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कोरोना के गंभीर मरीजों को बचाना है तो 15 मिनट में शुरू होना चाहिए इलाज, डॉक्टरों को दी गई ट्रेनिंग
Tue, 23 Jun 2020 10:20 AM IST
मेरठ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2020 10:20 AM IST
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कोरोना वायरस (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : PTI
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उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में कोविड-19 से संक्रमित मरीज, जिनकी हालत गंभीर होती है, उन्हें तुरंत इलाज की जरूरत होती है। जितनी देर होगी, उनके बचने की संभावना उतनी कम हो जाती है। ऐसे रोगियों के मेडिकल फ्लू ओपीडी में पहुंचने के 15 मिनट के अंदर वार्ड में शिफ्ट कर उपचार शुरू हो जाना चाहिए। मेडिकल कॉलेज सभागार में सोमवार को स्टाफ को इमरजेंसी एवं ट्रॉमा मैनेजमेंट ट्रेनिंग दी गई। इसमें ज्यादा से ज्यादा मरीजों को बचाने पर जोर दिया गया।
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ट्रेनिंग के दौरान कोविड-19 के संभावित गंभीर रोगियों के मेडिकल कॉलेज की फ्लू ओपीडी में पहुंचने से लेकर उनकी त्वरित चिकित्सा, जांच एवं देखभाल के सभी आयामों पर चर्चा की गई। सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वीरेंद्र सिंह ने फ्लो डायग्राम, चार्ट और टेबल्स दिखाकर कोविड-19 संभावित रोगियों की देखभाल का पूरा वैज्ञानिक विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि दो तरह के मरीज आते हैं। एक, गंभीर कोविड-19 संभावित रोगी, जिनकी हालत बहुत गंभीर होती है। उन्हें तत्काल इलाज व देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे रोगियों की देखभाल में देर हो तो उनके बचने की संभावना कम हो जाती है। उनका 15 मिनट के अंदर इलाज शुरू हो जाना चाहिए। इसके लिए सिस्टम का बहुत चुस्त-दुरुस्त होना जरूरी है।
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वहीं दूसरी तरह के रोगी सामान्य बुखार, खांसी, गला खराब आदि के होते हैं, जिन्हें सांस लेने में कोई तकलीफ नहीं होती है। इनको ओपीडी से ही दवा देकर घर भेजा जा सकता है। अगर टेस्ट की रिपोर्ट आने तक रुकना पड़े तो उनको होल्डिंग एरिया में रोका जा सकता है।
डॉ वीरेंद्र सिंह ने किन रोगियों को वेंटिलेटर पर डालने की जरूरत होती है और उसका संचालन कैसे किया जाता है, इस पर भी चर्चा की। अस्पताल के मुख्य अधीक्षक प्रोफेसर डॉ. धीरज बालियान ने कहा कि अभी बहुत चौकन्ना रहने की जरूरत है, क्योंकि अभी रोगियों के संख्या बढ़ने की आशंका है। ट्रेनिंग प्रोग्राम में मेडिकल कॉलेज के 14 सीनियर चिकित्सा शिक्षक, 18 रेजिडेंट डॉक्टर तथा 136 नर्सों एवं नर्सिंग स्टूडेंट्स शामिल हुए।
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