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कथा में श्रीकृष्ण सुदामा के संबंधों को किया उजागर
Updated Thu, 30 Nov 2017 11:25 PM IST
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क्षेत्र के बबुरा भैरोदयाल गांव में श्रीमद् भागवत प्रेम ज्ञान यज्ञ कथा के सातवें दिन गुरुवार को कथा वाचक पं कलातीत महाराज ने श्रीकृष्ण व सुदामा के संबंधों को उजागर किया। कहा कि मित्रता में भेद राग द्वेष नही होता। कहा कि मित्र सहयोगी होता है प्रतियोगी नही। कहा की मित्र स्वार्थी नही परमार्थी होता है।कहा कि मित्रता एक संस्कार है इसकी बुनियाद पर कोई छल प्रपंच का महल नही बल्कि आदर्श विश्वास एवं प्रेम की रोशनी निकलती है। जिससे समाज के युवा शिक्षा ग्रहण करके मित्रता के कर्तव्य का निर्वहन करते हैं। कहा कि मित्रता का मापदंड धन वैभव नही है यह एक भाव है जहां से विवेक पैदा होता है जो बड़ा लाभकारी होता है।महाराज जी ने कहा कि कुसंग रुढ़ि और कुविचार से भटकाव की राह मिलती है। जिसके कारण लोग मदिरापान ,मार काट, व्यभिचार ,छल प्रपंच का जीवन जीते हैं और अपयश के भागीदार हो जाते हैं। वाराणसी के सामवेद के आचार्य रत्नेश महराज ने कहा कि भगवत कथा के श्रवण मनन चिंतन से आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण होता है। इसका प्रभाव बाल वृद्ध, नौजवान पर गहराई से पड़ता है। जिसमे अपार उर्जा रहती है इसी संस्कार मे पैदा होने वाला बालक तेजस्वी एवं परिवार के लोग यशस्वी होते हैं। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष बालेन्दुमणि त्रिपाठी, पं कृष्णकांत दुबे, शिवराम मिश्रा ,हरिगोविंद त्रिपाठी, हरिशंकर मिश्रा, दिनेश गिरि, ज्ञानचंद शुक्ला, भरत लाल मिश्रा, अवधेश त्रिपाठी, बृजेश एडवोकेट, प्रकाश चंद आदि थे। मुख्य यजमान केपी त्रिपाठी व गुलाबकली ने पूजन के साथ आरती किया। सप्ताह तक चलने वाले कथा के समापन अवसर पर प्रसाद का वितरण किया गया।
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