यूपी: 1993 बैच के 30 से ज्यादा डॉक्टर व उनके परिवार के सदस्य करेंगे नेत्रदान
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इन सभी को इसके कार्ड मिल जाएंगे, जिससे ये जहां भी होंगे, वहीं नेत्रदान कर सकेंगे। इसकेअलावा यह बैच मेडिकल कॉलेज की दो हॉस्टल विंग को गोद लेंगे और उनका जीर्णोद्धार कराएगा। बाकी चिकित्सकों से भी जीर्णोद्धार कराने में मदद करने की मांग की।
चिकित्सकों का कहना था कि इससे यह संदेश भी जाता है कि रक्तदान और नेत्रदान के लिए डॉक्टर सिर्फ कहते नहीं, खुद करते भी हैं। इस बैच का मंगलवार को रजत जयंती समारोह था, जिसमें उन्होंने यह फैसला
छह घंटे का समय
चिकित्सकों के अनुसार किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के छह घंटे के भीतर आंख से कॉर्निया निकालकर सुरक्षित रखना जरूरी होता है। तभी वह किसी दूसरे व्यक्ति की आंखों के लिए कामयाब हो सकता है।
गौरतलब है कि भारत में अंधता की सबसे बड़ी वजह कॉर्निया जनित रोग हैं।
आंख का सबसे सामने वाला पारदर्शी कांच जैसा हिस्सा कॉर्निया कहलाता है। प्रकाश की किरणें कॉर्निया से होते हुए आंख में प्रवेश करती हैं और लैंस से होते हुए अंत में रेटिना (पर्दे) पर फोकस होता है। कॉर्निया की सतह पर आंसू एक महीन परत बनकर रहते हैं।