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बिजनौर में आदमखोर हुए गुलदार
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ग्रामीणों का हंगामा, वन विभाग कर्मियों को बंधक बनाया
बिजनौर। गुलदार के किसान पर हमला कर उसे मार डालने की सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया। भाकियू के ब्लॉक अध्यक्ष विजय सिंह व धर्मेंद्र राठी और किसानों ने जमकर हंगामा किया। किसानों का कहना है कि गुलदार आदमखोर होते जा रहे हैं और इनसे किसानों की सुरक्षा के लिए वन विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। करीब चार बजे शफीक के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।
वन विभाग के एसडीओ इम्तियाज सिद्दीकी व रेंजर शरद गुप्ता को गांव बिचपड़ी में लोगों ने अपने बीच बैठा लिया था। कुछ देर बाद पहुंचे एसडीएम बृजेश कुमार व सीओ सिटी अरुण कुमार ने गांव वालों को समझाया। उन्होंने कहा कि गुलदार की खोज के लिए ड्रोन कैमरा लगाया जाएगा। अफसरों के आश्वासन पर गांव वालों ने वन विभाग के दोनों कर्मचारियों को छोड़ा। थोड़ी देर बार डीएम रमाकांत पांडेय व डीएफओ एम सेम्मारन भी गांव पहुंचे। डीएम ने कहा कि गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाएगा। इसके अलावा मृतक के परिजनों को वन विभाग द्वारा पांच लाख रुपये का मुआवजा भी दिया जाएगा। गुलदार की तलाश के लिए डीएफओ ने तीन टीमें गठित की हैं।डीएफओ डा.एम सेम्मारन का कहना है कि गांवों के आसपास दिखने वाले गुलदारों को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाएगा। मृतक के कागज मुआवजे के लिए शासन को भेजे जाएंगे।
नजीबाबाद में है आदमखोर गुलदार का आतंक
गुलदार का आतंक नजीबाबाद क्षेत्र में अधिक देखने को मिल रहा है। अब तक गुलदार के हमले में पांचों मौत नजीबाबाद क्षेत्र में ही देखने को मिली हैं। वन विभाग बाकी गांवों में गुलदार दिखने की घटनाओं को भी अब गंभीरता से ले रहा है।
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जिले में घूम रहे सौ गुलदार, आदमखोर कौन सा, ट्रैप कैमरों से होगी पहचान
बिजनौर। वन विभाग ने गांव असगरपुर में पिंजरा लगाया तो गुलदार ने अगले दिन मोहंडिया में शिकार कर दिया। जिले में गुलदार के बढ़ते हमलों को देखकर वन विभाग सतर्क हो गया है। गुलदार को नरभक्षी घोषित करने के लिए अब उसकी पहचान कराई जाएगी। इसके लिए ट्रैप कैमरों की मदद ली जाएगी।
नरभक्षी हो रहे गुलदार एक माह में पांच जान ले चुके हैं। गुलदार ने शमला देवी के बाद प्रेमपुरी, सराय आलम, असगरपुर व अब मोहंडिया में अपना शिकार बनाया। गुलदार ने दो जगह शिकार को खाया भी है। गुलदार के बढ़ रहे हमलों से किसानों में भय और वन विभाग के खिलाफ आक्रोश भी है। वन विभाग की गणना के अनुसार जिले में करीब 100 गुलदार हैं। ज्यादातर गुलदार खेतों में ही हैं। किसी गुलदार को नरभक्षी घोषित करने के लिए अनेक औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। सबसे पहले उसकी शनाख्त करनी पड़ती है। ऐसे में यह पता लगाना ही सबसे बड़ी चुनौती है कि एक ही गुलदार घटनाओं को अंजाम दे रहा है या अलग अलग हैं। गुलदार को नरभक्षी घोषित करने के लिए उसकी पुख्ता शनाख्त कराना ही अपने आप में सबसे बड़ी चुनौती है। हालांकि वन विभाग अब गुलदार की पहचान के लिए जगह जगह ट्रैप कैमरे लगाने की बात कह रहा है। डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक गुलदार की पहचान के लिए जगह जगह ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे। ऐसा लगता है कि एक ही गुलदार इंसानों की जान ले रहा है। ट्रैप कैमरे में आने वाली फोटो को विशेषज्ञों को दिखाया जाएगा। अगर इंसानों की मौत में एक ही गुलदार जिम्मेदार मिलता है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एक ही दिशा में चल रहा है गुलदार
