फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   UP News: This degree college may be closed due to MLA in Meerut

यूपी: विधायकों की मनमानी से डिग्री कॉलेज बंद होने के कगार पर, जानें- क्या है पूरा मामला

Tue, 11 Aug 2020 05:34 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Tue, 11 Aug 2020 05:34 PM IST
सार

  • प्रबंध समिति अध्यक्ष अर्चना वर्मा ने कुलपति को पत्र लिखकर बीए विषय खत्म करने को कहा।
  • हस्तिनापुर और सिवालखास विधायक पर आरोपियों को शरण देने का आरोप।
  • मुख्यमंत्री तक शिकायत किए जाने के बावजूद चुप्पी साधे बैठे हैं प्रशासनिक अफसर।
  • दो विषयों में नहीं है शिक्षक, विधायकों की सरपरस्ती में अपराधियों द्वारा फसल काटने का आरोप।

विज्ञापन
UP News: This degree college may be closed due to MLA in Meerut
इसी कॉलेज का है मामला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ जनपद के मवाना कस्बा स्थित कृषक डिग्री कॉलेज में बीए की कक्षाएं कभी भी समाप्त हो सकती हैं। क्योंकि वित्तविहीन इस महाविद्यालय की आय पर भाजपा के जनप्रतिनिधियों के संरक्षण में माफिया की नजर लग गई है। ऐसे में प्रबंध समिति की प्रबंधक अर्चना वर्मा ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिखकर आय के स्रोत समाप्त होने के कारण बीए की कक्षाओं का संचालन बंद करने का आवेदन किया है। 

विज्ञापन


मवाना के जिस कृषक पीजी कॉलेज में हजारों छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हैं उसका भविष्य संकट में आ गया है। कॉलेज की प्रबंध समिति की अध्यक्ष अर्चना वर्मा ने सीसीएसयू के कुलपति को पत्र लिखकर कहा है कि कॉलेज में राजनीति शास्त्र और संस्कृत में कई वर्षों से कोई प्रवक्ता नहीं है। कुल स्वीकृत 20 पदों में से सिर्फ छह प्रवक्ता कॉलेज में हैं। कहा गया है कि प्रबंध समिति कई वर्षों से कृषि फार्म की आय से उक्त विषयों में शिक्षकों को रखती है। लेकिन कृषि फार्म पर राजनीतिक संरक्षक के चलते 11 मई 2020 से तथाकथित प्रबंध समिति कृषक इंटर कॉलेज द्वारा अपराधियों के साथ मिलकर कब्जा करके चारा बो दिया गया। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की गई तो एसडीएम मवाना ने भी जांच में आरोप सही पाए। अब कृषक डिग्री कॉलेज मवाना का प्रसिद्ध डिग्री कॉलेज है। जिसमें हर साल क्षेत्र के सैकड़ों छात्र छात्राएं प्रवेश लेते हैं। लेकिन इस विवाद के चलते यदि डिग्री कॉलेज की कक्षाएं बंद होती हैं तो निश्चित रूप से बीए प्रथम वर्ष ही नहीं इसका प्रभाव उच्च कक्षाओं पर भी पड़ेगा और हजारों विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग जाएगा।
विज्ञापन


केंद्रीय मंत्री की मौजूदगी में बनी थी समिति
पूरे मामले में केंद्रीय मंत्री डॉ. सजीव बालियान ने दोनों पक्षों से विवाद खत्म करने के लिए मवाना के उत्सव मंडप में बात की। इस बैठक में हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक, सिवालखास विधायक जितेंद्र सतवई, कृषक इंटर कॉलेज के प्रबंधक अजय सिंह, इंद्रजीत, अजीत और परसोत कुमार एवं कृषक डिग्री कॉलेज मवाना एवं जाट वैदिक सोसायटी के पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में केवल कृषि फार्म के विवाद का निस्तारण होने तक पांच सदस्यीय समिति की देखरेख में कृषि कार्य कराने एवं आय को बैंक खाते में जमा करने की बात हुई। 
विज्ञापन
विज्ञापन


दूसरे पक्ष ने ठुकराया समझौता 
आरोप है कि दूसरे पक्ष ने अपराधियों के साथ मिलकर दबंगई से भूमि से चारा काटकर उसका पैसा भी बैंक में जमा नहीं कराया। कृषक कॉलेज प्रबंध समिति के प्रवक्ता के मुताबिक जब गणमान्य लोगों ने फैसले की बात कही तो परसोत कुमार ने कहा कि सिवालखास विधायक जितेंद्र कुमार सतवई उसके रिश्तेदार हैं। विधायक हमारे साथ हैं। कोई फैसला नहीं माना जाएगा। पूरे प्रकरण में प्रबंध समिति का कहना है कि अगर सात दिन में कृषि फार्म को लेकर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो महापंचायत बुलाई जाएगी। क्षेत्र के लोग फैसला लेंगे। शिक्षण संस्था को बर्बाद नहीं होने देंगे।

यह भी पढ़ें: यूपी में दिनदहाड़े खौफनाक वारदात, ये हो सकती है भाजपा नेता की हत्या के पीछे बड़ी वजह, तस्वीरें

संस्था की आय पर विधायकों का दखल क्यों?
अर्चना वर्मा की तरफ से लगाए आरोपों में हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक व सिवालखास विधायक जितेंद्र सतवई पर आरोपियों को संरक्षण देने की बात कही है। मवाना पुलिस पर भी इनके दबाव में काम करने का आरोप है। सवाल ये है कि आखिर शिक्षण संस्था की आय पर विधायकों का दखल क्यों है। आखिर क्यों इस तरह से दंबगई करने वालों को आशीर्वाद दिया जा रहा है।

अधिकारियों से शिकायत करें
विधायक दिनेश खटीक का कहना है कि यदि फैसला नहीं माना है तो अधिकारियों से शिकायत करें। निष्पक्ष कार्रवाई होगी। यदि कोई कहता है कि उनको सपोर्ट कर रहे हैं, यह आरोप गलत हैं हमारे पास आएं। बताए कौन अधिकारी ऐसा कह रहा है। हम उससे बात करेंगे। वे फैसला न मानने वालों के साथ नहीं हैं। एसडीएम को प्रार्थना पत्र दें। एसडीएम प्रशासनिक अधिकारी हैं। वह निष्पक्ष कार्रवाई करेंगे। इस मामले से अब मेरा कोई लेना देना नहीं है। मैं तटस्थ हूं।

फैसले से पीछे नहीं
कृषक पीजी कॉलेज के प्रबंधक अजय कुमार का कहना है कि वे फैसले से पीछे नहीं हटे हैं। जो सात एकड़ भूमि है उसकी मालिक फैसले में हुए निर्णय के अनुसार पांच सदस्यीय कमेटी है। जो भी करेगी वहीं कमेटी करेगी। कोई चारा न तो बोया गया और न ही काटा गया। एक खेत में पहले से बोया हुआ था। उसका हिसाब किताब भी कमेटी के पास ही है। उन्होंने तो इस भूमि से अपने आपको उस दिन हुए फैसले के बाद से ही अलग कर लिया था। क्योंकि कानून का जो भी निर्णय होगा उनको स्वीकार होगा। कॉलेज इस जमीन के पैसे से कब चल रहा था। ऑडिट में कब उन्होंने इस जमीन का पैसा दिखाया है। यह जमीन उनके नाम है ही नहीं। 

उधर, विधायक जितेंद्र सतवाई से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके किसी व्यक्ति ने उनको मीटिंग में होने और बाद में बात कराने की बात कही है। लेकिन बाद में विधायक का फोन बंद हो गया।

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें


https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed