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Meerut News: अंधेरे में डेढ़ साल रहा शहर, फिर भी रोशनी का 2.50 करोड़ भुगतान

Tue, 03 Sep 2024 06:51 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 03 Sep 2024 06:51 AM IST
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The city remained in darkness for one and a half years, yet Rs 2.50 crore was paid for lighting.
मेरठ। महानगर डेढ़ साल तक अंधेरे में रहा, फिर भी रोशनी का नगर निगम ने ईईएसएल कंपनी को 2.50 करोड़ का भुगतान कर दिया है। निगम अधिकारियों ने कार्यकारिणी की आपात बैठक में सोमवार को भुगतान पास कराया।
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महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने स्ट्रीट लाइट के भुगतान को लेकर सूरजकुंड स्थित अपने कैंप कार्यालय में कार्यकारिणी की बैठक बुलाई। इसमें कार्यकारिणी सदस्य बोले, भुगतान पास करा लिया, लेकिन अब दीपावली पर प्रत्येक वार्ड में 100-100 स्ट्रीट लाइट देकर पार्षदों की इज्जत रख लीजिए, ताकि वह अपने क्षेत्र की जनता को जवाब दे सकें। महापौर ने कहा कि निगम अधिकारियों पर लखनऊ से दवाब था, इसलिए 37 करोड़ में से सिर्फ 2.50 करोड़ के भुगतान कराने की सदन ने मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी की बोर्ड में मेरठ शहर का वेस्ट एनर्जी कूड़ा निस्तारण करने के लिए निगम का प्रस्ताव पास कर दिया है। जल्द ही निगम और एनटीपीसी का अनुबंध होने जा रहा है। इसके बाद मुख्य एजेंडे स्ट्रीट लाइट के भुगतान पर चर्चा शुरू हुई। पार्षद राजीव गुप्ता, दीपक वर्मा और विक्रांत ढाका ने स्ट्रीट लाइट की समस्या बताई तो पार्षद पवन चौधरी और कुलदीप घोपला ने निगम अधिकारियों को चेतावनी दी कि दीपावनी पर प्रत्येक वार्ड में 25-25 लाइट नहीं लगीं तो वह भूख हड़ताल करेंगे। महापौर बोले, ईईएसएल कंपनी का मेरठ के अलावा दूसरे नगर निगम से भी अनुबंध है। शासन ने लाइटों के भुगतान का निर्देश दिए हैं। पांच नगर निगम ने भुगतान कर दिया है। मेरठ निगम तो सिर्फ 37 करोड़ में से 2.50 करोड़ का भुगतान करेगा। काफी जद्दोजहद के बाद कार्यकारिणी सदस्यों ने निगम द्वारा भुगतान को पास कर दिया। इस दौरान उपाध्यक्ष विमला वाल्मीकि, संजय सैनी, रेखा सिंह, पूनम गुप्ता, राहत जहां, नाजरीन शाहिद अब्बासी, फजल करीम और नगर आयुक्त डॉ. अमित पाल शर्मा, मुख्य लेखाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार, पंकज कुमार, ममता मालवीय आदि मौजूद रहे।
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4075 लाइट कहां लगी, कंपनी ने नहीं दिया जवाब
स्ट्रीट लाइटों की स्थिति के बारे में अपर नगर आयुक्त पंकज कुमार ने कार्यकारिणी सदस्यों को बताया। कहा कि 2017 में अनुबंध हुआ था कि 42089 हेलोजन लाइटों की जगह एलईडी लाइट लगाने का कार्य कंपनी द्वारा हुआ। निगम के प्रस्ताव पर कंपनी ने 26 हजार लाइट नई लगाईं। 4075 लाइट पार्षदों के कहने पर कंपनी द्वारा लगना बताया गया, जिसकी जानकारी निगम को नहीं है। 60 बार पत्राचार किया, लेकिन कंपनी उक्त लाइटों का हिसाब नहीं दे सकी, यानी 72564 लाइटों की मरम्मत की जिम्मेदारी कंपनी पर थी। लाइटों की मरम्मत न होने पर अगस्त 2023 के बाद निगम ने कंपनी का भुगतान रोक लिया। कंपनी ने 30 करोड़ नई लाइट और सात करोड़ मेंटिनेंस का बताया।
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पार्षद बोले, आंख पर काली पट्टी बांधकर बैठे रहे अधिकारी
अनुबंध में 24 घंटे के अंतराल में स्ट्रीट लाइट ठीक करना है। जुर्माना लगाने के भी प्रावधान है। कंपनी ने लाइटों की मरम्मत नहीं की और निगम ने इसकी मॉनीटरिंग नहीं की। लाइट के भुगतान का नंबर आया, तब जाकर नगर निगम ने 69 लाख का जुर्माना लगाकर कंपनी को नोटिस भेजा है। पार्षद बोले, निगम अधिकारी आंख पर काली पट्टी बांधकर बैठे रहे, जिसके चलते ईईएसएल कंपनी ने मनमानी तरीके से 37 करोड़ का बकाया मेरठ नगर निगम में बताकर बिल भेजा। स्ट्रीट लाइट का भुगतान क्यों दिया जा रहा है। महापौर ने कहा कि लखनऊ ने 5.70 करोड़, अलीगढ़ ने पांच करोड़, झांसी ने 5 करोड़, कानपुर ने 3 करोड़ और फिरोजाबाद ने 1.03 करोड़ का भुगतान कर दिया है। सभी निगम भुगतान कर रहे हैं, इसलिए हमें भी करना चाहिए।


