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गोशाला में गोवंशों का इलाज कर रहे कृषि विश्वविद्यालय के वेटनरी डॉक्टर
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मेरठ। कान्हा उपवन गोशाला में बीमार गोवंशों का इलाज करने मोदीपुरम स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के वेटनरी डॉक्टरों की टीम मंगलवार को पहुंच गई। यहां अलग-अलग बाड़े में बंधे एक दर्जन गोवंशों का ब्लड सेंपल लिया। गोवंशों को मल्टी विटामिन और कैल्शियम की दवाई दी गई। गोशाला में बीमार गोवंशों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं, कमिश्नर ह्षिकेश भास्कर यशोद ने भी गोशाला का निरीक्षण कर निगम को निर्देश दिए कि गोवंशों के रखरखाव में लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे।
गोशाला में गोवंशों के बीमार होनेे का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है। मंगलवार सुबह 9:00 बजे गोशाला का निरीक्षण करने कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद पहुंच गए। जहां पर गोवंश के रखरखाव में कई कमियां पाई। कमिश्नर ने नाराजगी जताते हुए सभी जरूरी व्यवस्थाओं को जल्द सुचारू करने के निर्देश दिए। कमिश्नर ने कहा कि गोशाला में गोवंशों की देखरेख करने एक्सपर्ट लोगों को ही लगाया जाए। फिलहाल गोशाला वरिष्ठ प्रभारी बनाए अपर नगर आयुक्त, गोशाला प्रभारी कुलदीप सिंह और बाबू हरबीर सिंह से जानकारी ली। बीमार या चोटिल गोवंशों को गोशाला में न लाएं, उनका ट्रामा सेंटर या फिर पशु चिकित्सालय में भेजा जाए। करीब सवा घंटा कमिश्नर ने निरीक्षण किया और गोशाला में सुधार करने के निर्देश देकर चले गए।
उसके बाद गोशाला पहुंचे कृषि विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा विभाग के एचओडी डॉ. अमित वर्मा के नेतृत्व में पांच टीम ने जांच के लिए अलग अलग बाड़ों में बंधे गोवंशों के ब्लड सेंपल लिए। डॉ. अमित वर्मा ने बताया कि 12 गोवंशों के लिए ब्लड सेंपल लेकर बीमारी का कारण पता लगाया जा रहा है। उमस भरी गर्मी के कारण गोवंशों का डीहाईड्रेशन होती है। शरीर में पानी और खून की कमी होती है, ऐसे में गोवंश ठीक से चारा भी नही खा पाते हैं। पशु चिकित्सक डॉ. प्रियंका शर्मा व पशुमित्रों ने भी बीमार गोंवशों को दवाएं दी हैं। गोवंशों को कैल्शियम, मल्टी विटामिन, फासफोरस, निमोसिलाइड, एविल और पेरासिटामोल सहित अन्य दवाई देने का काम भी लगातार चल रहा है।
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काम के लिए नंही मिल रहे भरोसेमंद कर्मचारी
गोशाला में गोवंशों की देखरेख के लिए भरोसेमंद कर्मचारी नहीं मिल रहें हैं। काम करने की इच्छा जताने वाले कर्मचारी रोज गोशाला पहुंचे रहे है, लेकिन काम को देखकर वहां रुक नहीं पा रहे हैं। मंगलवार को भी कई कर्मचारी जरूरी दस्तावेज लेकर गोशाला पहुंचे थे और अधिकारियों से बात की। गोशाला प्रभारी कुलदीप सिंह ने बताया कि गोशाला में 80 कर्मचारियों की जरूरत है। कर्मचारियों की पूर्ति के लिए प्रयास किया जा रहा है। जानकारी पर मंगलवार को कंकरखेड़ा निवासी समाजसेवी शैलेंद्र वाल्मिकी 11 कर्मचारियों को लेकर गोशाला पहुंचे और अधिकारियों से बात कर कर्मचारियों को काम पर लगाया गया।
कमिश्नर के सुझाव
1. लगभग 6000 स्क्वायर फीट से अधिक के शेड में कुल 250 से अधिक गोवंश रखें।
2. लगभग 12000 स्क्वायर फीट से अधिक क्षेत्र को बरसात को देखते ईंट का खड़ंजा लगाया जाए।
3. सभी शेड को नवीन प्रकाश व्यवस्था के साथ-साथ नए एग्जॉस्ट पंखे भी लगाए गए हैं।
