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टीबी के मरीज को पूरे सप्ताह दवा के साथ मिलेगा पैसा 

Sun, 03 Jun 2018 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 03 Jun 2018 12:29 AM IST
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tb ke mareej ko poorae saptaah dava ke saath milega paisa
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सरकार की योजना वर्ष 2025 तक टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) को जड़ से खत्म करने की है। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई। टीबी का इलाज करने वाले 1104 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निजी अस्पतालों या चिकित्सकों की तर्ज पर इलाज होगा। हर रोज टीबी की दवा खाने के लिए दी जाएगी, जो पहले सप्ताह में तीन दिन दी जाती थी। इसके अलावा टीबी के मर्ज दूर करने के लिए सरकार ने हैवी डोज बेडाकुलीन देने का निर्णय लिया है। इससे मल्टीड्रग रेसिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस (एमडीआर) का दो साल में पूरा होने वाला इलाज नौ से 11 माह में पूरा हो जाएगा।  
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इतना नही नहीं, सरकार टीबी का इलाज करा रहे मरीज को हर माह 500 रुपये भी देगी, जो मरीज के खाते में पहुंचेगा। जिले में अब तक ऐसे 225 मरीजों का रजिस्ट्रेशन कराया गया है। इनमें से 50 मरीजों के खाते में यह रकम पहुंच चुकी है। टीबी के मरीजों को इसके लिए अपने बैंक अकाउंट और आधार कार्ड की छायाप्रति टीबी कार्यालय में लानी होगी।
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मॉनिटरिंग के लिए मिले 38 टेबलेट  
टीबी के मरीजों की सही तरीके से मॉनिटरिंग हो सके, इसके टीबी विभाग से जुड़े स्टाफ और अधिकारियों को 38 टेबलेट दिए गए हैं। इसमें टीबी के मरीजों की एंट्री का डेटा होगा। इसके जरिए कॉल सेंटर की तर्ज पर कार्य किया जाएगा। मरीज को कॉल कर पूछा जाएगा कि उसने दवाई खाई या नहीं।  
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4.18 लाख लोगों में ढूंढेंगे मरीज  
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एमएस फौजदार ने बताया कि सक्रिय क्षय रोग खोज अभियान का पहला चरण इस बार 18 जून से शुरू हो रहा है, जो 28 जून तक चलेगा। अभियान अर्बन हेल्थ पोस्ट राजेंद्रनगर, जाकिर कालोनी, इस्लामाबाद, लखीपुरा, शकूर नगर, तारापुरी, शालीमार गार्डन और ग्रामीण क्षेत्र के सरूरपुर में चलाया जाएगा। इसके लिए 153 टीमों का गठन किया गया है। इसमें 30 कर्मचारियों द्वारा सुपरविजन किया जाएगा। 10 मेडिकल ऑफिसरों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। 418792 की जनसंख्या पर करीब 83 हजार घरों में टीबी के लक्षणों की स्क्रीनिंग की जाएगी। जो मरीज मिलेंगे उनका इलाज शुरू किया जाएगा।  

निजी चिकित्सकों ने देना शुरू किया ब्योरा  
टीबी का मरीजों का ब्योरा निजी चिकित्सकों और मेडिकल स्टोर संचालकों ने देना शुरू कर दिया है। इस संबंध में सरकार ने पिछले दिनों नोटिफिकेशन जारी किया था, जिस पर अमल किया जा रहा है। दरअसल, इसमें जानकारी न देने पर छह माह से दो साल तक की सजा का प्रावधान है।  


2018: टीबी के मरीजों का हाल  
एक जनवरी से 31 मार्च 2018 तक सरकारी चिकित्सालयों और सेंटरों पर 2002 मरीज रजिस्टर्ड किए गए हैं, वहीं निजी चिकित्सकों के पास 747 मरीज आए हैं। इसी तरह एक अप्रैल से 31 मई तक सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर 745 मरीज आए हैं, जबकि निजी चिकित्सकों के पास 180 मरीज आए हैं। इस तरह 3674 मरीज आ चुके हैं। पिछले साल इनकी संख्या 6898 थी। 
मेरठ के पिछले पांच सालों ें 32 हजार 783 टीबी के मरीज मिल चुके हैं।  

क्या है टीबी  
टीबी एक जीवाणु संक्रमण रोग है, जो माइक्रो बैक्टीरिया से फैलता है। ज्यादातर मामले दूसरे मरीज से प्राप्त संक्रमण के कारण उपजी टीबी के होते हैं।
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