हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने मेरठ कैंट बोर्ड पर की तीखी टिप्पणी, बोर्ड ने वापस लिया प्रावधान
- कहा, जिस देश में कानून का राज हो, वहां ऐसे नियम नहीं चल सकते
- कैंट बोर्ड से केस लड़ने वाले ठेकेदार अब डाल सकेंगे टेंडर
- हाईकोर्ट के सख्त रुख पर बोर्ड ने वापस लिया प्रावधान
विस्तार
याचिका में कैंट बोर्ड मेरठ द्वारा 11 सितंबर को जारी टेंडर नोटिस में किए गए इस प्रावधान को चुनौती दी गई थी। बोर्ड ने ऐसे ठेकेदारों को टेंडर डालने पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिनका कैंट बोर्ड के साथ किसी प्रकार का अदालती विवाद चल रहा है। इस नियम को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
कोर्ट ने इस प्रकार के नियम को मनमाना मानते हुए तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस देश में कानून का राज चलता हो, वहां ऐसे नियम नहीं चल सकते हैं। कोर्ट ने इस मामले में कैंट बोर्ड मेरठ से जवाब मांगा था। इसके उत्तर में बोर्ड के वकील ने बताया कि उपरोक्त नियम वापस ले लिया गया है।
कैंट बोर्ड की लापरवाही की वजह से हर बार ठेकेदार सारे बोर्ड पर भारी पड़ रहा है। एकतरफ जहां कई महीने से 421700 रुपये की बजाय आधी रकम ही बोर्ड में जमा की जा रही थी। वहीं, नया बखेड़ा अब नए टेंडर को लेकर हुआ है। दरअसल, कैंट बोर्ड ने 11 सितंबर को नया ठेका जारी करने के लिए टेंडर का विज्ञापन दिया था।
इसमें यह स्पष्ट किया गया था कि जो ठेकेदार बोर्ड के खिलाफ कोर्ट में गया है या जिसका मामला बोर्ड में चल रहा है, वह इस टेंडर की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकता है। वर्तमान ठेकेदार इस शर्त के मुताबिक टेंडर में शामिल नहीं हो सकता था। इसके चलते ठेकेदार ने हाईकोर्ट में अर्जी लगा दी कि कोर्ट की शरण में आने के कारण उसके साथ ऐसा अन्याय किया जा रहा है।
फिर 11 जगह शामिल, उपाध्यक्ष बोले - पुराना ही टेंडर, तकनीकी है कारण
इस टेंडर प्रक्रिया में 12 अक्तूबर तक बिड मांगी गई हैं। 13 अक्तूबर को बिड खोलने की तिथि है। लेकिन 30 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक के बाद भी इसमें 11 प्वाइंट ही खोले गए हैं। हालांकि बोर्ड उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी का कहना है कि ये नया टेंडर नहीं है। नया टेंडर बोर्ड बैठक में पास होने पर ही जारी होगा।
अब देरी नहीं होगी
सदस्यों के साथ बैठक करेंगे। स्पेशल बोर्ड बैठक बुलवाकर नए ठेके के प्वाइंट को लेकर स्पष्ट किया जाएगा। कैंट विधायक के प्रस्ताव पर पूरा बोर्ड एकजुट है। इसमें अब देरी नहीं की जाएगी। -विपिन सोढ़ी, उपाध्यक्ष कैंट बोर्ड
जनहित के मामले में हम साथ
विधायक जब कहेंगे, हम स्पेशल बोर्ड मीटिंग बुलाने के लिए तुरंत पत्र देंगे। चाहें तो सोमवार को उपाध्यक्ष और सदस्य स्पेशल बोर्ड बुलवाने के लिए पत्र दे सकते हैं। हम पूरी तरह से जनता से जुड़े इस मामले में साथ हैं। -बीना वाधवा, पूर्व उपाध्यक्ष कैंट बोर्ड
लंबा खींचने का मतलब नहीं
इस बारे में उपाध्यक्ष और सदस्यों से बात की जा रही है। मामले को लंबा खींचने का कोई मतलब नहीं है। जब आठ प्वाइंट पर ही वसूली होनी हैं तो फिर देरी क्यों करें। स्पेशल बोर्ड मीटिंग बुलाने के लिए उनको पत्र देने के लिए कहेंगे। -सत्यप्रकाश अग्रवाल, कैंट विधायक