अब तक 14 नरभक्षी गुलदारों को मार चुके शिकारी बलजीत सिंह का कहना है कि गुलदार एक ही दिशा में चल रहा है। गुलदार हर दिन अपने इलाके में करीब दस किलोमीटर तक घूमता है। जिस ओर इसका मुंह हो जाता है यह उसी ओर चल देता है। उन्हें लगता है कि चमरूफेरू से शुरू करके मोहंडिया तक शिकार करने वाला गुलदार एक ही है। अब गुलदार या तो मोहंडिया से आगे बढ़ेगा या फिर पुराने रास्ते से वापस भी लौट सकता है। राजगढ़ वन रेंज के डिप्टी रेेंजर राममुसाफिर यादव, वन रेंजर बिजेंद्र मलिक का कहना है कि गुलदार को पकड़ने के लिए असगरपुर में पिंजरा लगाया है। लेकिन गुलदार के एक स्थान पर न ठहरने से समस्या बनी हुई है। वन कर्मी जंगल क्षेत्र के आसपास भागूवाला, श्यामीवाला, सराय आलम, कोट सराय, शहजादपुर, राजगढ़ रामपुर चाठा, पीतमगढ़, नांगलसोती में गश्त कर रहे हैं। जंगल क्षेत्र में खदेड़ने के लिए आतिशबाजी कर रहे हैं। लोगों को टिप्स के साथ समूह बनाकर जंगल जाने की सलाह भी दी जा रही है।
पंजे का निशान रखें संरक्षित
शिकारी बलजीत सिंह का कहना है कि कहीं गुलदार किसी पर हमला करके घायल या मौत के घाट उतारता है तो गांव वाले उसके पंजे को निशान से छेड़खानी न करें। उसका पंजा वन विभाग के अफसरों को दिखाएं। उसके खुद भी फोटो खींच लें।
आदमखोर गुलदार के हमले की घटनाएं
-27 नवंबर: गांव नवादा निवासी महिला शिमला देवी को मार डाला।
-10 दिसंबर:सराय आलम निवासी चमन (22) को मार डाला।
-15 दिसंबर: अकबरपुर चौगांवा में रोहांश (3) को गुलदार उठा ले गया, दीवार फांदते समय गुलदार के मुंह से रोहांश छूट गया।
-16 दिसंबर को ही गुलदार फिर गांव में घुसा और चेतन (6) को उठा ले गया। गांव से 300 मीटर की दूरी पर उसका शव मिला था।
-16 दिसंबर को गुलदार ने गांव प्रेमपुरी में इशिका (3) पुत्री हरविंदर को घायल कर दिया।
-25 दिसंबर असगरपुर में युवक शानू को गुलदार ने हमला कर मार डाला
-26 दिसंबर मोहंडिया (मंडावर) शफीक को हमला कर मार डाला
गन्ने के खेत बने ठिकाना, इनसान आसान शिकार
बिजनौर। घटते जंगल, शिकार और प्रजनन के समय गुलदार हमलावर हो रहे हैं। मादा गुलदार का इस समय प्रसवकाल शुरू होने वाला है। गुलदार बहुत ही शर्मिला जीव है। वह जंगलों में ही रहना पसंद करता है। गन्ने के खेतों में गुलदार के बच्चे किसी अन्य शिकारी जीव की पहुंच से दूर होते हैं और खेतों में नीलगाय, चीतल, गीदड़, सुअर आदि मिल जाते हैं। गन्ने के खेत में गरमाहट भी रहती है। खेतों के पास गांव भी होते हैं। वहां गुलदार पशुशाला में बंधे पशुओं व कुत्तों का शिकार भी करते हैं। जनवरी से मादा गुलदार का प्रसवकाल का समय शुरू हो जाता है। ऐसे समय में विशेषकर मादा गुलदार हिंसक हो जाती हैं। खेत में आने वालों को अपने ठिकाने व बच्चों के पास आने से रोकने के लिए वह हमला करती हैं। बूढ़े, कमजोर, किशोर व महिला किसान गुलदार के लिए आसान शिकार होते हैं।
बेखौफ घूमने वाला गुलदार है खतरनाक
