विश्व खाद्य दिवस 2020: गन्ने ने प्रभावित किया गेहूं और धान का रकबा, पढ़िए खास रिपोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
World Food Day 2020: देश को खाद्यान्न मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए वर्ष 1966-67 में शुरू की गई हरित क्रांति से भारत गेहूं और धान में तो आत्मनिर्भर हो गया, लेकिन मेरठ जनपद में गन्ने की फसल ने इसे पूरी तरह प्रभावित किया है। एक समय बड़ी मात्रा में पैदा होने वाला गेहूं और धान का रकबा अब यहां घटता-बढ़ता रहता है।
गंगा-यमुना दोआबा के क्षेत्र मेरठ जनपद में आज से करीब 30 साल पहले गेहूं, चावल, जौ, बाजरा, मक्का और चना आदि को गन्ने के साथ आदर्श फसल रकबा संतुलन के तौर पर उगाया जाता था। लेकिन अब चना, बाजरा, मक्का और जौ लोगों ने मानों उगाना ही बंद कर दिया है।
किसान गेहूं और धान भी अपनी जरूरत के लायक ही उगा रहे हैं। क्षेत्र में चीनी मिलों की संख्या और गन्ना रेट बढ़ने से किसानों ने गेहूं और चावल की खेती व्यावसायिक तौर पर बंद कर अपने खाने लायक ही उगानी शुरू कर दी है। जौ और चने का रकबा दहाई और सैकड़े के अंकों में सिमट गया है। ज्वार, बाजरा और मक्का का शून्य पर पहुंच गया है।
एमएसपी से कम मिल रहा दाम
किसानों का कहना है कि सरकार गेहूं और धान की खरीद एमएसपी पर केवल छह फीसदी किसानों से ही करती है। छोटे किसानों को गांव में ही बिचौलियों को अपनी फसल एमएसपी से कम दाम पर बेचनी पड़ती है। गेहूं, चावल, ज्वार और बाजरा को आवारा पशु ही चट कर जाते हैं।
यह है रकबे की स्थिति
फसल 2016-17 2017-18 2018-19
धान 14850 14397 15200
गेहूं 76095 75592 80065
जौ 62 99 133
चना 03 05 12
यह भी पढ़ें: मेरठ में विद्युत विभाग की टीम पर जानलेवा हमला, एसडीओ समेत कई कर्मचारी घायल
जिले में खाद्यान्न की कमी नहीं
जिला पूर्ति अधिकारी नीरज सिंह का कहना है कि जनपद में खाद्यान्न की कोई कमी नहीं है। जिले में हर महीने 1.26 लाख क्विंटल गेहूं और 84 हजार क्विंटल चावल का वितरण किया जा रहा है। विश्व खाद्य दिवस को देखते हुए इस बार तीन दिन ज्यादा यानि 17 अक्तूबर तक गेहूं और चावल का वितरण किया जाएगा।
एमएसपी से कम मिल रहा दाम
किसानों का कहना है कि सरकार गेहूं और धान की खरीद एमएसपी पर केवल छह फीसदी किसानों से ही करती है। छोटे किसानों को गांव में ही बिचौलियों को अपनी फसल एमएसपी से कम दाम पर बेचनी पड़ती है। गेहूं, धान, ज्वार और बाजरा को आवारा पशु ही चट कर जाते हैं।
रसायनों से खाद्यान्न की गुणवत्ता प्रभावित
रसायनों के अधिक प्रयोग से जमीन की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है और कीटनाशकों के प्रयोग से खाद्यान्न की गुणवत्ता को हानि पहुंच रही है। बीमार मृदा की फसल भी बीमार ही होती है। - डॉ. अशोक सिंह, केवीके हापुड़
चारे के लिए उगा रहे मक्का और ज्वार
गन्ने की खेती के चलते गेहूं और धान का रकबा प्रभावित हुआ है। ज्वार, बाजरा और मक्का पशुचारे के लिए उगाई जा रही है। जौ का रकबा धीरे-धीरे बढ़ रहा है। - ब्रजेश चंद्र, उप निदेशक, कृषि विभाग, मेरठ
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/