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डा. मुखर्जी ने मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति का किया विरोध
Updated Sat, 24 Jun 2017 12:55 AM IST
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मिर्जापुर। डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस पर भाजपाजनों ने शुक्रवार को श्रद्धासुमन अर्पित किया साथ ही कई स्थानों पर गोष्ठी का आयोजन किया। बरौधा कचार स्थित भाजपा कार्यालय पर प्रदेश कार्य समिति सदस्य गंगा सागर दूबे ने पुष्प चढ़ा कर उनके राजनैतिक जीवन पर प्रकाश डाला। कहा कि डा. मुखर्जी ने मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि डा. मुखर्जी ने मुहम्मद अली जिन्ना और मुस्लिम लीग की सांप्रदायिकतावादी राजनीति का विरोध किया था। जिन्ना मुसलमानों के लिए ज्यादा रियायत की मांग कर रहे थे। उन्होेंने मुस्लिम लीग के सांप्रदायिकतावादी दुष्प्रचार से हिंदुओं की रक्षा के लिए कार्य किया। नगर विधायक रत्नाकर मिश्रा ने कहा कि डा. मुखर्जी धर्म के आधार पर विभाजन के कट्टर विरोधी थे। उनका मानना था कि हम सब एक हैं, हममे कोई अंतर नहीं है। कार्यक्रम की अध्यक्षता धर्मराज सिंह पटेल और संचालन रमेश दूबे ने किया। मालती त्रिपाठी ने कहा कि डा. मुखर्जी जम्मू कश्मीर राज्य को अलग राज्य का दिए जाने के घोर विरोधी थे। इस दौरान राजेंद्र सिंह पटेल, आशुकांत चुनाहे, अलंकार, प्रदीप सोनकर, विरेंद्र प्रताप यादव, निर्मला राय, डाली अग्रहरि, अमित सिन्हा, मनोज दूबे आदि मौजूद रहे। हिंदू जागरण मंच के तत्वावधान में डा. मुखर्जी का बलिदान दिवस मनाया और श्रद्धासुमन अर्पित किया। जिलाध्यक्ष पं. दिवाकर मिश्र ने कहा कि डा. मुखर्जी धर्म के आधार पर विभाजन के कट्टर विरोधी थे। उन्होंने हिदुओं की रक्षा के लिए कार्य किया। इस दौरान निशांत कुमार गुप्ता, अश्वनी गुप्ता, सोनू जायसवाल, रोहित त्रिपाठी, शिखर गिरि, सुशांत पांडेय, प्रहलाद उपाध्याय, पियूष तिवारी आदि मौजूद रहे। उधर भारतीय जनता पार्टी नगर मंडल के कार्यकर्ताओं ने भारती जनसंघ के संस्थापक डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि को बलिदान दिवस के रूप में मुकेरी बाजार स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क मे ंउनके चित्र पर मार्ल्यापण कर मनाया। इस इस मौके पर नगर विधायक रत्नाकर मिश्र ने कहा कि डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश के लिए अपना बलिदान किया। कहा कि यदि कांग्रेस ने उनकी बातों को मान लिया होता तो कश्मीर को आज ये दिन नहीं देखना पड़ता। जिला महामंत्री आशुकांत चुनाहे ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी धर्म के आधार पर विभाजन के कट्टर विरोधी थे। नगर उपाध्यक्ष नितिन विश्वकर्मा ने कहा कि डा. मुखर्जी देश के लिए बलिदानी योद्धा के रूप में याद किए जाएंगे। इस मौके पर अमित सिंह, चंद्रांशु गोयल, अलंकार जायसवाल, रवि पुरवार, आशुतोष त्रिपाठी, मृत्युंजय त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि डा. मुखर्जी ने मुहम्मद अली जिन्ना और मुस्लिम लीग की सांप्रदायिकतावादी राजनीति का विरोध किया था। जिन्ना मुसलमानों के लिए ज्यादा रियायत की मांग कर रहे थे। उन्होेंने मुस्लिम लीग के सांप्रदायिकतावादी दुष्प्रचार से हिंदुओं की रक्षा के लिए कार्य किया। नगर विधायक रत्नाकर मिश्रा ने कहा कि डा. मुखर्जी धर्म के आधार पर विभाजन के कट्टर विरोधी थे। उनका मानना था कि हम सब एक हैं, हममे कोई अंतर नहीं है। कार्यक्रम की अध्यक्षता धर्मराज सिंह पटेल और संचालन रमेश दूबे ने किया। मालती त्रिपाठी ने कहा कि डा. मुखर्जी जम्मू कश्मीर राज्य को अलग राज्य का दिए जाने के घोर विरोधी थे। इस दौरान राजेंद्र सिंह पटेल, आशुकांत चुनाहे, अलंकार, प्रदीप सोनकर, विरेंद्र प्रताप यादव, निर्मला राय, डाली अग्रहरि, अमित सिन्हा, मनोज दूबे आदि मौजूद रहे। हिंदू जागरण मंच के तत्वावधान में डा. मुखर्जी का बलिदान दिवस मनाया और श्रद्धासुमन अर्पित किया। जिलाध्यक्ष पं. दिवाकर मिश्र ने कहा कि डा. मुखर्जी धर्म के आधार पर विभाजन के कट्टर विरोधी थे। उन्होंने हिदुओं की रक्षा के लिए कार्य किया। इस दौरान निशांत कुमार गुप्ता, अश्वनी गुप्ता, सोनू जायसवाल, रोहित त्रिपाठी, शिखर गिरि, सुशांत पांडेय, प्रहलाद उपाध्याय, पियूष तिवारी आदि मौजूद रहे। उधर भारतीय जनता पार्टी नगर मंडल के कार्यकर्ताओं ने भारती जनसंघ के संस्थापक डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि को बलिदान दिवस के रूप में मुकेरी बाजार स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क मे ंउनके चित्र पर मार्ल्यापण कर मनाया। इस इस मौके पर नगर विधायक रत्नाकर मिश्र ने कहा कि डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश के लिए अपना बलिदान किया। कहा कि यदि कांग्रेस ने उनकी बातों को मान लिया होता तो कश्मीर को आज ये दिन नहीं देखना पड़ता। जिला महामंत्री आशुकांत चुनाहे ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी धर्म के आधार पर विभाजन के कट्टर विरोधी थे। नगर उपाध्यक्ष नितिन विश्वकर्मा ने कहा कि डा. मुखर्जी देश के लिए बलिदानी योद्धा के रूप में याद किए जाएंगे। इस मौके पर अमित सिंह, चंद्रांशु गोयल, अलंकार जायसवाल, रवि पुरवार, आशुतोष त्रिपाठी, मृत्युंजय त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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