Election result 2022 : कांग्रेस का15 वर्षों का सबसे खराब प्रदर्शन, सिर्फ 19604 वोट मिले, सात प्रत्याशियों की जमानत जब्त, जिलाध्यक्ष भी हारे
इस बार चुनाव में एक भी प्रत्याशी छह हजार का आंकड़ा पार करने में भी विफल रहा। सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। इसमें कैंट से प्रत्याशी रहे जिलाध्यक्ष अवनीश काजला भी शामिल हैं
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विस्तार
कांग्रेस का जिले में 15 वर्षों में सबसे खराब प्रदर्शन सामने आया है। जिले की सात विधानसभा सीटों पर कुल 19604 वोट मिले हैं। एक भी प्रत्याशी छह हजार का आंकड़ा पार करने में भी विफल रहा। सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। इसमें कैंट से प्रत्याशी रहे जिलाध्यक्ष अवनीश काजला भी शामिल हैं। उन्हें भी मात्र 5096 वोट मिले। 15 वर्षों में वर्ष 2012 में कांग्रेस को सबसे अधिक एक लाख 15 हजार 482 वोट मिले थे। वर्ष 2012 में रालोद-कांग्रेस का गठबंधन होने के चलते कांग्रेस के सिंबल पर तीन प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था।
2007 से भी खराब प्रदर्शन
15 वर्षों में वर्ष 2007 में कांग्रेस के सात प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे थे। उस वर्ष भी कांग्रेस को 62 हजार 779 वोट मिले थे। इसके बाद वर्ष 2022 में भी सात प्रत्याशी मैदान में उतरे, लेकिन कुल 20 हजार वोट भी ले नहीं पाए। इसके अलावा वर्ष 2012 में रालोद-कांग्रेस और 2017 में सपा-कांग्रेस का गठबंधन रहा था। इन दोनों वर्षों में गठबंधन होने के चलते कांग्रेस के प्रत्याशियों को एक लाख से अधिक वोट मिल गए थे। वर्ष 2012 में कांग्रेस के सिंबल पर तीन और वर्ष 2017 में सिर्फ दो प्रत्याशियों ने ही चुनाव लड़ा था।
जनता का फैसला मंजूर
जनता का फैसला है। जनता बदलाव चाहती थी, लेकिन नहीं हुआ। हमें 70 वर्ष तक जनता ने आशीर्वाद दिया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने मजबूती के साथ चुनाव लड़ाया है। संगठन की कोई गलती नहीं है। वर्ष 2024 के लिए संगठन को मजबूती से तैयार करेंगे। - जाहिद अंसारी, महानगर अध्यक्ष, कांग्रेस
2007 में प्रदर्शन
किठौर अब्दुल वाहिद 1717
हस्तिनापुर गोपाल काली 27174
सरधना ताराचंद शास्त्री 4749
कैंट रमेश धींगरा 12632
शहर रोहिताश्व कुमार 4272
खरखौदा धूम सिंह 5823
सिवालखास श्रमजीत 6412
कुल वोट 62779
2012 में प्रदर्शन
शहर युसूफ कुरैशी 31881
कैंट रमेेश धींगरा 44621
हस्तिनापुर गोपाल काली 38980
कुल वोट 115482
वर्ष 2017 में प्रदर्शन
कैंट रमेश धींगरा 39650
दक्षिण आजाद सैफी 69117
कुल वोट 108767
2022 में प्रदर्शन
सिवालखास जगदीश प्रसाद 1577
किठौर बबीता गुर्जर 1589
हस्तिनापुर अर्चना गौतम 1519
शहर रंजन शर्मा 5333
कैंट अवनीश काजला 5096
दक्षिण नफीस 2346
सरधना सय्यद रेहानुद्दीन 2144
कुल वोट 19604
खराब प्रदर्शन नहीं, यह लहर थी
कांग्रेस का प्रदर्शन खराब नहीं है ये लहर थी। बसपा का भी ऐसा ही चुनाव रहा है। भाजपा और सपा के बीच सीधी टक्कर होने के चलते नुकसान हुआ है। 2024 का चुनाव बीजेपी और कांग्रेस के बीच रहेगा। मैं जब तक चुनाव लडूंगा तक तक जीत नहीं जाता। - रंजन शर्मा, शहर प्रत्याशी, कांग्रेस
पीछे छूटे जनता के मुद्दे
लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि है। जनता के मुद्दे पीछे छूट गए। बीजेपी और सपा में ध्रुवीकरण होने के चलते कांग्रेस को नुकसान हुआ है। संगठन ने कड़ी मेहनत की, लेकिन वोट पार्टी को नहीं मिल सका। जल्द समीक्षा बैठक होगी। - अवनीश काजला, जिलाध्यक्ष, प्रत्याशी कैंट, कांग्रेस
मेरठ दक्षिण विधानसभा में भाजपा के सोमेंद्र तोमर और सपा के आदिल चौधरी के बीच कड़ा मुकाबला रहा। सबसे अधिक मतदाता वाली विधानसभा का परिणाम भी सबसे अंतिम 38वें राउंड तक फाइनल रहा। आखिरी बाजी भाजपा के सोमेंद्र तोमर के हाथ लगी। यहां भाजपा को बसपा से अधिक मुस्लिम वोट मिले।
