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स्मार्ट फोन पर जोर, आंखें हो रहीं कमजोर, नेत्रों में सूखापन और खुजली की है शिकायत तो ऐसे करें बचाव
Tue, 25 Feb 2020 03:48 PM IST
Dimple Sirohi
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Tue, 25 Feb 2020 03:48 PM IST
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पहले दादा-दादी और घर के बड़े बच्चों से कहते थे टीवी दूर से देखो, वरना तुम्हारी आंखें खराब हो जाएंगी। लेकिन अब बच्चे तो बच्चे बड़े भी स्मार्ट फोन (मोबाइल) पर ज्यादा वक्त बिता रहे हैं। नतीजतन युवाओं की आंखें कमजोर होती जा रही हैं।
पढ़ाई-लिखाई की उम्र में ही बच्चों की आंखों पर चश्मा दिखाई देने लगा है। जिला अस्पताल में अप्रैल 2019 से लेकर फरवरी 2020 तक 40 हजार 195 मरीजों पर स्टडी की गई है, जिसमें 26 हजार 88 मरीजों की आंखें कमजोर निकली हैं, यानि करीब 65 प्रतिशत मरीजों की रोशनी कम पाई गई। इनके अलावा 1051 मरीजों के ऑपरेशन भी किए गए।
इनमें 21 से 40 साल की उम्र के लोग ज्यादा हैं। इनमें छोटे बच्चे भी हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि आंखों की रोशनी कम होने कारणों में मुख्य रूप से लेटकर पढ़ने की आदत, अंधेरे में पढ़ना, लंबे समय तक आंखें गड़ाकर लगातार मोबाइल-टीवी या कंप्यूटर देखना हैं। अगर यह अंधेरे में करें तो और घातक हैं।
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रोशनी की कमी से आंखों की पुतलियां फैल जाती हैं जिसका परिणाम होता है कि आंख के फोकस में नजदीक और दूर की चीजों के बीच फर्क कम होना। लगातार टीवी, मोबाइल और कंप्यूटर देखने से आंखों की रोशनी कम होने लगती है, क्योंकि इनसे निकलने वाली घातक किरणें हमारी आंखों को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं। कभी भी बहुत देर तक पास या बहुत दूर एवं लेटकर टीवी-मोबाइल या कंप्यूटर नहीं देखना चाहिए। इसके अलावा गलत खानपान और अंदरूनी सेहत का ख्याल न रखना भी कारण हैं।
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पढ़ाई-लिखाई की उम्र में ही बच्चों की आंखों पर चश्मा दिखाई देने लगा है। जिला अस्पताल में अप्रैल 2019 से लेकर फरवरी 2020 तक 40 हजार 195 मरीजों पर स्टडी की गई है, जिसमें 26 हजार 88 मरीजों की आंखें कमजोर निकली हैं, यानि करीब 65 प्रतिशत मरीजों की रोशनी कम पाई गई। इनके अलावा 1051 मरीजों के ऑपरेशन भी किए गए।
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इनमें 21 से 40 साल की उम्र के लोग ज्यादा हैं। इनमें छोटे बच्चे भी हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि आंखों की रोशनी कम होने कारणों में मुख्य रूप से लेटकर पढ़ने की आदत, अंधेरे में पढ़ना, लंबे समय तक आंखें गड़ाकर लगातार मोबाइल-टीवी या कंप्यूटर देखना हैं। अगर यह अंधेरे में करें तो और घातक हैं।
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रोशनी की कमी से आंखों की पुतलियां फैल जाती हैं जिसका परिणाम होता है कि आंख के फोकस में नजदीक और दूर की चीजों के बीच फर्क कम होना। लगातार टीवी, मोबाइल और कंप्यूटर देखने से आंखों की रोशनी कम होने लगती है, क्योंकि इनसे निकलने वाली घातक किरणें हमारी आंखों को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं। कभी भी बहुत देर तक पास या बहुत दूर एवं लेटकर टीवी-मोबाइल या कंप्यूटर नहीं देखना चाहिए। इसके अलावा गलत खानपान और अंदरूनी सेहत का ख्याल न रखना भी कारण हैं।
एक मिनट में 10 से 15 बार झपकनी चाहिए पलक
अमूमन एक मिनट में 10 से 15 बार पलकें झपकना चाहिए, इससे कार्निया में तरलता बनी रहती है। मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर पर काम करते वक्त कई लोगों की पलकें एक मिनट तक झपकती नहीं हैं या दो-चार बार ही झपकती हैं। इससे आंखों में तरलता कम हो जाती है, जिसे ड्राई आई कहते हैं। - प्रदीप वार्ष्णेय, नेत्र परीक्षण अधिकारी, जिला अस्पताल
