मेरठ: कमीशन के चक्रव्यूह में फंसी शहर की जलापूर्ति, गिर रहा जलस्तर
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शहर में निगम की पाइप लाइन का फैला जाल
शहर में जल निगम की नई 725 किलोमीटर की पाइप लाइन के अलावा नगर निगम और एमडीए द्वारा डाली गयी हजारों मीटर पानी की पाइप लाइन है। अधिकतर पाइप लाइन को ट्यूबवेल से ही जोड़ा गया है। सवाल है कि जब गंगाजल परियोजना की क्षमता 100 क्यूसेक की है, तो फिर शहर की अन्य पाइप लाइन को इससे क्यों नहीं जोड़ा जा रहा है। उदाहरण के लिए बच्चा पार्क पर बने भूमिगत जलाशय को भी गंगाजल परियोजना से नहीं जोड़ा गया है।
ये है गंगाजल योजना
जेएनएनयूआरएम योजन के तहत 2010 में शहर में लगभग 350 करोड़ रुपये से गंगाजल योजना की नींव रखी गई थी, जिसमें भोले की झाल से लेकर शहर के विभिन्न इलाकों में पाइप लाइन डालने का काम किया गया। भोले की झाल पर गंगाजल ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया, जिससे शहर की जनता को 43 क्यूसेक गंगाजल की आपूर्ति किए जाने का दावा है।
कुल लागत : 341.30 करोड़
मुख्य लाइन : 21.04 किलोमीटर
डिस्ट्रीब्यूशन लाइन : 725 किलोमीटर में बिछाई गई
इन इलाकों तक ही पहुंच रहा है गंगाजल
- सर्किट हाउस जलाशय से साकेत, सिविल लाइन क्षेत्र, सूर्य नगर, प्रगति नगर, आफिसर कालोनी, वेस्टर्न कचहरी रोड, शिवाजी रोड, नंगला बट्टू, अशोक वाटिका, प्रभातनगर, मोहनपुरी, मंगलपांडे नगर सहित 17 कालोनी एवं मोहल्ले।
- घंटाघर टाउन हॉल जलाशय से घंटाघर, पत्थर वालान, सरायलालदास, लाला का बाजार, नील गली, शीशमहल, डालमपाड़ा, होली चौक, कागजी बाजार, जलीकोठी, केसरगंज, छतरीवाला पीर, खैरनगर, शहर सर्राफा आदि इलाके।
- शर्मा स्मारक जलाशय से बच्चा पार्क, ईव्ज चौराहा, छीपीटैंक शिव चौक, बुढ़ाना गेट सहित आसपास के बड़े इलाके।
- विकासपुरी जलाशय से लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र, कांच का पुल, विकासपुरी आदि क्षेत्र से जुड़े मोहल्ले। हालांकि काफी इलाका ऐसा है, जहां छोटी पाइप लाइन को मुख्य पाइप लाइन से जोड़ा ही नहीं गया है।
लगते रहे हैं भ्रष्टाचार के आरोप
सबमर्सिबल, ट्यूबवेल, हैंडपंप आदि की रिपेयर, विद्युत बिल पर प्रतिवर्ष दस करोड़ से अधिक खर्च हो रहा है। रिपेयर हो या रिबोर को मामला। सभी में भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। तीन साल पहले तो सबमर्सिबल की मोटर बदलने के नाम पर गोलमाल का खुलासा हुआ था। यही कारण है कि जल कल विभाग के अधिकारी गंगाजल परियोजना को आगे बढ़ाने की सहमति नहीं देते हैं। इससे मिलता-जुलता हाल जल निगम में भी है। एक तरफ तो जल निगम गंगाजल परियोजना चला रहा है। वहीं दूसरी तरफ शहर में ट्यूबवेल लगाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। जबकि ट्यूबवेलों पर खर्च होने वाली लाखों की धनराशि को गंगाजल परियोजना को आगे बढ़ाने पर खर्च किया जा सकता है।
निगम के जल संसाधन
ट्यूबवेल - 157
10 एचपी सबमर्सिबल - 575
वन एचपी सबमर्सिबल - 3000
हैंडपंप - 10000
220 फीट नीचे पहुंच गया भूगर्भ जल
- महानगर ही नहीं, बल्कि पूरे जनपद में भूगर्भ जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। यह 220 फीट तक पहुंच गया है। दस साल पहले की बात करें तो 80 से 100 फीट तक पानी था। मेरठ जनपद के मेरठ, रोहटा, खरखौदा, जानी, माछरा, परीक्षितगढ़ ब्लॉक डार्क जॉन में शामिल हैं, जो संकेत है कि आने वाले समय में जनता पानी को तरस जाएगी। 200 फीट से नीचे जलस्तर जाते ही वह क्षेत्र डार्क जोन में पहुंच जाता है।
पंप संख्या प्रत्येक की कीमत
10 एचपी एक 2.12 लाख
वन एचपी एक 68,490 रुपये
50 हॉसपावर ट्यूबवेल 45 लाख रुपये
- जलकल विभाग की स्थिति चिंताजनक है। जल निगम भी पीछे नहीं है। कुछ अधिकारियों की काम की मंशा नहीं है, जबकि यह बात सही है कि अगर गंगाजल परियोजना से शहर की अन्य पाइप लाइनों को जोड़ दिया जाए, तो काफी भूगर्भ जल दोहन होने से बच जाएगा। हम इसको गंभीरता से दिखवाएंगे।
- अमित सिंह, अपर नगरायुक्त
- नगर निगम में पारदर्शिता नहीं दिखती। अधिकारी अपने फायदे के चक्कर में कार्य कर रहे हैं। कुछ पूछा जाता है, तो जवाब नहीं देते हैं। शहर के काफी इलाकों से पर्याप्त जलापूर्ति न होने की शिकायतें आ रही हैं। 23 मई के बाद एक-एक बिंदु पर अधिकारियों से बात की जाएगी।
- सुनीता वर्मा, महापौर