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सर जी! हमारे पास तो बटन वाला फोन है...इसमें व्हाट्स एप नहीं चलता, कैसे करें ऑनलाइन पढ़ाई

Sun, 26 Apr 2020 01:09 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Sun, 26 Apr 2020 01:09 AM IST
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Sir We have a button phone ... WhatsApp doesn't work how to do online study
प्रतीकात्मक तस्वीर
‘सर जी! हमारे पास तो बटन वाला फोन है... इसमें व्हाट्सएप नहीं चलता’। हर तीसरे विद्यार्थी की यह समस्या है। 30 से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं, जो हॉटस्पॉट के क्षेत्र में आने के कारण उनके विद्यार्थियों का डाटा ऑनलाइन कक्षाओं से नहीं जुड़ सका है। इनमें मवाना, सरधना, सराय बेहलीम, जली कोठी और हापुड़ रोड आदि के विद्यालय शामिल हैं।
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20 अप्रैल से माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यार्थियों की ऑनलाइन क्लास शुरू हुई हैं। लेकिन 404 विद्यालयों के करीब 80 हजार विद्यार्थी अभी भी व्हाट्सएप ग्रुप से नहीं जुड़ पाएं हैं। कोरोना लॉकडाउन के चलते भले ही ई-एजुकेशन उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकतर छात्रों की पहुंच से यह दूर है।
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जिले में सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 50 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी कमजोर, दुर्बल वर्ग के हैं। इनके पास ना तो स्मार्ट फोन है और ना ही ऑनलाइन पढऩे की समझ। 10वीं और 12वीं क्लास को छोड़कर मेरठ में माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में करीब एक लाख 60 हजार विद्यार्थी हैं।
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इनमें से बमुश्किल 80 हजार विद्यार्थी ही जुड़ पाएं हैं। कक्षा 10 व 12 को छोड़कर अन्य सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों को बिना परीक्षा लिए ही इस बार अगली कक्षा में प्रोन्नत कर दिया गया है।

जिले में शिक्षकों ने ऑनलाइन पढ़ाई के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर अभिभावकों विद्यार्थियों को जोड़ा। इनमें से करीब 50 प्रतिशत अभिभावक तो स्मार्ट फोन नहीं होने के कारण ग्रुप से नहीं जुड़ सके। ऐसे में शिक्षकों ने उनके किसी रिश्तेदार या परिचितों के नंबर लेकर ग्रुप में जोड़कर अपनी खानापूर्ति तो पूरी कर ली, लेकिन उसका लाभ बच्चे तक नहीं पहुंचा। क्योंकि जिस को ग्रुप में जोड़ा वह व्यक्ति बच्चे के साथ हमेशा नहीं रहता।

ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए भेजे जाने वाला मैटेरियल बच्चे तक नहीं पहुंच पाता। इसके अलावा जिन अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन हैं उनके पास ई-एजुकेशन की समझ नहीं है। बहुत विद्यार्थियों को तो मोबाइल से कैसे पढ़ना है, यह समझ ही नहीं पा रहे हैं।

माता-पिता भी मात्र साक्षर होने के कारण उनकी मदद करने में असहाय रहते हैं। कई गांवों में इंटरनेट कनेक्टिीविटी की समस्या भी रहती है। बच्चे, अभिभावक व शिक्षक भी फिलहाल अवकाश के मूड में हैं। ऑनलाइन एजुकेशन में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। 

मोबाइल नंबर ही गलत निकले
सरकारी स्कूल के रिकॉर्ड में से नंबर निकालकर जब व्हाट्सएप ग्रुप पर जोड़ा गया तो कई बच्चों के अभिभावकों के नंबर ही गलत निकले। क्योंकि वे लोग फ्री कॉलिंग के चक्कर में थोड़े दिन में सिम बदल लेते हैं। इसके अलावा कई अभिभावक ग्रुप में जुड़े तो पता लगा कि उनके पास इंटरनेट चलाने के लिए डाटा नहीं है।

शिक्षकों को भी नहीं आ रहा समझ कैसे पढ़ाएं। 50 की उम्र से अधिक के शिक्षक भी स्मार्ट फोन का उपयोग ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। ई-एजुकेशन उन्हें भी समझ नहीं है। सभी बस सामग्री को एक से दूसरे ग्रुप में फॉरवर्ड कर इतिश्री कर रहे हैं।

काम मुश्किल पर प्रयास जारी
जिला विद्यालय निरीक्षक गिरजेश चौधरी का कहना है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद के निर्देशानुसार व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। ग्रामीण इलाका होने के कारण परेशानी तो है ही, फिर भी पूरा प्रयास किया जा रहा है कि लॉकडाउन के समय का उपयोग किया जा सके।

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