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तीन तलाक पर बने ऐसा कानून कि कांप जाए रूह : शबाना

Wed, 23 Aug 2017 06:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Wed, 23 Aug 2017 06:37 PM IST
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This was the law on three divorces, the word of divorce
तीन तलाक मुद्दा

खालापार की शबाना परवीन की शादी दो साल पहले मेरठ में हुई थी। उसका पहले दिन से ही ससुराल में उत्पीड़न होने लगा। उसने जैसे-तैसे कर परिवार की इज्जत के लिए एक साल गुजार दिया। हालांकि ससुरालियों की ज्यादती से वह तंग आ गई। आखिरकार एक रोज ऐसा आया कि जिसने शबाना को दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया। तलाक का दंश झेल रही शबाना ने साफ कहा कि कानून दीनी एतबार से बने और ऐसी सजा हो, जिससे लोग तलाक देना तो दूर इस शब्द से भी कांप उठें।  

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खालापार निवासी हाजी शकील ने बताया कि बेटी शबाना परवीन का निकाह दो साल पहले मेरठ के बुढ़ाना गेट पर रसद इलियास से किया था। अब शबाना अपने माता-पिता के पास है। तलाक का दंश झेल रही पीड़िता शबाना ज्यादती और जुल्म की कहानी बताते हुए सुबक पड़ी, पिता की भी आंखें नम हो गईं। शबाना ने कहा कि मजहब के एतबार से उसको तलाक हो गया, लेकिन उसकी जिंदगी अब दोराहे पर है। माता-पिता के घर पर शबाना ने एक बेटी को जन्म दिया। पति रसद ने उसे तलाक देकर अलग कर दिया। कहती है कि वह मजहब के कानून के खिलाफ नहीं है, लेकिन शरीयत के कानून का दुरुपयोग भी नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का फैसले सही है या गलत, यह सब कानून बनने के बाद साफ होगा। हालांकि तीन तलाक पर ऐसा कानून बनाया जाए, जिसमें तलाक देने वालों को कड़ी सजा मिले, ताकि किसी की बेटी की जिंदगी बर्बाद न हो।

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उफ! कितने घर बर्बाद कर दिए तीन तलाक ने

This was the law on three divorces, the word of divorce
तीन तलाक

बागपत। नांगल गांव की शबनम की सुबह-शाम तीन तलाक से रूबरू होती है। बच्चे सवाल पूछते हैं, वह अब्बा के साथ क्यों नहीं रहते। किसी को वह बेचारी लगती है और कोई उसके बिगड़े घर के जख्म कुरेदता है। वह साफ कहती है यदि तीन तलाक की रवायत नहीं होती तो शौहर थाने में पुलिस के सामने उसे कैसे छोड़ देता। अपने हक के लिए उसे कभी संघर्ष नहीं करना पड़ता। 

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक के खात्मे के फैसले को शबनम सही ठहराती है। कहती हैं कि कितने ही घर बर्बाद हुए हैं, कितनी ही महिलाओं को बेबात अपनी ससुराल छोड़नी पड़ी। इसी साल 16 मार्च को बागपत कोतवाली में परिवार के साथ गई थी। जो भी झगड़ा था, लेकिन मन में था थाने से सीधे शौहर के साथ जाना है, लेकिन कोई क्या कर सकता है। थाने में शौहर ने सामने खड़े होकर उसे तीन तलाक कह दिया। इससे पहले वह कुछ समझ पाती, शौहर के साथ आए लोगों ने उसके परिवार के लोगों पर हमला बोल दिया। बच्चे चीख रहे थे और हम थाने में खड़े-खड़े लूट गए थे। हमारा घर भी बिगड़ा और हमारे खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ। उसकी ममेरी बहन शबाना को भी इसी दिन तलाक दिया गया। दोनों बहनों का घर बिगड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही है। तीन तलाक एक बीमारी है और इसका इलाज जरूरी है। इसका खात्मा नहीं किया तो न जाने कितने घर बर्बाद हो जाएंगे।

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