गांव जालपुर निवासी बलजीत सिंह के अनुसार गुलदार बहुत शर्मिला जीव होता है। अगर कोई गुलदार खुलेआम दिखता है तो इसका मतलब है कि वह इंसान पर हमला कर सकता है।
असगरपुर गांव में भी गुलदार ने मार डाला था युवक
किरतपुर(बिजनौर)। गांव असगरपुर में बुधवार को हरि सिंह के पुत्र अभय उर्फ शानू (18 वर्षीय) और उसका भाई आगम सिंह (16 वर्षीय) खेत से पत्ती लेने गए थे। गन्ने के खेत में छिपे गुलदार ने उनपर हमला बोल दिया। शानू की गर्दन पकड़ कर खींचता हुआ गुलदार गन्ने के खेत से बाहर निकल गया। आगम ने शोर मचाया तो शानू को छोड़कर गुलदार भाग गया था। शानू को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र किरतपुर लाया गया, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
खेतों में झुंड में जाए किसान, ये बरते सावधानी
-खेतों में कम से कम 20 व्यक्तियों के समूह में हांका लगाएं।
-खेतों में कम से कम पांच व्यक्तियों के समूह में जाएं।
-छोटे बच्चों को स्कूल, खेल के मैदान, बाजार आदि में बड़ों की निगरानी में भेजें।
-मोबाइल/रेडियो के जरिए लगातार आवाज करें।
- गुलदार सामान्यत: बैठे हुए लोगों पर हमला करता है, खेतों में खड़े होकर काम करें।
-गुलदार के पूर्वाभास के लिए खेतों में कुत्तों को साथ ले जाएं।
-खेतों में काम करते समय हेलमेट व नेकपैड पहनें।
-रात में खेतों की सुरक्षा के लिए मचान पर ही रहें।
-खेतों में गुलदार दिखने पर पास की वन चौकी पर संपर्क करें।
किसान उठाएंगे कड़ा कदम
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि गुलदार के बढ़ते हमलों पर डीएम से वार्ता की गई है। वन विभाग की टीम हमलावर गुलदारों को पकड़ने में नाकाम साबित हो रही है। अगर इंसानों पर हमला करने वाले गुलदारों को न पकड़ा गया तो किसान आंदोलनात्मक कदम उठाएंगे।
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बिजनौर। गुलदार के किसान पर हमला कर उसे मार डालने की सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया। भाकियू के ब्लॉक अध्यक्ष विजय सिंह व धर्मेंद्र राठी और किसानों ने जमकर हंगामा किया। किसानों का कहना है कि गुलदार आदमखोर होते जा रहे हैं और इनसे किसानों की सुरक्षा के लिए वन विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। करीब चार बजे शफीक के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।
वन विभाग के एसडीओ इम्तियाज सिद्दीकी व रेंजर शरद गुप्ता को गांव बिचपड़ी में लोगों ने अपने बीच बैठा लिया था। कुछ देर बाद पहुंचे एसडीएम बृजेश कुमार व सीओ सिटी अरुण कुमार ने गांव वालों को समझाया। उन्होंने कहा कि गुलदार की खोज के लिए ड्रोन कैमरा लगाया जाएगा। अफसरों के आश्वासन पर गांव वालों ने वन विभाग के दोनों कर्मचारियों को छोड़ा। थोड़ी देर बार डीएम रमाकांत पांडेय व डीएफओ एम सेम्मारन भी गांव पहुंचे। डीएम ने कहा कि गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाएगा। इसके अलावा मृतक के परिजनों को वन विभाग द्वारा पांच लाख रुपये का मुआवजा भी दिया जाएगा। गुलदार की तलाश के लिए डीएफओ ने तीन टीमें गठित की हैं।डीएफओ डा.एम सेम्मारन का कहना है कि गांवों के आसपास दिखने वाले गुलदारों को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाएगा। मृतक के कागज मुआवजे के लिए शासन को भेजे जाएंगे।
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नजीबाबाद में है आदमखोर गुलदार का आतंक
