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स्वस्थ व निरोगी रहने को शहद लाभकारी:डा. पटनायक
Updated Mon, 14 Aug 2017 12:15 AM IST
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सीखड़। प्रदेश में मधुमक्खी पालन की अपार संभावनाओं को देखते हुए किसानों के सर्वांगीण विकास हेतु प्रधानमंत्री कौशल विकास एवं किसानों की आय दोगुना करने की योजना चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि शरीर को स्वस्थ एवं निरोगी रखने के लिए शहद का उपयोग लाभकारी होता है। उक्त बातें समेकित मधुमक्खी पालन केंद्र के शुभारंभ के बाद कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग सचिव डा. एसके पटनायक ने कहा। शोध प्रक्षेत्र एवं प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया एवं उत्कृष्ट कार्य हेतु निदेशक एवं वैज्ञानिकों की सराहना किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश में शहद की प्रति व्यक्ति प्रतिदिन उपलब्धता केवल 10 ग्राम है, जबकि विकसित देशों में 250 ग्राम है। शहद उत्पाद को बढ़ाने की जरूरत है, जिससे केवल औषधि के रूप में ही नहीं बल्कि पोषणीय भोजन के रूप में भी उपयोग होने लगे। मधुमक्खियों द्वारा उत्पादित अन्य उत्पादों जैसे प्रोपोलिस, रायल जेली, बी वेनम का खाद्य, औषधीय एवं सौंदर्य प्रसाधन के उद्योग में भली-भांति प्रयोग किया जा सकता है। किसानों को वैज्ञानिक ढंग से समन्वित मधुक्खी पालन को अपनाने की दिशा में मदद करेगा। किसान एक स्थान पर पालन कर लाभ उठा सकते हैं। निदेशक डा. बिजेन्द्र सिंह ने कहा कि मधुमक्खियों द्वारा फसल परागण से 2 से 33150 प्रतिशत तक उपज में वृद्धि प्राप्त होती है। संयोजक डा. एबी राय ने एपिस मेलीफेरा के गुण, रानी मक्खी, प्रजनक द्रव्य का विकास, रानी मक्खी के गुणन की इकाई, मधुमक्खी रोग निदान प्रयोगशाला आदि के बारे में जानकारी दी। मधुमक्खी उत्पाद के निष्कासन एवं प्रसंस्करण इकाई, वैज्ञानिक ढंग से मधुमक्खी पालन के सूचना केंद्र से पालन की तकनीक की जानकारी मिलेगी। इस अवसर पर डा. जगदीश सिंह, डा. पीएम सिंह, डा. सुधीर सिंह, डा. डीआर भारद्वाज, डा. सुधाकर पांडेय, डा. नीरज सिंह, डा. एएन त्रिपाठी, डा. केके पांडेय आदि मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश में शहद की प्रति व्यक्ति प्रतिदिन उपलब्धता केवल 10 ग्राम है, जबकि विकसित देशों में 250 ग्राम है। शहद उत्पाद को बढ़ाने की जरूरत है, जिससे केवल औषधि के रूप में ही नहीं बल्कि पोषणीय भोजन के रूप में भी उपयोग होने लगे। मधुमक्खियों द्वारा उत्पादित अन्य उत्पादों जैसे प्रोपोलिस, रायल जेली, बी वेनम का खाद्य, औषधीय एवं सौंदर्य प्रसाधन के उद्योग में भली-भांति प्रयोग किया जा सकता है। किसानों को वैज्ञानिक ढंग से समन्वित मधुक्खी पालन को अपनाने की दिशा में मदद करेगा। किसान एक स्थान पर पालन कर लाभ उठा सकते हैं। निदेशक डा. बिजेन्द्र सिंह ने कहा कि मधुमक्खियों द्वारा फसल परागण से 2 से 33150 प्रतिशत तक उपज में वृद्धि प्राप्त होती है। संयोजक डा. एबी राय ने एपिस मेलीफेरा के गुण, रानी मक्खी, प्रजनक द्रव्य का विकास, रानी मक्खी के गुणन की इकाई, मधुमक्खी रोग निदान प्रयोगशाला आदि के बारे में जानकारी दी। मधुमक्खी उत्पाद के निष्कासन एवं प्रसंस्करण इकाई, वैज्ञानिक ढंग से मधुमक्खी पालन के सूचना केंद्र से पालन की तकनीक की जानकारी मिलेगी। इस अवसर पर डा. जगदीश सिंह, डा. पीएम सिंह, डा. सुधीर सिंह, डा. डीआर भारद्वाज, डा. सुधाकर पांडेय, डा. नीरज सिंह, डा. एएन त्रिपाठी, डा. केके पांडेय आदि मौजूद रहे।
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