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पंचायत चुनाव 2021: भाजपा खेल सकती है ये बड़ा दांव, 20 साल पहले पलट दिया था इतिहास

Sat, 13 Feb 2021 01:19 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 13 Feb 2021 01:19 PM IST
सार

  • मेरठ में भाजपा जिपं अध्यक्ष पद पर ब्राह्मण उम्मीदवार को मौका दे सकती है दांव
  • अध्यक्ष पद अनारक्षित रखने के पीछे भाजपा की सधी हुई चाल, पिछली बार भी था अध्यक्ष पद अनारक्षित

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UP Panchayat 2021: BJP may give chance to Brahmin candidate for Jila Panchayat president in Meerut
भाजपा

विस्तार

उत्तर प्रदेश में जिला पंचायतों के अध्यक्ष पद का आरक्षण जारी हो चुका है। शासन ने यूपी में 27 जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनारक्षित रखे हैं। बड़ी बात यह है कि आरक्षण को लेकर जो नियमावली जारी हुई थी, उसके उलट मेरठ का अध्यक्ष पद लगातार दूसरी बार अनारक्षित रखा गया है। इस पर सवाल भी उठ रहे हैं। वहीं भाजपा सूत्रों के अनुसार पार्टी इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर ब्राह्मण कार्ड खेलने की तैयारी में है।

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वर्ष 2015 में भी जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनारक्षित था। यह बात अलग है कि तब प्रदेश में सपा सरकार थी और सपा की तरफ से गुर्जर प्रत्याशी (ओबीसी) को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया गया था। 
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भाजपा ने भी गुर्जर बिरादरी से ही प्रत्याशी बनाया, जिसमें भाजपा की दो वोटों से हार हुई, लेकिन 2017 में ही भाजपा की प्रदेश में सरकार आते ही अविश्वास प्रस्ताव की मुहिम शुरू हो गई और जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। उपचुनाव में भाजपा के कुलविंदर सिंह की जीत हुई। 
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वहीं अब फिर से जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनारक्षित हुआ है, तो सभी चौंक रहे हैं, लेकिन भाजपा की इसके पीछे सधी हुई चाल है। वह अनारक्षित सीट पर सामान्य जाति के नेता को ही चुनाव लड़ाना चाहती है। चर्चा है कि वरिष्ठ भाजपा नेता विमल शर्मा की दावेदारी सबसे ज्यादा मजबूत है। विमल शर्मा का दावा इसलिए भी मजबूत माना जा रहा है, क्योंकि वह सरधना ब्लाक से लगातार दो बार ब्लाक प्रमुख रहने के साथ पंचायत राजनीति में सक्रिय हैं। हालांकि विमल की राह आसान नहीं है। कभी बसपा में रहे धर्मेंद्र भारद्वाज जो कि 2010 में जिला पंचायत सदस्य भी रह चुके हैं, वह इन दिनों भाजपा नेताओं के करीबी हैं। धनबल के इस चुनाव में एक गुट उनकी दावेदारी को लेकर भी मजबूत पैरवी कर सकता है। इसके अलावा गुर्जर और जाट नेताओं की दावेदारी प्रमुखता से रहेगी। इनमें पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह, कुलविंदर सिंह, डॉ. मीनाक्षी भराला, रोहताश पहलवान, सपना हुड्डा, रविंद्र चौधरी के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं।

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जिस जाति के ज्यादा सदस्य उसी का प्रत्याशी
पिछले दो चुनावों पर अगर नजर डालें तो 2010 में सबसे ज्यादा 10 जाट सदस्य थे, तो मनिंदरपाल सिंह प्रत्याशी बने। 2015 में गुर्जर सदस्यों की संख्या भी इतनी ही थी, तो गुर्जर प्रत्याशी मैदान में उतरे। इस बार भी यही समीकरण आ सकता है, लेकिन वर्ष 2000 में भाजपा ने ही इतिहास को पलट दिया था। मात्र एक वोट वैश्य बिरादरी की होने के बावजूद दयानंद गुप्ता को जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित कराया था। 

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गुटबाजी की चर्चा 
भाजपा में गुटबाजी चल रही है। सिवालखास विधानसभा में सक्रिय नेताओं के बीच गुटबाजी ज्यादा है। ऐसे में एक-दूसरे को मात देने के लिए एक गुट द्वारा पद को अनारक्षित कराने में पूरा जोर लगाया गया है। क्योंकि चर्चा ओबीसी या एससी महिला को लेकर थी। भाजपा के पास एससी महिला प्रत्याशी ढूंढना मुश्किल होता तो ओबीसी महिला सीट होने को लेकर ज्यादा संभावना जताई जा रही थी, लेकिन यहां अवरोही क्रम के बहाने एक गुट ने दूसरे को झटका दे दिया।

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