गुलदार का आतंक नजीबाबाद क्षेत्र में अधिक देखने को मिल रहा है। अब तक गुलदार के हमले में पांचों मौत नजीबाबाद क्षेत्र में ही देखने को मिली हैं। वन विभाग बाकी गांवों में गुलदार दिखने की घटनाओं को भी अब गंभीरता से ले रहा है।
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जिले में घूम रहे सौ गुलदार, आदमखोर कौन सा, ट्रैप कैमरों से होगी पहचान
बिजनौर। वन विभाग ने गांव असगरपुर में पिंजरा लगाया तो गुलदार ने अगले दिन मोहंडिया में शिकार कर दिया। जिले में गुलदार के बढ़ते हमलों को देखकर वन विभाग सतर्क हो गया है। गुलदार को नरभक्षी घोषित करने के लिए अब उसकी पहचान कराई जाएगी। इसके लिए ट्रैप कैमरों की मदद ली जाएगी।
नरभक्षी हो रहे गुलदार एक माह में पांच जान ले चुके हैं। गुलदार ने शमला देवी के बाद प्रेमपुरी, सराय आलम, असगरपुर व अब मोहंडिया में अपना शिकार बनाया। गुलदार ने दो जगह शिकार को खाया भी है। गुलदार के बढ़ रहे हमलों से किसानों में भय और वन विभाग के खिलाफ आक्रोश भी है। वन विभाग की गणना के अनुसार जिले में करीब 100 गुलदार हैं। ज्यादातर गुलदार खेतों में ही हैं। किसी गुलदार को नरभक्षी घोषित करने के लिए अनेक औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। सबसे पहले उसकी शनाख्त करनी पड़ती है। ऐसे में यह पता लगाना ही सबसे बड़ी चुनौती है कि एक ही गुलदार घटनाओं को अंजाम दे रहा है या अलग अलग हैं। गुलदार को नरभक्षी घोषित करने के लिए उसकी पुख्ता शनाख्त कराना ही अपने आप में सबसे बड़ी चुनौती है। हालांकि वन विभाग अब गुलदार की पहचान के लिए जगह जगह ट्रैप कैमरे लगाने की बात कह रहा है। डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक गुलदार की पहचान के लिए जगह जगह ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे। ऐसा लगता है कि एक ही गुलदार इंसानों की जान ले रहा है। ट्रैप कैमरे में आने वाली फोटो को विशेषज्ञों को दिखाया जाएगा। अगर इंसानों की मौत में एक ही गुलदार जिम्मेदार मिलता है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एक ही दिशा में चल रहा है गुलदार
अब तक 14 नरभक्षी गुलदारों को मार चुके शिकारी बलजीत सिंह का कहना है कि गुलदार एक ही दिशा में चल रहा है। गुलदार हर दिन अपने इलाके में करीब दस किलोमीटर तक घूमता है। जिस ओर इसका मुंह हो जाता है यह उसी ओर चल देता है। उन्हें लगता है कि चमरूफेरू से शुरू करके मोहंडिया तक शिकार करने वाला गुलदार एक ही है। अब गुलदार या तो मोहंडिया से आगे बढ़ेगा या फिर पुराने रास्ते से वापस भी लौट सकता है। राजगढ़ वन रेंज के डिप्टी रेेंजर राममुसाफिर यादव, वन रेंजर बिजेंद्र मलिक का कहना है कि गुलदार को पकड़ने के लिए असगरपुर में पिंजरा लगाया है। लेकिन गुलदार के एक स्थान पर न ठहरने से समस्या बनी हुई है। वन कर्मी जंगल क्षेत्र के आसपास भागूवाला, श्यामीवाला, सराय आलम, कोट सराय, शहजादपुर, राजगढ़ रामपुर चाठा, पीतमगढ़, नांगलसोती में गश्त कर रहे हैं। जंगल क्षेत्र में खदेड़ने के लिए आतिशबाजी कर रहे हैं। लोगों को टिप्स के साथ समूह बनाकर जंगल जाने की सलाह भी दी जा रही है।
पंजे का निशान रखें संरक्षित
शिकारी बलजीत सिंह का कहना है कि कहीं गुलदार किसी पर हमला करके घायल या मौत के घाट उतारता है तो गांव वाले उसके पंजे को निशान से छेड़खानी न करें। उसका पंजा वन विभाग के अफसरों को दिखाएं। उसके खुद भी फोटो खींच लें।
आदमखोर गुलदार के हमले की घटनाएं
