यूपी चुनाव: सपा-रालोद गठबंधन ने मेरठ दक्षिण सीट से आदिल चौधरी को बनाया प्रत्याशी, अभी सिवालखास पर फंसा है पेंच
सपा-रालोद गठबंधन ने मेरठ की दक्षिण सीट पर भी प्रत्याशी फाइनल कर दिया है। गठबंधन ने इस सीट पर आदिल चौधरी को प्रत्याशी बनाया है।
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उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में दक्षिण सीट से गठबंधन का प्रत्याशी भी फाइनल हो गया है। सपा-रालोद गठबंधन ने इस सीट पर आदिल चौधरी को प्रत्याशी बनाया है। उधर, सिवालखास वाली सीट पर अभी पेंच फंसा हुआ है।
हस्तिनापुर से योगेश वर्मा को मिला टिकट
सपा-रालोद गठबंधन से पूर्व विधायक योगेश वर्मा हस्तिनापुर विधानसभा सीट का चुनावी रण लड़ेंगे। रविवार को उनका टिकट फाइनल हो गया और उन्हें सिंबल भी मिल गया। उनकी पत्नी सुनीता वर्मा 2017 से मेरठ नगर निगम की मेयर हैं।
पूर्व विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि और योगेश वर्मा को इस सीट से दावेदार माना जा रहा था। शनिवार तक प्रभुदयाल आगे बताए जा रहे थे, लेकिन बाद में बाजी पलट गई और योगेश टिकट की रेस जीत गए। अब इस सीट पर उनकी भाजपा से सीधे टक्कर मानी जा रही है। हस्तिनापुर का मिथक भी है कि जो यहां से चुनाव जीतता है, उत्तर प्रदेश में उसी पार्टी की सरकार बनती है। इस लिहाज से भी यह बहुत महत्वपूर्ण सीट है।
योगेश वर्मा 2007 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े और हस्तिनापुर विधायक बने। 2012 में उनका टिकट कटा तो उन्होंने हस्तिनापुर से पीस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा। सपा के प्रभुदयाल वाल्मीकि को कड़ी टक्कर दी। प्रभुदयाल की इसमें जीत हुई थी। अगले साल ही बसपा मुखिया मायावती ने योगेश की फिर पार्टी में वापसी करा दी थी। निकाय चुनाव में योगेश की दलित व मुस्लिम वोट बैंक में पकड़ का नतीजा था कि भाजपा के गढ़ में पत्नी सुनीता वर्मा को मेयर पद पर काबिज कराया। इसके अलावा योगेश वर्मा बुलंदशहर से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं।
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मुस्लिम और दलित वोटों के सहारे गठबंधन का दांव
मुस्लिम और दलित वोटों के सहारे गठबंधन ने यह दांव खेला है। करीब तीन लाख 43 हजार मतदाताओं वाली हस्तिनापुर सीट पर एक लाख मुस्लिम, 63 हजार दलित, 56 हजार गुर्जर, 26 हजार जाट, 13 हजार सिख, 10 हजार यादव वोट हैं।
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हिंसा कराने के आरोप में गए थे जेल
योगेश वर्मा को दलित हिंसा कराने के आरोप में भाजपा सरकार ने जेल भेजा था। कुछ माह पहले ही सपा के गुर्जर नेता और अखिलेश के करीबी अतुल प्रधान ने योगेश वर्मा को सपा में शामिल कराया था। एससी-एसटी एक्ट के संशोधन के विरोध में दो अप्रैल 2019 को मेरठ समेत पूरे प्रदेश में हिंसा हुई थी। मेरठ में हजारों की भीड़ ने आगजनी और तोड़फोड़ की। जिसके बाद भाजपा नेताओं ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाकर विरोध जताया था। इसके बाद प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों ने योगेश वर्मा को फोन कर थाने बुलाया और गिरफ्तार कर जेल भेजा था।