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घर-घर दस्तक देने लगे निकाय प्रत्याशी
Updated Mon, 13 Nov 2017 12:30 AM IST
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चुनार। नामांकन पत्रों की जांच के बाद नगर पालिका परिषद के चुनाव प्रचार में तेजी आ गई है। चुनार नगर पालिका के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अब घर-घर दस्तक देने लगे है। जनसंपर्क के साथ-साथ राजनीतिक गुणा गणित शुरू हो गई है। प्रत्याशी एक दूसरे प्रचार कार्यक्रमों पर निगाह बनाए हुए हैं और उसकी तुरंत काट भी तैयार कर रहे हैं। इससे अन्य दलों के प्रत्याशी भी अपने समर्थकों संग उसी इलाके में पहुंचकर मतदाताओं से मुलाकात कर रहे हैं। अपने को विकास के लिए समर्पित व सच्चा जनसेवक बताने से नहीं चुक रहे हैं। प्रत्याशी सुबह शाम मुहल्लों में जाकर मतदाताओं का कुशल क्षेम पूछ अपनत्व जताने में लगे हुए है।
नगर निकाय चुनाव में विभिन्न राजनैतिक दलों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता चुनाव लड़कर नगर पालिका में प्रतिनिधित्व करने का सपना काफी दिनों से सजा रखा है। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद उसे अमली जामा पहनाने में लगने के साथ ही पार्टी से टिकट पाने के लिए जोड़तोड़ शुरू कर दिया। नगर से लेकर पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों तक अपनी अपनी जुगत बनाने में लग गए थे। पार्टी द्वारा उम्मीदवार की घोषणा करने तक सभी उम्मीदवार अपना टिकट कन्फर्म बता रहे थे। लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी जिन उम्मीदवारों को पार्टी से टिकट नही मिला। ऐसे उम्मीदवार बागी प्रत्याशी बनकर चुनाव लड़ रहे है। बागी प्रत्याशियों के चुनाव मैदान में उतर जाने से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। बीते कार्यकाल में प्रतिनिधियों द्वारा कराये गये विकास कार्य को नाकाफी बताते हुए सेवा का अवसर मांग रहे हैं। पार्टी के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को प्रत्याशी व बागी प्रत्याशी के पक्ष में मांगे जा रहे समर्थन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
नगर निकाय चुनाव में विभिन्न राजनैतिक दलों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता चुनाव लड़कर नगर पालिका में प्रतिनिधित्व करने का सपना काफी दिनों से सजा रखा है। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद उसे अमली जामा पहनाने में लगने के साथ ही पार्टी से टिकट पाने के लिए जोड़तोड़ शुरू कर दिया। नगर से लेकर पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों तक अपनी अपनी जुगत बनाने में लग गए थे। पार्टी द्वारा उम्मीदवार की घोषणा करने तक सभी उम्मीदवार अपना टिकट कन्फर्म बता रहे थे। लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी जिन उम्मीदवारों को पार्टी से टिकट नही मिला। ऐसे उम्मीदवार बागी प्रत्याशी बनकर चुनाव लड़ रहे है। बागी प्रत्याशियों के चुनाव मैदान में उतर जाने से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। बीते कार्यकाल में प्रतिनिधियों द्वारा कराये गये विकास कार्य को नाकाफी बताते हुए सेवा का अवसर मांग रहे हैं। पार्टी के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को प्रत्याशी व बागी प्रत्याशी के पक्ष में मांगे जा रहे समर्थन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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