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जहर से ज्यादा खतरनाक अंधविश्वास, एंटी स्नेक वेनम से रखो आस
Fri, 27 Jun 2025 12:07 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Fri, 27 Jun 2025 12:07 AM IST
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बिजनौर। बरसात शुरू होते ही सर्पदंश के मामले बढ़ने लगे हैं। जिले में पिछले एक माह में 10 से ज्यादा मामले सर्पदंश के हो चुके हैं। चिकित्सक बता रहे हैं कि सर्पदंश का इलाज झाड़-फूंक नहीं, बल्कि एंटी स्नेक वेनम हैं। अंधविश्वास के चक्कर में पड़कर लोग जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। अगर समय से लोग एंटी स्नेक वेनम लगवा लें तो जान बच सकती है।
मेडिकल अस्पताल में मई से अब तक 20 से ज्यादा सर्पदंश के मरीज पहुंचे हैं। इनका समय से इलाज हुआ तो जान भी बच गई। इन सभी को एंटी स्नेक वेनम दी गई है। सीएमएस का दावा है कि जिला अस्पताल में पर्याप्त एंटी स्नेक वेनम की वॉयल हैं। वहीं अब हर सीएचसी-पीएचसी पर भी यह उपलब्ध है। इसलिए झाड़फूंक के बजाए उपचार कराएं।
n सांप की 14 प्रजाति, केवल चार ही जहरीली : एसडीओ ज्ञान सिंह ने बताया कि बिजनौर जिले में सांप की 14 प्रजाति मिलती हैं। इनमें से चार प्रजाति के सांप ही विषैले हैं, जिनके काटने से व्यक्ति की मौत हो सकती है। इनमें किंग कोबरा, कोबरा, कॉमन क्रेट, रस्सल्स वाइपर विषैले सांप हैं। जबकि कॉमन कैट स्नेक कुछ कम विषैला है। ब्राह्मनी वर्म स्नेक, कॉमन वुल्फ स्नेक, चैकर्ड कीलबैक, स्ट्राइप्ड कीलबैक, इंडियन रैट स्नेक, कॉमन ट्रिंकेट स्नेक, कॉपर-हेडेड ट्रिंकेट स्नेक, कौलर्ड ब्लैक-हैडेड स्नेक, बर्मीज पाइथन बिषहीन सांप हैं, जो आमतौर पर सभी क्षेत्रों में देखे जाते हैं।
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n सर्पदंश के मरीजों को 48 घंटे निगरानी में रखते हैं : मेडिकल अस्पताल के सीएमएस डाॅ. मनोज सेन ने बताया कि सर्पदंश में आया मरीज का सबसे पहले बंध खुलवाते हैं और उसका ब्लडप्रेशर देखते हैं। ड्रीप में दो एंटी स्नेक वेनम की दो वॉयल डालते हैं। इसके बाद ऐसे मरीज की 48 घंटे निगरानी करते हैं।
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मेडिकल अस्पताल में मई से अब तक 20 से ज्यादा सर्पदंश के मरीज पहुंचे हैं। इनका समय से इलाज हुआ तो जान भी बच गई। इन सभी को एंटी स्नेक वेनम दी गई है। सीएमएस का दावा है कि जिला अस्पताल में पर्याप्त एंटी स्नेक वेनम की वॉयल हैं। वहीं अब हर सीएचसी-पीएचसी पर भी यह उपलब्ध है। इसलिए झाड़फूंक के बजाए उपचार कराएं।
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n सांप की 14 प्रजाति, केवल चार ही जहरीली : एसडीओ ज्ञान सिंह ने बताया कि बिजनौर जिले में सांप की 14 प्रजाति मिलती हैं। इनमें से चार प्रजाति के सांप ही विषैले हैं, जिनके काटने से व्यक्ति की मौत हो सकती है। इनमें किंग कोबरा, कोबरा, कॉमन क्रेट, रस्सल्स वाइपर विषैले सांप हैं। जबकि कॉमन कैट स्नेक कुछ कम विषैला है। ब्राह्मनी वर्म स्नेक, कॉमन वुल्फ स्नेक, चैकर्ड कीलबैक, स्ट्राइप्ड कीलबैक, इंडियन रैट स्नेक, कॉमन ट्रिंकेट स्नेक, कॉपर-हेडेड ट्रिंकेट स्नेक, कौलर्ड ब्लैक-हैडेड स्नेक, बर्मीज पाइथन बिषहीन सांप हैं, जो आमतौर पर सभी क्षेत्रों में देखे जाते हैं।
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n सर्पदंश के मरीजों को 48 घंटे निगरानी में रखते हैं : मेडिकल अस्पताल के सीएमएस डाॅ. मनोज सेन ने बताया कि सर्पदंश में आया मरीज का सबसे पहले बंध खुलवाते हैं और उसका ब्लडप्रेशर देखते हैं। ड्रीप में दो एंटी स्नेक वेनम की दो वॉयल डालते हैं। इसके बाद ऐसे मरीज की 48 घंटे निगरानी करते हैं।