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MEERUT : शोध में बहानेबाजी कर रहे शिक्षक, पीएचडी में आ रही परेशानी
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शोध में हो रही बहानेबाजी, विवि ने मांगी सीटों की जानकारी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय कैंपस और कॉलेजों में छात्रों को शोध कराने में बहानेबाजी की जा रही है। विवि द्वारा सुपरवाइजर नियुक्त किए जाने के बाद तमाम शिक्षक छात्र-छात्राओं को परेशान कर रहे हैं। वे शोध में असमर्थता जताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। एक तरफ शोध कराने वाले शिक्षकों की वैसे ही कमी होे गई है, ऊपर से शिक्षकों का यह रवैया छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का नुकसान कर रहा है।
सीसीएसयू कैंपस और कॉलेजों से पीएचडी करने के इच्छुक छात्र-छात्राओं को अब विवि द्वारा आरडीसी द्वारा सुपरवाइजर-निर्देश नियुक्त किया जाता है। लेकिन बड़ी संख्या में शिक्षक ऐसे छात्र-छात्राओं को असमर्थता जताते हुए शोध कराने से इंकार कर रहे हैं। जिसके कारण छात्र-छात्राओं को शोध करने में परेशानी हो रही है। वे विश्वविद्यालय पहुंचकर लगातार ऐसी शिकायत कर रहे हैं। यह भी तब हो रहा है जबकि यूजीसी ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन कॉलेजों में पीजी नहीं है, वहां पर शोध नहीं कराए जा सकते हैं। ऐसे में विवि प्रशासन ने सभी प्राचार्यों को पत्र लिखकर कहा है कि कॉलेजों में कार्यरत जिन शिक्षकों को शोध समिति द्वारा छात्र-छात्राएं आवंटित किए जाते हैं, उनको शोध कराने को निर्देशित करें। इसके अलावा विवि प्रशासन ने सभी प्राचार्यों से शोध कराने हेतु अर्ह शिक्षकों की भी सूची देने को कहा है। इसके साथ ही उनके अंतर्गत कितनी सीटें खाली हैं, इसका भी पूरा ब्यौरा मांगा गया है। जो कॉलेज सही जानकारी नहीं देंगे उनके खिलाफ शासन को लिखकर भेजा जाएगा। कई विषयों में शोध कराने को लेकर खेल भी चल रहा है। कुछ शिक्षक ऐसे हैं जो जानबूझकर भी छात्रों को शोध कराने के लिए सुपरवाइजर नहीं बन रहे हैं।
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय कैंपस और कॉलेजों में छात्रों को शोध कराने में बहानेबाजी की जा रही है। विवि द्वारा सुपरवाइजर नियुक्त किए जाने के बाद तमाम शिक्षक छात्र-छात्राओं को परेशान कर रहे हैं। वे शोध में असमर्थता जताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। एक तरफ शोध कराने वाले शिक्षकों की वैसे ही कमी होे गई है, ऊपर से शिक्षकों का यह रवैया छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का नुकसान कर रहा है।
सीसीएसयू कैंपस और कॉलेजों से पीएचडी करने के इच्छुक छात्र-छात्राओं को अब विवि द्वारा आरडीसी द्वारा सुपरवाइजर-निर्देश नियुक्त किया जाता है। लेकिन बड़ी संख्या में शिक्षक ऐसे छात्र-छात्राओं को असमर्थता जताते हुए शोध कराने से इंकार कर रहे हैं। जिसके कारण छात्र-छात्राओं को शोध करने में परेशानी हो रही है। वे विश्वविद्यालय पहुंचकर लगातार ऐसी शिकायत कर रहे हैं। यह भी तब हो रहा है जबकि यूजीसी ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन कॉलेजों में पीजी नहीं है, वहां पर शोध नहीं कराए जा सकते हैं। ऐसे में विवि प्रशासन ने सभी प्राचार्यों को पत्र लिखकर कहा है कि कॉलेजों में कार्यरत जिन शिक्षकों को शोध समिति द्वारा छात्र-छात्राएं आवंटित किए जाते हैं, उनको शोध कराने को निर्देशित करें। इसके अलावा विवि प्रशासन ने सभी प्राचार्यों से शोध कराने हेतु अर्ह शिक्षकों की भी सूची देने को कहा है। इसके साथ ही उनके अंतर्गत कितनी सीटें खाली हैं, इसका भी पूरा ब्यौरा मांगा गया है। जो कॉलेज सही जानकारी नहीं देंगे उनके खिलाफ शासन को लिखकर भेजा जाएगा। कई विषयों में शोध कराने को लेकर खेल भी चल रहा है। कुछ शिक्षक ऐसे हैं जो जानबूझकर भी छात्रों को शोध कराने के लिए सुपरवाइजर नहीं बन रहे हैं।
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