4. 10,000 स्क्वायर फिट के एक अन्य स्थायी शेड का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
5. गोशाला की 1.5 हेक्टेयर भूमि हैं, जहां पर चाहरदीवारी कराई जाए।
6. गोशाला में यांत्रिकी विधि से गोबर के निष्कासन का कार्य प्रारंभ कराया गया है।
7. गोवंश के प्राथमिक उपचार की व्यवस्था पशु चिकित्सालय में होना सुनिश्चित कराई जाए।
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गोशाला में गोवंशों के बीमार होनेे का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है। मंगलवार सुबह 9:00 बजे गोशाला का निरीक्षण करने कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद पहुंच गए। जहां पर गोवंश के रखरखाव में कई कमियां पाई। कमिश्नर ने नाराजगी जताते हुए सभी जरूरी व्यवस्थाओं को जल्द सुचारू करने के निर्देश दिए। कमिश्नर ने कहा कि गोशाला में गोवंशों की देखरेख करने एक्सपर्ट लोगों को ही लगाया जाए। फिलहाल गोशाला वरिष्ठ प्रभारी बनाए अपर नगर आयुक्त, गोशाला प्रभारी कुलदीप सिंह और बाबू हरबीर सिंह से जानकारी ली। बीमार या चोटिल गोवंशों को गोशाला में न लाएं, उनका ट्रामा सेंटर या फिर पशु चिकित्सालय में भेजा जाए। करीब सवा घंटा कमिश्नर ने निरीक्षण किया और गोशाला में सुधार करने के निर्देश देकर चले गए।
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उसके बाद गोशाला पहुंचे कृषि विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा विभाग के एचओडी डॉ. अमित वर्मा के नेतृत्व में पांच टीम ने जांच के लिए अलग अलग बाड़ों में बंधे गोवंशों के ब्लड सेंपल लिए। डॉ. अमित वर्मा ने बताया कि 12 गोवंशों के लिए ब्लड सेंपल लेकर बीमारी का कारण पता लगाया जा रहा है। उमस भरी गर्मी के कारण गोवंशों का डीहाईड्रेशन होती है। शरीर में पानी और खून की कमी होती है, ऐसे में गोवंश ठीक से चारा भी नही खा पाते हैं। पशु चिकित्सक डॉ. प्रियंका शर्मा व पशुमित्रों ने भी बीमार गोंवशों को दवाएं दी हैं। गोवंशों को कैल्शियम, मल्टी विटामिन, फासफोरस, निमोसिलाइड, एविल और पेरासिटामोल सहित अन्य दवाई देने का काम भी लगातार चल रहा है।
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काम के लिए नंही मिल रहे भरोसेमंद कर्मचारी
गोशाला में गोवंशों की देखरेख के लिए भरोसेमंद कर्मचारी नहीं मिल रहें हैं। काम करने की इच्छा जताने वाले कर्मचारी रोज गोशाला पहुंचे रहे है, लेकिन काम को देखकर वहां रुक नहीं पा रहे हैं। मंगलवार को भी कई कर्मचारी जरूरी दस्तावेज लेकर गोशाला पहुंचे थे और अधिकारियों से बात की। गोशाला प्रभारी कुलदीप सिंह ने बताया कि गोशाला में 80 कर्मचारियों की जरूरत है। कर्मचारियों की पूर्ति के लिए प्रयास किया जा रहा है। जानकारी पर मंगलवार को कंकरखेड़ा निवासी समाजसेवी शैलेंद्र वाल्मिकी 11 कर्मचारियों को लेकर गोशाला पहुंचे और अधिकारियों से बात कर कर्मचारियों को काम पर लगाया गया।
कमिश्नर के सुझाव
1. लगभग 6000 स्क्वायर फीट से अधिक के शेड में कुल 250 से अधिक गोवंश रखें।
2. लगभग 12000 स्क्वायर फीट से अधिक क्षेत्र को बरसात को देखते ईंट का खड़ंजा लगाया जाए।
3. सभी शेड को नवीन प्रकाश व्यवस्था के साथ-साथ नए एग्जॉस्ट पंखे भी लगाए गए हैं।
4. 10,000 स्क्वायर फिट के एक अन्य स्थायी शेड का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
5. गोशाला की 1.5 हेक्टेयर भूमि हैं, जहां पर चाहरदीवारी कराई जाए।
6. गोशाला में यांत्रिकी विधि से गोबर के निष्कासन का कार्य प्रारंभ कराया गया है।
7. गोवंश के प्राथमिक उपचार की व्यवस्था पशु चिकित्सालय में होना सुनिश्चित कराई जाए।