-27 नवंबर: गांव नवादा निवासी महिला शिमला देवी को मार डाला।
-10 दिसंबर:सराय आलम निवासी चमन (22) को मार डाला।
-15 दिसंबर: अकबरपुर चौगांवा में रोहांश (3) को गुलदार उठा ले गया, दीवार फांदते समय गुलदार के मुंह से रोहांश छूट गया।
-16 दिसंबर को ही गुलदार फिर गांव में घुसा और चेतन (6) को उठा ले गया। गांव से 300 मीटर की दूरी पर उसका शव मिला था।
-16 दिसंबर को गुलदार ने गांव प्रेमपुरी में इशिका (3) पुत्री हरविंदर को घायल कर दिया।
-25 दिसंबर असगरपुर में युवक शानू को गुलदार ने हमला कर मार डाला
-26 दिसंबर मोहंडिया (मंडावर) शफीक को हमला कर मार डाला
गन्ने के खेत बने ठिकाना, इनसान आसान शिकार
बिजनौर। घटते जंगल, शिकार और प्रजनन के समय गुलदार हमलावर हो रहे हैं। मादा गुलदार का इस समय प्रसवकाल शुरू होने वाला है। गुलदार बहुत ही शर्मिला जीव है। वह जंगलों में ही रहना पसंद करता है। गन्ने के खेतों में गुलदार के बच्चे किसी अन्य शिकारी जीव की पहुंच से दूर होते हैं और खेतों में नीलगाय, चीतल, गीदड़, सुअर आदि मिल जाते हैं। गन्ने के खेत में गरमाहट भी रहती है। खेतों के पास गांव भी होते हैं। वहां गुलदार पशुशाला में बंधे पशुओं व कुत्तों का शिकार भी करते हैं। जनवरी से मादा गुलदार का प्रसवकाल का समय शुरू हो जाता है। ऐसे समय में विशेषकर मादा गुलदार हिंसक हो जाती हैं। खेत में आने वालों को अपने ठिकाने व बच्चों के पास आने से रोकने के लिए वह हमला करती हैं। बूढ़े, कमजोर, किशोर व महिला किसान गुलदार के लिए आसान शिकार होते हैं।
बेखौफ घूमने वाला गुलदार है खतरनाक
गांव जालपुर निवासी बलजीत सिंह के अनुसार गुलदार बहुत शर्मिला जीव होता है। अगर कोई गुलदार खुलेआम दिखता है तो इसका मतलब है कि वह इंसान पर हमला कर सकता है।
असगरपुर गांव में भी गुलदार ने मार डाला था युवक
किरतपुर(बिजनौर)। गांव असगरपुर में बुधवार को हरि सिंह के पुत्र अभय उर्फ शानू (18 वर्षीय) और उसका भाई आगम सिंह (16 वर्षीय) खेत से पत्ती लेने गए थे। गन्ने के खेत में छिपे गुलदार ने उनपर हमला बोल दिया। शानू की गर्दन पकड़ कर खींचता हुआ गुलदार गन्ने के खेत से बाहर निकल गया। आगम ने शोर मचाया तो शानू को छोड़कर गुलदार भाग गया था। शानू को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र किरतपुर लाया गया, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
खेतों में झुंड में जाए किसान, ये बरते सावधानी
-खेतों में कम से कम 20 व्यक्तियों के समूह में हांका लगाएं।
-खेतों में कम से कम पांच व्यक्तियों के समूह में जाएं।
-छोटे बच्चों को स्कूल, खेल के मैदान, बाजार आदि में बड़ों की निगरानी में भेजें।
-मोबाइल/रेडियो के जरिए लगातार आवाज करें।
- गुलदार सामान्यत: बैठे हुए लोगों पर हमला करता है, खेतों में खड़े होकर काम करें।
-गुलदार के पूर्वाभास के लिए खेतों में कुत्तों को साथ ले जाएं।
-खेतों में काम करते समय हेलमेट व नेकपैड पहनें।
-रात में खेतों की सुरक्षा के लिए मचान पर ही रहें।
-खेतों में गुलदार दिखने पर पास की वन चौकी पर संपर्क करें।
किसान उठाएंगे कड़ा कदम
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि गुलदार के बढ़ते हमलों पर डीएम से वार्ता की गई है। वन विभाग की टीम हमलावर गुलदारों को पकड़ने में नाकाम साबित हो रही है। अगर इंसानों पर हमला करने वाले गुलदारों को न पकड़ा गया तो किसान आंदोलनात्मक कदम उठाएंगे।