बोर्ड बैठक से पहले सफाई, गृहकर, पटल परिवर्तन और भ्रष्टाचार सुधारें

- कार्यकारिणी के 12 सदस्य की समस्या का समाधान नहीं कर सकते तो 90 पार्षदों का जवाब कैसे देंगे निगम अधिकारी



माई सिटी रिपोर्टर



मेरठ। बैठक के बाद पार्षदों ने निगम अधिकारियों का घेराव किया। सदस्यों ने सफाई व्यवस्था चौपट होने का जिम्मेदार प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह को बताया और उन्हें तुरंत हटाने की मांग की। कहा कि कर्मचारियों के पटल परिवर्तन और डिपो में भ्रष्टाचार बंद कराएं। उसके बाद ही बोर्ड बैठक कराई जाए। पांच सितंबर को नगर निगम की बोर्ड बैठक प्रस्तावित है।
कार्यकारिणी ने अधिकारियों से कहा है कि 12 सदस्यों की समस्या का नगर निगम समाधान नहीं कर पा रहा है। निगम की बोर्ड बैठक में 90 पार्षदों का अधिकारी कैसे जवाब देंगे। अगर बोर्ड बैठक से पहले कर्मचारियों का पटल परिवर्तन नहीं कराया तो निगम में आंदोलन किया जाएगा। बैठक का पार्षद बहिष्कार करेंगे। दिल्ली डिपो में भ्रष्टाचार हो रहा है। दिनभर गाड़ी खड़ी रहती है और निगम से प्रतिदिन उनका 165 लीटर डीजल लिया जा रहा है। इसकी तुरंत जांच कराई जाए। नगर आयुक्त ने अपर नगर आयुक्त को मौके पर भेजकर जांच करने के निर्देश दिए। नलकूप लगवाने या पानी की पाइप लाइन डलवाने के लिए पार्षदों को निगम में चक्कर काटने पड़ रहे हैं। पार्षदों ने एक के बाद एक समस्या अधिकारियों के सामने रखी, जिनका वह जवाब तक नहीं दे पाए। वहीं, जीआइएस सर्वे पर सवाल उठाते हुए संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता ने नया गृहकर निरस्त कर अधिकारियों द्वारा निगम की बोर्ड बैठक में घोषणा करने की मांग रखते हुए महापौर को पत्र भेजा है।




कूड़ा गाड़ी कहां है, पब्लिक को पता चलेगा

नगर आयुक्त डॉ. अमित पाल शर्मा ने बताया कि कूड़ा गाड़ी डोर-टू-डोर नहीं पहुंच रही है। तीन दिन पहले निरीक्षण के दौरान कूड़ा गाड़ी की शिकायत मिली थी। कंपनी को नोटिस जारी किया गया है। कूड़ा गाड़ी की लोकेशन अब पब्लिक को पता चलेगी। ऐसा सिस्टम जल्द ही निगम बनाने जा रहा है।
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