इस विधानसभा में जीत का अंतर मात्र सात हजार 942 रहा। इस विधानसभा में जाकिर हुसैन, करीम नगर, मंजूर नगर, मजीदनगर, तारापुरी, समर गार्डन जैसे क्षेत्रों में बीजेपी को वोट मिले। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में बीएसपी प्रत्याशी दिलशाद अली से अधिक बीजेपी प्रत्याशी सोमेंद्र तोमर को अधिक वोट मिले हैं।
जाकिर हुसैन, करीम नगर, मंजूर नगर, हूमांयुनगर के 28 बूथों पर बीजेपी को 201 और बीएसपी को 141 वोट मिले। इन बूथों पर सपा के आदिल को 15133 वोट मिले। रशीदनगर, मजीदनगर के बूथों पर भी बीजेपी को 133 वोट मिले। मजीदनगर के एक बूथ पर बसपा को 364 वोट मिले। इसके अलावा यहां भी सपा को 13 हजार 745 वोट मिले।
प्रहलादनगर में बीजेपी को बंपर वोट
यहां के छह बूथों पर बीजेपी को बंपर वोट मिले। बीजेपी को 2838 और सपा को 301 वोट मिले। इसके अलावा रिठानी के पांच बूथों पर बीजेपी को 1048, बीएसपी को 757 और सपा को 231 वोट मिले।
38वें राउंड तक चले कड़े मुकाबले में बीजेपी को मिली सफलता
दस वर्ष बाद सपा ने दी टक्कर
परिसीमन के बाद खरखौदा से अलग होकर मेरठ दक्षिण सीट वर्ष 2012 में बनी। 2012 और 2017 के चुनाव में बीजेपी को बसपा ने इस विधानसभा सीट पर टक्कर दी थी। इस बार सपा ने अंतिम राउंड तक भाजपा को टक्कर दी। 2012 के पहले चुनाव में बीजेपी के रविंद्र भड़ाना को 71 हजार 512 वोट मिली थीं। इस विधानसभा में दूसरे नंबर पर बसपा के राशिद अखलाक 61 हजार 762 और सपा के आदिल चौधरी को 49 हजार 69 वोट मिले थे। 2017 में बीजेपी के सोमेंद्र तोमर को एक लाख 13 हजार 86 वोट, बसपा के याकूब कुरैशी को 77 हजार 727 और कांग्रेस-सपा गठबंधन को 69 हजार 76 वोट मिले थे।
सिवाल व धौलड़ी में नल ने दिखाया दम, छुर-मुल्हैड़ा में खूब खिला कमल
जनपद की हॉट सीट में शामिल सिवालखास में भले ही सपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी गुलाम मोहम्मद ने बाजी जीत ली हो लेकिन भाजपा प्रत्याशी मनिंदरपाल सिंह ने आखिरी दम तक टक्कर देकर मुकाबले को रोचक बनाए रखा।
बूथवार मिली वोटों पर नजर डाले तो पहले राउंड में ठाकुर और त्यागी बाहुल्य गांव कालंद, कालंदी, पाली, पिठलोकर आदि की वोट खुली तो गुलाम मोहम्मद को जहां 3385 वोट मिले तो वहीं मनिंद्र पाल सिंह ने 3625 वोट लेकर बढ़त बना ली। दूसरे राउंड में छुर और मुल्हैडा खुले तो यहां दोनों प्रत्याशी लगभग बराबरी पर आ गए। तीसरे राउंड में बाकी बचे मुल्हैडा के बूथ के अलावा बपारसी, पांचली बुजर्ग और गोटका आदि में पहुंचते ही मनिंदरपाल सिंह ने करीब दो हजार की लीड ले ली।
चौथे-पांचवे राउंड के गांवाें में मनिंदर रहे आगे :
चौथे और पांचवें राउंड में शामिल गांव जसड़ सुल्तानपुर, डाहर, भूनी, सरुरपुर खुर्द, कक्केपुर और गणेशपुर तक मनिंदरपाल आगे रहे। यहां तक गुलाम मोहम्मद को 17930 और मनिंदरपाल को 18615 वोट मिले। लेकिन छठे राउंड के गांव बदरुद्दीन नानू, जाफराबाद दुर्वेशपुर, खिर्वा जलालपुर, समसपुर सुरानी और खिर्वा नौआबाद दबथुआ, भलसौना में आने के बाद गुलाम मोहम्मद एक हजार वोट से आगे पहुंच गए। लेकिन इसके बाद त्यागी बहुल ईकड़ी से मनिंदरपाल सिंह फिर आगे हो गए और आठवें राउंड तक करीब तीन हजार वोट की बढ़त लिए रहे।
लेकिन नवें और दसवें राउंड और ग्यारवहें राउंड में जैसे ही करनावल, हर्रा, खिवाई, मैनापूठी गांवों की वोट खुली तो गुलाम मोहम्मद 43792 वोट तक पहुंच गए और मनिंदरपाल 35924 वोट लेकर काफी पीछे रह गए।
डालमपुर, रासना और चिंदौड़ी में दोनों को मिले वोट
बारहवें राउंड के गांव किनौनी, कल्याणपुर, उकसिया, 13वें राउंड के गांव डालमपुर, चिंदौड़ी खास, भदौड़ा, मीरपुर, रासना, रामपुर, फतेहपुर ने दोनों प्रत्याशियों को वोट दिया, लेकिन गुलाम मोहम्मद की लीड कम नहीं हो सकी।
17वें और 18वें राउंड तक पहुंचते हुए मनिंद्र पाल ने लीड के अंतर को बेहद कम कर दिया। लेकिन 18वें व 19वें राउंड के गांव सिसौला बुजुर्ग, सिसौला खुर्द, सतवाई, अमानउल्लापुर, ढढरा, चौबला, टीकरी, बहरामपुर खास आदि में गुलाम ने फिर बढ़त बना ली। लेकिन 23वें राउंड के बाद जैसे ही रसूलपुर धौलड़ी, सिवालखास, जानी बुजर्ग, बाफर, गेझा, कागमाबाद गून, कलंजरी आदि गांव खुले तो गुलाम मोहम्मद एक लाख से ऊपर पहुंच गए और मनिंदरपाल सिंह 92 हजार पर सिमट गए।