जोखिम में जान: विकास के दावे फेल, यहां हर रोज खतरे से खेलकर नदी पार करते हैं बच्चे और किसान
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आजादी के 72 साल बीत गए। गांव चमकाने के खूब दावे हुए। लखनऊ और दिल्ली में सरकारें बदलीं। लेकिन यहां ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। जरा-जरा सी बात पर जान का जोखिम है।
ऐसा ही यूपी के बागपत जिले का एक गांव रहतना भी है। यहां के लोग बल्लियों के सहारे कृष्णा नदी को पार कर खेतों तक जाते हैं। कई बार हादसे हो चुके हैं। लेकिन इसकी सुध कोई नहीं ले रहा है: -
यहां काठा गांव में हुआ हादसा लोग अभी भूले नहीं है। तब यमुना नदी में नाव समाने के कारण 19 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 31 लोगों को किसी तरह ग्रामीणों ने बचा लिया था। यमुना पर पुल तो क्या बनता, सिस्टम ने रहतना गांव में कृष्णा नदी पर एक पुलिया तक नहीं बनाई है।
रहतना गांव में बल्लियों को पार कर लोग खेतों में जाते हुए आज भी देखे जा सकते हैं। असल में गांव के आधे से अधिक किसानों का रकबा कृष्णा नदी के दूसरी तरफ है। खेतों पर जाने के लिए एक पुलिया तीन किमी दूर बरनावा और दूसरी करीब ढाई किमी दूर रंछाड़ में है।
हर किसी से लगाई गुहार पर नहीं निकला कोई हल
यह रास्ता कई लोगों के लिए काल बन चुका हैं। नदी में गिरकर कई घायल हुए और कई ऐसे हैं, जिन्होंने बिस्तर पकड़ लिया। स्कूलों के छात्र-छात्राएं इन्हीं बल्लियों से बिनौली तक जाते हैं। इस मामले में प्रधान भारतवीर कहते हैं कि हर प्लेटफार्म पर यह समस्या रखी गई है। लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। गांव के सामने एक छोटी पुलिया का निर्माण होना चाहिए, जिससे ग्रामीणों को सहूलियत हो सके।
समस्याएं यहां भी कम नहीं
कंडेरा, झूंडपुर, खपराना, अशरफाबाद थल सहित करीब 12 गांव ऐसे हैं, जहां हिंडन और कृष्णा नदी पर पुल नहीं है और ग्रामीण आए दिन मौत का सामना कर नदी पार करते हैं। हालांकि कंडेरा में पिछले दिनों पुल का शिलान्यास किया गया। यहां ग्रामीणों का कहना है कि जल्द से जल्द पुल का निर्माण होना चाहिए।
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