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भक्ति के लिए नहीं होती उम्र की सीमा : प्रदीप नौटियाल
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- डालमपाड़ा स्थित श्रीराम नवमी मंदिर में हुई भागवत कथा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। डालमपाड़ा स्थित श्रीराम नवमी मंदिर डालमपाड़ा में भागवत कथा हुई। इसमें भगवतानुरागी आचार्य प्रदीप नौटियाल ने सती चरित्र, कपिल संवाद और ध्रुव चरित्र के प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जा रहे हों तो इस बात ध्यान रखें कि वहां आपके ईष्ट या आपके गुरु का अपमान न हो। यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर नहीं जाना चाहिए। चाहे वह स्थान अपने पिता का ही घर क्यों न हो। उन्होंने कहा कि भक्ति के लिए उम्र की सीमा नहीं होती है।
उन्होंने कहा कि सती ने भगवान शिव की बात को नहीं माना। पिता के घर पति का अपमान होने के कारण सती को अग्नि में स्वाह होना पड़ा। ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए उन्होंने कहा कि ध्रुव को अपमानित किया गया, तब भी ध्रुव की मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य की बहुत आवश्यकता होती है। ध्रुव ने तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न किया। भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। बचपन से ही बच्चों को भक्ति के लिए प्रेरणा देनी चाहिए।
कथा व्यास ने प्रह्लाद चरित्र के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान दौरान भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूमते रहे। कथा के बाद गढ़वाली भजन संध्या हुई। इस दौरान मुख्य पुजारी पंडित सीपी डिमरी, मयंक अग्रवाल, आशीष रस्तोगी, वासु चौरसिया, राहुल बंसल, प्रदीप शर्म, मयंक, मनीष सिंघल, कुणाल रस्तोगी, यश गर्ग रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। डालमपाड़ा स्थित श्रीराम नवमी मंदिर डालमपाड़ा में भागवत कथा हुई। इसमें भगवतानुरागी आचार्य प्रदीप नौटियाल ने सती चरित्र, कपिल संवाद और ध्रुव चरित्र के प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जा रहे हों तो इस बात ध्यान रखें कि वहां आपके ईष्ट या आपके गुरु का अपमान न हो। यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर नहीं जाना चाहिए। चाहे वह स्थान अपने पिता का ही घर क्यों न हो। उन्होंने कहा कि भक्ति के लिए उम्र की सीमा नहीं होती है।
उन्होंने कहा कि सती ने भगवान शिव की बात को नहीं माना। पिता के घर पति का अपमान होने के कारण सती को अग्नि में स्वाह होना पड़ा। ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए उन्होंने कहा कि ध्रुव को अपमानित किया गया, तब भी ध्रुव की मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य की बहुत आवश्यकता होती है। ध्रुव ने तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न किया। भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। बचपन से ही बच्चों को भक्ति के लिए प्रेरणा देनी चाहिए।
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कथा व्यास ने प्रह्लाद चरित्र के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान दौरान भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूमते रहे। कथा के बाद गढ़वाली भजन संध्या हुई। इस दौरान मुख्य पुजारी पंडित सीपी डिमरी, मयंक अग्रवाल, आशीष रस्तोगी, वासु चौरसिया, राहुल बंसल, प्रदीप शर्म, मयंक, मनीष सिंघल, कुणाल रस्तोगी, यश गर्ग रहे।
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