मेरठ: पट्टे की जमीन पर कब्जे का आरोप, एसडीएम कार्यालय के बाहर महिलाओं का धरना; दी ये चेतावनी
सरधना के चरला-निहोरी में 2002 में 84 लोगों को आवंटित कृषि भूमि के पट्टों पर कब्जे का आरोप है। लाभार्थियों ने जांच कराकर जमीन पर कब्जा दिलाने की मांग की।
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मेरठ के सरधना ग्राम पंचायत चरला-निहोरी में वर्ष 2002 में आवंटित कृषि भूमि के पट्टों पर कब्जे का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को बड़ी संख्या में महिलाएं तहसील पहुंचीं। महिलाओं ने एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना देकर पट्टे की जमीन पर कब्जा दिलाने और पट्टों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। महिलाओं का आरोप है कि वे एसडीएम से मिलने के लिए इंतजार करती रहीं, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी।
2002 में 84 लोगों को आवंटित हुए थे पट्टे
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2002 में तहसील प्रशासन की ओर से ग्राम पंचायत चरला-निहोरी के 84 पात्र लोगों को कृषि भूमि के पट्टे आवंटित किए गए थे। लाभार्थियों का दावा है कि उनके नाम खतौनी में भी दर्ज हैं। आरोप है कि निहोरी गांव के कुछ दबंग लोगों ने पट्टे की जमीन पर कब्जा कर रखा है। इसके चलते पट्टे आवंटित होने के वर्षों बाद भी लाभार्थियों को भूमि का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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पट्टे निरस्त होने की जानकारी से भी असमंजस
ग्रामीणों ने बताया कि पहले चरला और निहोरी गांव एक-दूसरे से सटे हुए थे और दोनों गांवों का ग्राम प्रधान भी संयुक्त था। अब पट्टे की जमीन को लेकर विवाद बना हुआ है। महिलाओं का कहना है कि प्रशासन की ओर से पट्टे निरस्त किए जाने की जानकारी भी दी गई है, लेकिन उन्हें इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
एसडीएम से नहीं हो सकी मुलाकात
शुक्रवार को मोहसिना, राजेश, समीना, राजो, रोशनी, गुलशन, बलबीरी, रिहाना और जगरोशनी समेत बड़ी संख्या में महिलाएं तहसील पहुंचीं। महिलाओं ने एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि वे अपनी शिकायत लेकर एसडीएम से मिलने के लिए इंतजार करती रहीं, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी।
महिलाओं ने आरोप लगाया कि एसडीएम उनकी शिकायत सुने बिना ही गाड़ी में बैठकर तहसील से चले गए। इससे धरने पर बैठी महिलाओं में नाराजगी बढ़ गई।
निष्पक्ष जांच और कब्जा दिलाने की मांग
धरने पर बैठी महिलाओं और ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पट्टों की वैधता और वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। साथ ही पात्र लाभार्थियों को उनकी आवंटित कृषि भूमि पर कब्जा दिलाने की मांग उठाई गई। उनका कहना है कि वर्षों पहले आवंटित जमीन का लाभ अब तक नहीं मिल सका है।