उम्मीद की मशाल: पांच शिक्षकों ने हाथ बढ़ाया तो बन गया 26 हजार का कारवां, बने सहारा, बांट दिए 11 करोड़
मुजफ्फरनगर के पांच शिक्षकों ने हाथ बढ़ाया तो 26 हजार का कारवां बन गया। आंदोलन के दौरान हुई दोस्ती और अब पीड़ितों की मदद कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण काल में 44 शिक्षकों के परिवार को आर्थिक सहायता दी।
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मुजफ्फरनगर के दो दोस्तों की असमय मौत के गम में डूबे पांच शिक्षकों के संकल्प ने मदद की नई राह खोल दी। मृतक शिक्षक आश्रितों की मदद के लिए बनाई गई टीचर्स सेल्फ केयर टीम पांच से अब 26 हजार शिक्षकों के परिवार में बदल गई है। टीम ने सौ-सौ रुपये एकत्र कर 63 पीड़ित परिवारों को अब तक 11 करोड़ सात लाख की मदद पहुंचाने का काम किया।
कंपोजिट स्कूल बागोवाली सदर में सहायक अध्यापक डॉ. फर्रुख हसन बताते हैं कि 72825 शिक्षकों की भर्ती के लिए 2016 में सुप्रीम कोर्ट तक संघर्ष करना पड़ा था। नौकरी तो मिल गई, लेकिन उनके परिचित दो शिक्षकों की असमय मौत हो गई। पीड़ित परिवारों की मदद के लिए पूरी ताकत लगाने के बावजूद सिर्फ चार-चार लाख रुपये एकत्र हो सके।
आंदोलन के दौरान प्रयागराज के प्राथमिक विद्यालय जोरवट के शिक्षक विवेकानंद आर्य, यूपीएस रामपुर खानपुर कंपोटिज विद्यालय के शिक्षक सुधेश पांडेय, प्राथमिक विद्यालय केवलापुर के संजीव कुमार रजक, महाराजगंज के उच्च प्राथमिक विद्यालय मटिहनिया चौधरी से दोस्ती हुई थी।
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पांचों दोस्ती ने मिलकर टीचर्स सेल्फ केयर टीम बनाई। तय किया गया कि परिषदीय और माध्यमिक विद्यालय के किसी शिक्षक की असमय मौत हो जाती है तो टीम उसके परिवार की आर्थिक मदद करेगी।
शिक्षकों को सिर्फ 100-100 रुपये सहयोग राशि देने का प्रस्ताव रखा गया। शुरूआत की तो कोरोना संक्रमण काल आ गया, जिससे टीम ने शिक्षकों की खूब मदद की। सितंबर 2020 से अब तक 11 करोड़ सात लाख रुपये एकत्र कर पीड़ित परिवारों को दे चुके हैं। धनराशि सीधे पीड़ितों के खाते मे ही जाती है।
इस तरह करते हैं मदद
टीम के सदस्य पहले पीड़ित परिवार का पूरा ब्योरा जुटाते हैं। तस्दीक हो जाने के बाद मोबाइल ग्रुप और टीम की वेबसाइट पर पीड़ित परिवार का खाता नंबर शेयर किया जाता है। ग्रुप से जुड़े 26 हजार शिक्षक सीधे पीड़ित के खाते में ही मदद पहुंचाते हैं, जिनकी पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहता है। करीब 11 दिन तक मदद का सिलसिला चलता है।
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केस-1
सिद्धार्थनगर जिले में कोरोना संक्रमण काल में शिक्षक अश्वनी तिवारी और उनकी पत्नी का निधन हो गया। परिवार में दो मासूम बेटियां थी। टीम ने दोनों बच्चिं के लिए 21 लाख रुपये एकत्र किए।
केस-2
ग्राम पंचायत चुनाव में ड्यूटी पर गए शिक्षक मोहम्मद साबिर कोरोना संक्रमित हुए और तीन दिन में ही इंतकाल हो गया। जिस वक्त हर तरफ मारामारी मची हुई थी, तभी टीम ने परिवार को 19 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की।
केस-3
प्रतापगढ़ के शिक्षक प्रदीप कुमार त्रिपाठी का असमय निधन हुआ। टीम ने उनकी पत्नी को 23 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। परिवार के सदस्य को नौकरी दिलाई।