जिला अस्पताल में 40 हजार 195 मरीजों पर हुई स्टडी
65 प्रतिशत की आंखें निकलीं कमजोर, 26 हजार 88 मरीजों को निकली चश्मे की जरूरत
ऐसे करें बचाव
-आंखों को पर्याप्त आराम देने के लिए 8 घंटे की नींद लें
-कंप्यूटर, टीवी या मोबाइल में देख रहे हों तो उचित दूरी बना कर रखें
-दिन में 3 से 4 बार अपनी आंखों को ठंडे पानी से अच्छी तरह धोएं
-धूप या किसी धूल-मिट्टी वाली जगह पर जाएं तो सनग्लासिज पहनें
-खाने में दूध, मक्खन, गाजर, टमाटर, पपीता, अंडे, देसी घी और हरी सब्जियां खाएं
-स्वस्थ आंखों के लिए संतुलित खानपान भी जरूरी है
-सोते वक्त आंखों के आसपास बादाम के तेल से हल्की मालिश करें
-खूब पानी पीएं
-समय-समय पर चेकअप कराते रहें
अमूमन एक मिनट में 10 से 15 बार पलकें झपकना चाहिए, इससे कार्निया में तरलता बनी रहती है। मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर पर काम करते वक्त कई लोगों की पलकें एक मिनट तक झपकती नहीं हैं या दो-चार बार ही झपकती हैं। इससे आंखों में तरलता कम हो जाती है, जिसे ड्राई आई कहते हैं। - प्रदीप वार्ष्णेय, नेत्र परीक्षण अधिकारी, जिला अस्पताल
जिला अस्पताल में 40 हजार 195 मरीजों पर हुई स्टडी
65 प्रतिशत की आंखें निकलीं कमजोर, 26 हजार 88 मरीजों को निकली चश्मे की जरूरत
ऐसे करें बचाव
-आंखों को पर्याप्त आराम देने के लिए 8 घंटे की नींद लें
-कंप्यूटर, टीवी या मोबाइल में देख रहे हों तो उचित दूरी बना कर रखें
-दिन में 3 से 4 बार अपनी आंखों को ठंडे पानी से अच्छी तरह धोएं
-धूप या किसी धूल-मिट्टी वाली जगह पर जाएं तो सनग्लासिज पहनें
-खाने में दूध, मक्खन, गाजर, टमाटर, पपीता, अंडे, देसी घी और हरी सब्जियां खाएं
-स्वस्थ आंखों के लिए संतुलित खानपान भी जरूरी है
-सोते वक्त आंखों के आसपास बादाम के तेल से हल्की मालिश करें
-खूब पानी पीएं
-समय-समय पर चेकअप कराते रहें
आंखों की नसों में सूजन आ जाती है
लंबे समय तक कंप्यूटर और मोबाइल से चिपके रहने वालों की आंखों की नसों में सूजन आ जाती है। अनदेखी करने पर यह ड्राई आई में तब्दील हो सकती है। ओपीडी में बच्चे भी काफी संख्या में होते हैं। बच्चों को मोबाइल पर गेम खेलते रहना, टीवी से चिपके रहने की बात सामने आती है। मोबाइल या कंप्यूटर पर व्यस्त रहने के कारण आंखों में मेलाटोनिन हार्मोन लेवल कम हो जाता है। - अरुणा यादव, नेत्र परीक्षण अधिकारी, जिला अस्पताल
काफी मरीज आ रहे
रोजाना काफी संख्या में मरीज आते हैं। स्मार्टफोन की वजह से पिछले कुछ सालों में ड्राई आई के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। आंखों में जलन हो तो फौरन चिकित्सक को दिखाएं। नींद पूरी होने के बाद भी अगर आंखें भारी लगें तो समस्या हो सकती है। - डॉ. पीके बंसल, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल
लंबे समय तक कंप्यूटर और मोबाइल से चिपके रहने वालों की आंखों की नसों में सूजन आ जाती है। अनदेखी करने पर यह ड्राई आई में तब्दील हो सकती है। ओपीडी में बच्चे भी काफी संख्या में होते हैं। बच्चों को मोबाइल पर गेम खेलते रहना, टीवी से चिपके रहने की बात सामने आती है। मोबाइल या कंप्यूटर पर व्यस्त रहने के कारण आंखों में मेलाटोनिन हार्मोन लेवल कम हो जाता है। - अरुणा यादव, नेत्र परीक्षण अधिकारी, जिला अस्पताल
काफी मरीज आ रहे
रोजाना काफी संख्या में मरीज आते हैं। स्मार्टफोन की वजह से पिछले कुछ सालों में ड्राई आई के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। आंखों में जलन हो तो फौरन चिकित्सक को दिखाएं। नींद पूरी होने के बाद भी अगर आंखें भारी लगें तो समस्या हो सकती है। - डॉ. पीके बंसल, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल