जीपीएस पर 20 लाख फूंके: फिर भी डीजल खर्च बेकाबू, वाहनों में तेल चोरी रोकने के लिए की गई व्यवस्था फेल
वाहनों में तेल के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जीपीएस लगाया गया था। हालांकि निगम के 67 वाहनों में जीपीएस नहीं लगाया गया। अब घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए निजी कंपनी का जो 50 गाड़ियां दी गई हैं।
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तेल की चोरी रोकने के लिए 358 वाहनों में जीपीएस लगाने में 20 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद नगर निगम नगर डीजल खर्च पर नियंत्रण नहीं कर पा रहा है। बहुत से वाहनों में जीपीएस खराब है। जिनमें ठीक है उनकी रीडिंग चेक किए बिना ही डीजल के बिलों का भुगतान किया जा रहा है।
वाहनों में तेल के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जीपीएस लगाया गया था। हालांकि निगम के 67 वाहनों में जीपीएस नहीं लगाया गया। अब घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए निजी कंपनी का जो 50 गाड़ियां दी गई हैं उनसे भी जीपीएस हटा लिया गया है। नगर निगम हर वर्ष डीजल पर करीब 12.50 करोड़ खर्च कर करता है। दूसरी तरफ एक वाहन में जीपीएस लगाने के बाद इस पर 1388 रुपये वार्षिक खर्च आता है।
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इस तरह दिया जाता है वाहनों को डीजल
छोटा हाथी कूड़ा गाड़ी - 4 से 6 ली. प्रतिदिन
जेसीबी को डीजल खर्च - सात ली. प्रति घंटा
डंपर को डीजल खर्च - 50 लीटर प्रतिदिन दिन
बड़ी पोर्कलेन मशीन डीजल खर्च- 168 ली. प्रतिदिन
छोटी पोर्कलेन मशीन - आठ ली. प्रतिघंटा
प्रति ट्रैक्टर - तीन ली. प्रति घंटा
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वाहन डिपो प्रभारी की संस्तुति पर भुगतान
निजी कंपनी को जो 50 कूड़ा गाड़ियां दी गई हैं उनमें जीपीएस कंपनी ही लगाएगी। इनसे पुराना जीपीएस हटाया गया है। नए 67 वाहन जिनमें ट्रैक्टर, जेसीबी, डंपर, पार्कलेन, एंटी स्मॉग गन, प्रिंक्लर आदि मशीनों में जीपीएस नहीं है। - डॉ. गजेन्द्र सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत, कोई सुनता नहीं
निगम अधिकारियों की लापरवाही के कारण व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। जीपीएस को लेकर कई बार अधिकारियों से वार्ता हुई, लेकिन भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि कोई सुनता ही नहीं है। - सुनीता वर्मा, महापौर