{"_id":"69e79eb4aae735a4d201e2ac","slug":"the-ancient-draupadi-ghat-temple-a-center-of-faith-in-the-dwapar-era-meerut-news-c-228-1-mwn1001-104775-2026-04-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: द्वापर युग की आस्था का केंद्र प्राचीन द्रौपदी घाट मंदिर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: द्वापर युग की आस्था का केंद्र प्राचीन द्रौपदी घाट मंदिर
विज्ञापन
द्रौपदी घाट मंदिर पर मौजूद प्राकृतिक पानी की जल धारा स्रोत संवाद
- यहां बृहस्पतिवार को सत्ता फेरी मेले का होगा आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। ऐतिहासिक नगरी में महाभारत काल से जुड़े कई पौराणिक स्थल आज भी आस्था के केंद्र बने हुए हैं। इन्हीं में से एक प्राचीन द्रौपदी घाट मंदिर है, जिसे द्वापर युग का साक्षी माना जाता है। मान्यता है कि यह विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां माता द्रौपदी की विशेष पूजा-अर्चना होती है। उनकी स्मृतियां आज भी जीवंत हैं।
हस्तिनापुर से करीब ढाई किलोमीटर दूर बूढ़ी गंगा के किनारे स्थित यह घाट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। धार्मिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल में रानी द्रौपदी यहां प्रतिदिन स्नान कर पूजा-अर्चना किया करती थीं। इसी कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। घाट परिसर में श्रीकृष्ण और द्रौपदी का एक छोटा मंदिर है जहां श्रद्धालु दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
गंगा सप्तमी और वैशाख माह की सप्तमी के मौके पर यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पवित्र स्नान करते हैं। महंत बेगवती के अनुसार मान्यता है कि यहां श्रद्धा से स्नान करने वाली महिलाओं को शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
विज्ञापन
हजारों वर्ष पुराना पीपल का वृक्ष
मंदिर परिसर में स्थित हजारों वर्ष पुराना पीपल का वृक्ष आज भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। लोग इस वृक्ष की पूजा कर मनोकामनाएं मांगते हैं। धार्मिक ग्रंथों में भी इस स्थान के महत्व का उल्लेख मिलता है, जिससे इसकी पौराणिकता और अधिक प्रबल होती है।
सत्ता फेरी मेले में पहुंचती हैं महिला श्रद्धालु
वैशाख सप्तमी के अवसर पर हर वर्ष यहां महिलाओं का सत्ता फेरी मेला आयोजित होता है, जिसमें दूरदराज से हजारों महिलाएं भाग लेकर पूजा-अर्चना करती हैं। मेले के दौरान घाट पर विशेष चहल-पहल रहती है और पूरा क्षेत्र भक्ति भाव में डूब जाता है।
पूर्व प्रधानमंत्री भी पहुंचे थे यहां
महंत बेगवती ने बताया कि उनकी तीन पीढ़ियां इसी मंदिर पर रहकर सेवा कर रही हैं। यह स्थान अपने आप में दिव्य और अलौकिक है। कई बार माता द्रौपदी उन्हें सपने में दिखाई दी हैं। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी इस स्थान पर कुछ समय निवास किया था, जिससे इसकी ऐतिहासिक महत्ता और बढ़ जाती है।
प्राकृतिक स्रोत में करते हैं स्नान
मंदिर के पास हजारों वर्ष पुराना प्राकृतिक जल स्रोत है जहां पर हाल ही में पर्यटन विभाग द्वारा दो करोड़ रुपये से जीर्णोद्धार कराया गया है। मंदिर की भव्यता अपने आप में श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित करती है। प्राकृतिक स्रोत में स्नान करने से शरीर के सभी कुष्ठ रोग दूर हो जाते हैं।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। ऐतिहासिक नगरी में महाभारत काल से जुड़े कई पौराणिक स्थल आज भी आस्था के केंद्र बने हुए हैं। इन्हीं में से एक प्राचीन द्रौपदी घाट मंदिर है, जिसे द्वापर युग का साक्षी माना जाता है। मान्यता है कि यह विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां माता द्रौपदी की विशेष पूजा-अर्चना होती है। उनकी स्मृतियां आज भी जीवंत हैं।
हस्तिनापुर से करीब ढाई किलोमीटर दूर बूढ़ी गंगा के किनारे स्थित यह घाट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। धार्मिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल में रानी द्रौपदी यहां प्रतिदिन स्नान कर पूजा-अर्चना किया करती थीं। इसी कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। घाट परिसर में श्रीकृष्ण और द्रौपदी का एक छोटा मंदिर है जहां श्रद्धालु दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
विज्ञापन
गंगा सप्तमी और वैशाख माह की सप्तमी के मौके पर यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पवित्र स्नान करते हैं। महंत बेगवती के अनुसार मान्यता है कि यहां श्रद्धा से स्नान करने वाली महिलाओं को शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
विज्ञापन
हजारों वर्ष पुराना पीपल का वृक्ष
मंदिर परिसर में स्थित हजारों वर्ष पुराना पीपल का वृक्ष आज भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। लोग इस वृक्ष की पूजा कर मनोकामनाएं मांगते हैं। धार्मिक ग्रंथों में भी इस स्थान के महत्व का उल्लेख मिलता है, जिससे इसकी पौराणिकता और अधिक प्रबल होती है।
सत्ता फेरी मेले में पहुंचती हैं महिला श्रद्धालु
वैशाख सप्तमी के अवसर पर हर वर्ष यहां महिलाओं का सत्ता फेरी मेला आयोजित होता है, जिसमें दूरदराज से हजारों महिलाएं भाग लेकर पूजा-अर्चना करती हैं। मेले के दौरान घाट पर विशेष चहल-पहल रहती है और पूरा क्षेत्र भक्ति भाव में डूब जाता है।
पूर्व प्रधानमंत्री भी पहुंचे थे यहां
महंत बेगवती ने बताया कि उनकी तीन पीढ़ियां इसी मंदिर पर रहकर सेवा कर रही हैं। यह स्थान अपने आप में दिव्य और अलौकिक है। कई बार माता द्रौपदी उन्हें सपने में दिखाई दी हैं। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी इस स्थान पर कुछ समय निवास किया था, जिससे इसकी ऐतिहासिक महत्ता और बढ़ जाती है।
प्राकृतिक स्रोत में करते हैं स्नान
मंदिर के पास हजारों वर्ष पुराना प्राकृतिक जल स्रोत है जहां पर हाल ही में पर्यटन विभाग द्वारा दो करोड़ रुपये से जीर्णोद्धार कराया गया है। मंदिर की भव्यता अपने आप में श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित करती है। प्राकृतिक स्रोत में स्नान करने से शरीर के सभी कुष्ठ रोग दूर हो जाते हैं।

द्रौपदी घाट मंदिर पर मौजूद प्राकृतिक पानी की जल धारा स्रोत संवाद