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जगत जननी के जयकारे से गूंजा धाम
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Tue, 20 Oct 2015 12:43 AM IST
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शारदीय नवरात्र के षष्टम तिथि पर पावन विंध्याचल दरबार में देश के कोने-कोने से आए दर्शनार्थियों ने हाजिरी लगाई। मंदिर पहुंचकर किसी ने गर्भगृह से तो किसी ने झांकी से दर्शन कर सुख समृदि्ध के लिए कामना किया।
घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा एवं जगत जननी के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो रहा था। नवरात्र मेले में जहां एक ओर विंध्य की गलियों में दिन भर चहल-पहल बना रहा, वहीं मंदिर में दर्शन-पूजन करने को तांता लगा रहा।
विंध्याचल मंदिर में भोर में चार बजे मां विंध्यवासिनी देवी की भव्य मंगला आरती के बाद से भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर रात तक अनवरत चलता रहा।
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विंध्याचल के गंगा घाटों पर स्नान-ध्यान करने के बाद भक्तों ने नारियल-चुनरी, माला-फूल, रोरी-रक्षा, लाचीदाना-कपूर एवं प्रसाद लेकर विंध्य दरबार पहुुंचे, जहां फूलों से किया गया जगत कल्याणी के भव्य स्वरूप का श्रृंगार दर्शन कर निहाल हो उठे।
न्यू वीआईपी और पुरानी वीआईपी रोड सहित थाना गली, बच्चा पाठक की गली में दर्शन-पूजन करने के लिए आस्थावानों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्घालु हाथ में प्रसाद लिएमाता का जयघोष करते मंदिर की तरफ बढ़े चले जा रहे थे। मंदिर पहुंचने के बाद भक्तों ने बड़े ही श्रद्घाभाव से दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्घि के लिए कामना किया।
माता का दर्शन पूजन करने के बाद भक्तों ने मंदिर परिसर में स्थित हवन-कुंड का परिक्रमा करने के साथ ही समस्त देवी-देवताओं के मंदिरों में जाकर दर्शन-पूजन कर पुण्य के भागी बने।
मंदिर के छत पर जहां एक ओर गुंबद का परिक्रमा करने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा, वहीं साधकों द्वारा पूजन-अनुष्ठान एवं बच्चों के मुंडन संस्कार की भी दौर अनवरत चलता रहा।
मंदिर के सामने स्थित खोया-पाया केंद्र से मेले में गुम हुए बच्चों की सूचनाएं भी लगातार प्रसारित की जा रही थी।
विंध्याचल मंदिर में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा-व्यवस्था के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए थे।
मंदिर में पुलिस व पीएसी के जवानों सहित श्री विंध्य पंडा समाज के पदाधिकारी व सदस्यों तथा स्काउट-गाइड भक्तों की सेवा में डटे रहे।
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घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा एवं जगत जननी के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो रहा था। नवरात्र मेले में जहां एक ओर विंध्य की गलियों में दिन भर चहल-पहल बना रहा, वहीं मंदिर में दर्शन-पूजन करने को तांता लगा रहा।
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विंध्याचल मंदिर में भोर में चार बजे मां विंध्यवासिनी देवी की भव्य मंगला आरती के बाद से भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर रात तक अनवरत चलता रहा।
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विंध्याचल के गंगा घाटों पर स्नान-ध्यान करने के बाद भक्तों ने नारियल-चुनरी, माला-फूल, रोरी-रक्षा, लाचीदाना-कपूर एवं प्रसाद लेकर विंध्य दरबार पहुुंचे, जहां फूलों से किया गया जगत कल्याणी के भव्य स्वरूप का श्रृंगार दर्शन कर निहाल हो उठे।
न्यू वीआईपी और पुरानी वीआईपी रोड सहित थाना गली, बच्चा पाठक की गली में दर्शन-पूजन करने के लिए आस्थावानों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्घालु हाथ में प्रसाद लिएमाता का जयघोष करते मंदिर की तरफ बढ़े चले जा रहे थे। मंदिर पहुंचने के बाद भक्तों ने बड़े ही श्रद्घाभाव से दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्घि के लिए कामना किया।
माता का दर्शन पूजन करने के बाद भक्तों ने मंदिर परिसर में स्थित हवन-कुंड का परिक्रमा करने के साथ ही समस्त देवी-देवताओं के मंदिरों में जाकर दर्शन-पूजन कर पुण्य के भागी बने।
मंदिर के छत पर जहां एक ओर गुंबद का परिक्रमा करने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा, वहीं साधकों द्वारा पूजन-अनुष्ठान एवं बच्चों के मुंडन संस्कार की भी दौर अनवरत चलता रहा।
मंदिर के सामने स्थित खोया-पाया केंद्र से मेले में गुम हुए बच्चों की सूचनाएं भी लगातार प्रसारित की जा रही थी।
विंध्याचल मंदिर में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा-व्यवस्था के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए थे।
मंदिर में पुलिस व पीएसी के जवानों सहित श्री विंध्य पंडा समाज के पदाधिकारी व सदस्यों तथा स्काउट-गाइड भक्तों की सेवा में डटे रहे।