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया था।
पं. देवेंद्र पांडेय उर्फ रिंकू महाराज ने बताया कि विंध्य पर्वत पर विराजमान माता षष्टि देवी साक्षात पुत्र दायिनी माता है। जो भी भक्त सच्चे मन से अपनी कामना मां धाम में लेकर आता है, वह अवश्य पूरा होता है। यदि कोई महिला मां की आराधना नित्य प्रतिदिन करती रहे तो मां उसकी भी झोली भर देती हैं। बताया कि मां भगवती कात्यायनी रूपा षष्ठी देवी द्वापर युग से ही मां विंध्यवासिनीदेवी के साथ विराजमान हैं। कहीं-कहीं यह भी उल्लेख मिलता है की द्रौपदी भी पुत्र प्राप्ति के लिए मां से आराधना किया था।
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विंध्य पर्वत पर विराजमान पुत्रदायनि मां षष्टी देवी जिन्हें भक्तजन खरष्टि देवी के नाम से भी पुकारते हैं। बता दें कि भाद्र पद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को ललई छट्ठ का पर्व मां विंध्याचल में धूमधाम से मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार ललई छठ पर्व के दिन महिलाएं पुत्र के लंबी उम्र के लिए मां छठ देवी (कात्यायनी) की पूजा अर्चना बड़े श्रद्घा भाव से करती हैं। शनिवार को ललई छठ पर्व पर प्रसिद्घ मां खरष्टि देवी के मेले में आस्थावानों का रेला उमड़ पड़ा। अष्टभुजा पहाड़ के नीचे कजरहवा पोखरा के समीप से ही पहाड़ के ऊपर मां षष्टी देवी तक रोड के दोनों तरफ लगाई गई अस्थाई दूकानों पर ग्राहकों की भीड़ जुटी रही। दूकानों से बच्चों ने खिलौने खरीदे वहीं खान-पान, पूजन सामग्री व मिठाई आदि की दूकानों पर भी ग्राहक डटे रहे। मां का दरबार शहनाइयों और नगाड़ो के धुन से गूंज उठा। बहुत सारे ऐसे भी परिवार से लोग बाजे गाजे से आये जिनके मन्नत को मां ने पूरा किया। प्रसाद के रूप में हलवा-पूड़ी, फल, बताशा, महुआ व पेड़ा आदि का भोग माता के दरबार में लगता रहा। मेला क्षेत्र में पुलिस के जवानो की ड्यूटी लगायी गयी थी। अष्टभुजा चौकी की तरफ से पुलिस के जवान मौजूद घथे, बड़े वाहनों को ऊपर चढ़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया था।
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पं. देवेंद्र पांडेय उर्फ रिंकू महाराज ने बताया कि विंध्य पर्वत पर विराजमान माता षष्टि देवी साक्षात पुत्र दायिनी माता है। जो भी भक्त सच्चे मन से अपनी कामना मां धाम में लेकर आता है, वह अवश्य पूरा होता है। यदि कोई महिला मां की आराधना नित्य प्रतिदिन करती रहे तो मां उसकी भी झोली भर देती हैं। बताया कि मां भगवती कात्यायनी रूपा षष्ठी देवी द्वापर युग से ही मां विंध्यवासिनीदेवी के साथ विराजमान हैं। कहीं-कहीं यह भी उल्लेख मिलता है की द्रौपदी भी पुत्र प्राप्ति के लिए मां से आराधना किया था।
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