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Meerut News: ब्रेन स्ट्रोक से बचने का उपचार...जीवन शैली में करें सुधार
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मेरठ। अनियमित जीवन शैली, खानपान और तनाव स्ट्रोक होने के मुख्य कारण हैं। इनमें सुधार कर स्ट्रोक से बचा जा सकता है। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में हर साल इस तरह के पांच हजार से ज्यादा मरीज आते हैं। इस जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 29 अक्तूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है।
60 से ऊपर की उम्र के लोगों में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण ब्रेन स्ट्रोक है। यह 15 से 59 वर्ष के आयुवर्ग में मौत का पांचवां सबसे बड़ा कारण है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वीके बिंद्रा ने बताया कि स्ट्रोक आने के बाद 70 फीसदी मरीजों की सुनने और देखने की क्षमता चली जाती है। 30 फीसदी मरीजों का शरीर अपंग हो जाता है। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव सक्सेना ने बताया कि दिल की बीमारी वाले 20 फीसदी मरीजों को स्ट्रोक की समस्या होती है। पहले यह समस्या बढ़ती उम्र में होती थी लेकिन अब स्ट्रोक का खतरा युवाओं को भी होने लगा है।
ऐसे होता है स्ट्रोक
न्यूरो सर्जन डॉ. अमित बिंदल ने बताया कि मस्तिष्क और नाड़ियों को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की निरंतर आपूर्ति रक्त वाहिकाओं से खून के द्वारा की जाती है। जब भी इन रक्त वाहिकाओं में किसी कारण कोई अवरोध हो जाता है तो मस्तिष्क के कुछ हिस्सों को रक्त की आपूर्ति बंद हो जाती है। मस्तिष्क के कुछ हिस्से को तीन या चार मिनट से ज्यादा देर तक रक्त न मिलने पर ऑक्सीजन और पोषक तत्वों के अभाव में कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं और स्ट्रोक हो जाता है। धमनियों में चर्बी की मात्रा अधिक होने से ब्लॉकेज आ जाते हैं, जिससे खून की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होने के कारण स्ट्रोक पड़ता है। स्ट्रोक उच्च रक्तचाप के कारण भी होता है। खून के अधिक दबाव से नलिकाएं फट जाती हैं और मस्तिष्क के अंदर खून बहने लगता है, इसलिए इसे ब्रेन हेमरेज कहते भी हैं।
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स्ट्रोक से बचाव-
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेंद्र किशोर ने बताया कि स्ट्रोक से बचाव के लिए व्यायाम, उचित खानपान और नशे से दूर रहने की सबसे ज्यादा जरूरत है। तनाव से बचने की कोशिश करनी चाहिए। बढ़ते रक्तचाप का ध्यान रखना चाहिए। अगर समय पर उपचार मिल जाए तो स्ट्रोक से उबरा जा सकता है और उसके बाद जीवन में बदलाव लाया जा सकता है। इसका मुख्य कारण उच्च रक्तचाप, मधुमेह, रक्त शर्करा, उच्च कोलेस्ट्रॉल, शराब, धूम्रपान और मादक पदार्थों की लत के अलावा आरामतलब जीवन शैली, मोटापा, जंक फूड का सेवन और तनाव है।
स्ट्रोक के बाद ये तीन काम जरूर करें-
- बेहोशी से उठे व्यक्ति को मुस्कुराने के लिए कहें
- व्यक्ति से कुछ आसान वाक्य बोलने के लिए कहें
- व्यक्ति से दोनों हाथ ऊपर उठाने के लिए कहें
ये तीन बातें काफी महत्वपूर्ण हैं, और इन तीनों चीजों को करने में व्यक्ति को अगर जरा भी तकलीफ हो रही हो तो जल्दी ही एंबुलेंस बुलाएं। इतना ही नहीं, व्यक्ति को जीभ बाहर निकालने के लिए कहें। अगर जीभ एक तरफ मुड़ी हुई हो तो समझ लीजिए ये भी स्ट्रोक का ही लक्षण हैं।
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60 से ऊपर की उम्र के लोगों में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण ब्रेन स्ट्रोक है। यह 15 से 59 वर्ष के आयुवर्ग में मौत का पांचवां सबसे बड़ा कारण है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वीके बिंद्रा ने बताया कि स्ट्रोक आने के बाद 70 फीसदी मरीजों की सुनने और देखने की क्षमता चली जाती है। 30 फीसदी मरीजों का शरीर अपंग हो जाता है। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव सक्सेना ने बताया कि दिल की बीमारी वाले 20 फीसदी मरीजों को स्ट्रोक की समस्या होती है। पहले यह समस्या बढ़ती उम्र में होती थी लेकिन अब स्ट्रोक का खतरा युवाओं को भी होने लगा है।
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ऐसे होता है स्ट्रोक
न्यूरो सर्जन डॉ. अमित बिंदल ने बताया कि मस्तिष्क और नाड़ियों को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की निरंतर आपूर्ति रक्त वाहिकाओं से खून के द्वारा की जाती है। जब भी इन रक्त वाहिकाओं में किसी कारण कोई अवरोध हो जाता है तो मस्तिष्क के कुछ हिस्सों को रक्त की आपूर्ति बंद हो जाती है। मस्तिष्क के कुछ हिस्से को तीन या चार मिनट से ज्यादा देर तक रक्त न मिलने पर ऑक्सीजन और पोषक तत्वों के अभाव में कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं और स्ट्रोक हो जाता है। धमनियों में चर्बी की मात्रा अधिक होने से ब्लॉकेज आ जाते हैं, जिससे खून की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होने के कारण स्ट्रोक पड़ता है। स्ट्रोक उच्च रक्तचाप के कारण भी होता है। खून के अधिक दबाव से नलिकाएं फट जाती हैं और मस्तिष्क के अंदर खून बहने लगता है, इसलिए इसे ब्रेन हेमरेज कहते भी हैं।
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स्ट्रोक से बचाव-
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेंद्र किशोर ने बताया कि स्ट्रोक से बचाव के लिए व्यायाम, उचित खानपान और नशे से दूर रहने की सबसे ज्यादा जरूरत है। तनाव से बचने की कोशिश करनी चाहिए। बढ़ते रक्तचाप का ध्यान रखना चाहिए। अगर समय पर उपचार मिल जाए तो स्ट्रोक से उबरा जा सकता है और उसके बाद जीवन में बदलाव लाया जा सकता है। इसका मुख्य कारण उच्च रक्तचाप, मधुमेह, रक्त शर्करा, उच्च कोलेस्ट्रॉल, शराब, धूम्रपान और मादक पदार्थों की लत के अलावा आरामतलब जीवन शैली, मोटापा, जंक फूड का सेवन और तनाव है।
स्ट्रोक के बाद ये तीन काम जरूर करें-
- बेहोशी से उठे व्यक्ति को मुस्कुराने के लिए कहें
- व्यक्ति से कुछ आसान वाक्य बोलने के लिए कहें
- व्यक्ति से दोनों हाथ ऊपर उठाने के लिए कहें
ये तीन बातें काफी महत्वपूर्ण हैं, और इन तीनों चीजों को करने में व्यक्ति को अगर जरा भी तकलीफ हो रही हो तो जल्दी ही एंबुलेंस बुलाएं। इतना ही नहीं, व्यक्ति को जीभ बाहर निकालने के लिए कहें। अगर जीभ एक तरफ मुड़ी हुई हो तो समझ लीजिए ये भी स्ट्रोक का ही लक्षण हैं।