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Meerut News: उलधन में बंदरों के हमले से बचने के प्रयास में छत से गिरा ग्रामीण, घायल
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खरखौदा के गांव उलधन में बंदरो के हमले से बचने के प्रयास में छत से गिरकर घायल हुआ ग्रामीण (परिजन
- खरखौदा और कैली में भी बंदरों के झुंड से दहशत, राहगीरों से सामान छीनकर कर रहे हमला
संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। क्षेत्र के गांव उलधन में बंदरों के बढ़ते आतंक ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। बंदरों के हमले के डर से ग्रामीण खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। बुधवार को गांव निवासी रफी अपने मकान की छत पर बैठे थे। बंदरों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। बंदरों से बचने के प्रयास में रफी छत से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में उनका हाथ टूट गया। परिजनों ने उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बंदर आए दिन घरों की छतों और गलियों में घूमते रहते हैं और लोगों पर हमला कर देते हैं। कई बार ग्रामीणों ने बंदरों के आतंक की शिकायत ग्राम प्रधान से की, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं कराया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से अभियान चलाकर बंदरों को पकड़वाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
खरखौदा में राहगीरों से सामान छीन रहे बंदर
कस्बा खरखौदा में भी बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां बंदरों के झुंड घरों की छतों, बाजार और सड़कों पर आसानी से देखे जा सकते हैं। ग्रामीणों के अनुसार बंदर कई बार राहगीरों के हाथ से खाद्य सामग्री और अन्य सामान जबरन छीनकर भाग जाते हैं। विरोध करने या सामान वापस लेने का प्रयास करने पर बंदर हमला कर देते हैं। इससे बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों में भय बना हुआ है।
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कैली में भी सैकड़ों बंदरों के झुंड से दहशत
गांव कैली में भी बंदरों की समस्या गंभीर बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सैकड़ों की संख्या में बंदरों के झुंड घूमते रहते हैं। ये बंदर घरों की छतों पर पहुंचकर सामान को नुकसान पहुंचाने के साथ ही लोगों पर हमला भी कर देते हैं। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर ग्रामीणों की चिंता अधिक है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से बंदरों को पकड़वाकर आबादी से दूर छोड़ने तथा समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। क्षेत्र के गांव उलधन में बंदरों के बढ़ते आतंक ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। बंदरों के हमले के डर से ग्रामीण खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। बुधवार को गांव निवासी रफी अपने मकान की छत पर बैठे थे। बंदरों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। बंदरों से बचने के प्रयास में रफी छत से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में उनका हाथ टूट गया। परिजनों ने उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बंदर आए दिन घरों की छतों और गलियों में घूमते रहते हैं और लोगों पर हमला कर देते हैं। कई बार ग्रामीणों ने बंदरों के आतंक की शिकायत ग्राम प्रधान से की, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं कराया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से अभियान चलाकर बंदरों को पकड़वाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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खरखौदा में राहगीरों से सामान छीन रहे बंदर
कस्बा खरखौदा में भी बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां बंदरों के झुंड घरों की छतों, बाजार और सड़कों पर आसानी से देखे जा सकते हैं। ग्रामीणों के अनुसार बंदर कई बार राहगीरों के हाथ से खाद्य सामग्री और अन्य सामान जबरन छीनकर भाग जाते हैं। विरोध करने या सामान वापस लेने का प्रयास करने पर बंदर हमला कर देते हैं। इससे बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों में भय बना हुआ है।
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कैली में भी सैकड़ों बंदरों के झुंड से दहशत
गांव कैली में भी बंदरों की समस्या गंभीर बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सैकड़ों की संख्या में बंदरों के झुंड घूमते रहते हैं। ये बंदर घरों की छतों पर पहुंचकर सामान को नुकसान पहुंचाने के साथ ही लोगों पर हमला भी कर देते हैं। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर ग्रामीणों की चिंता अधिक है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से बंदरों को पकड़वाकर आबादी से दूर छोड़ने तथा समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।