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मंडलीय चिकित्साल समेत 100 चिकित्सालयों पर आग से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं
Updated Mon, 17 Jul 2017 12:42 AM IST
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मिर्जापुर। मंडल के सबसे बड़े चिकित्सालय समेत जिले के किसी सरकारी चिकित्सालय में आग से बचाव के लिए कोई इंतजाम नहीं है। जिला महिला चिकित्सालय में आग की घटना रोकने के लिए कोई यंत्र नहीं रखे गए हैं। ऐसे हालात में अगर इन चिकित्सालयों में अगलगी की घटना होती है तो सैकड़ों मरीजों की जान खतरे में पड़ जाएगी। हादसा होने पर लापरवाह अधिकारियों का खामियाजा उन मरीजों के परिजनों को भुगतना पड़ेगा जिनके साथ यह घटना घटेगी।
बता दें कि मंडलीय चिकित्सालय में प्रतिदिन एक हजार से लेकर ढाई हजार तक मरीज अपना इलाज कराने आते हैं। 155 बेडों वाले इस चिकित्सालय में करीब सौ से अधिक मरीज प्रतिदिन भर्ती रहते हैं। फिर भी इस चिकित्सालय में आग से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं है। किसी वार्ड या ओपीडी में सीज फायर के सिलेंडर नहीं रखे गए हैं। ना ही अस्पताल परिसर में आग बुझाने के लिए बाल्टियों में बालू रखा गया है।
ऐसी स्थिति में चिकित्सालय में आग लगने पर उसको कंट्रोल करना मुश्किल हो जाएगा और उसकी चपेट में आकर सैकड़ों मरीजों की जानें जा सकती हैं। पहले तो इस चिकित्सालय में तीन तरफ से बाहर निकलने का रास्ता था लेकिन वर्तमान समय में मात्र एक ही रास्ता आने जाने के लिए खोला गया है। बाहर निकलने का अन्य कोई रास्ता नहीं होने के चलते भगदड़ होने पर भी कई मरीजों की जानें जा सकती हैं।
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जिला महिला चिकित्सालय में तो सबसे अधिक खतरा है। यहां पर महिलाओं के साथ मासूम भी भर्ती रहते हैं। जिनके जीवन से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी खिलवाड़ कर रहे हैं। खुदा न खास्ता किसी दिन इस चिकित्सालय में आग लग गई तो बड़ा हादसा होने से कोई नहीं रोक सकता है।
जनपद में आठ सीएचसी व 16 पीएचसी हैं। इसके अलावा 50 से अधिक न्यू पीएचसी भी हैं। यहां भी प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। कुछ तो प्रतिदिन भर्ती भी रहते हैं। इन पर भी आग से बचाव के लिए कोई व्यवस्था नहीं किया गया है।
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बता दें कि मंडलीय चिकित्सालय में प्रतिदिन एक हजार से लेकर ढाई हजार तक मरीज अपना इलाज कराने आते हैं। 155 बेडों वाले इस चिकित्सालय में करीब सौ से अधिक मरीज प्रतिदिन भर्ती रहते हैं। फिर भी इस चिकित्सालय में आग से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं है। किसी वार्ड या ओपीडी में सीज फायर के सिलेंडर नहीं रखे गए हैं। ना ही अस्पताल परिसर में आग बुझाने के लिए बाल्टियों में बालू रखा गया है।
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ऐसी स्थिति में चिकित्सालय में आग लगने पर उसको कंट्रोल करना मुश्किल हो जाएगा और उसकी चपेट में आकर सैकड़ों मरीजों की जानें जा सकती हैं। पहले तो इस चिकित्सालय में तीन तरफ से बाहर निकलने का रास्ता था लेकिन वर्तमान समय में मात्र एक ही रास्ता आने जाने के लिए खोला गया है। बाहर निकलने का अन्य कोई रास्ता नहीं होने के चलते भगदड़ होने पर भी कई मरीजों की जानें जा सकती हैं।
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जिला महिला चिकित्सालय में तो सबसे अधिक खतरा है। यहां पर महिलाओं के साथ मासूम भी भर्ती रहते हैं। जिनके जीवन से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी खिलवाड़ कर रहे हैं। खुदा न खास्ता किसी दिन इस चिकित्सालय में आग लग गई तो बड़ा हादसा होने से कोई नहीं रोक सकता है।
जनपद में आठ सीएचसी व 16 पीएचसी हैं। इसके अलावा 50 से अधिक न्यू पीएचसी भी हैं। यहां भी प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। कुछ तो प्रतिदिन भर्ती भी रहते हैं। इन पर भी आग से बचाव के लिए कोई व्यवस्था नहीं किया गया है।