यूपी: खतरे में सरकारी स्कूल के छात्र-छात्राएं, अधिकारियों को नहीं परवाह
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बागपत के दाहा गांव में दीवार गिरकर बच्चों के घायल होने के मामले से भी बेसिक शिक्षा विभाग सबक सीखने के लिए तैयार नहीं है। तुगाना गांव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय के एक कमरे की दीवारों की दरार मौत को दावत दे रही है। यहां बच्चे जिंदगी को खतरे में डालकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं। जर्जर कमरा कभी भी हादसे की वजह बन सकता है। लेकिन शिकायतों के बावजूद विभाग इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है।
बता दें कि दाहा गांव में दीवार गिरने से प्राथमिक विद्यालय के अलावा आंगनबाड़ी केंद्र के 12 बच्चों की हालत बिगड़ गई थी। लखनऊ तक अफसरों ने मामले की जानकारी ली। डीएम ऋषिरेंद्र कुमार ने मामले की जांच बैठा रखी है। इसके बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग हरकत में नहीं है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय तुगाना में एक ऐसा कमरा भी है, जिसकी दो दीवारों और छत में दरार आ चुकी हैं। जर्जर कमरा मुख्य मार्ग या स्कूल परिसर में गिरा तो बड़ा हादसा हो सकता है। इस स्कूल में 58 विद्यार्थी हैं। इनमें 22 छात्राएं हैं।
प्रधानाध्यापिका अनीता बालियान का कहना है कि कई बार विभागीय अधिकारियों को इस बाबत पत्र लिखा जा चुका है। बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है।
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बेटियों के लिए नहीं प्रसाधन केंद्र
जनप्रतिनिधि और अधिकारियों के विकास के दावे को तुगाना गांव का पूर्व माध्यमिक विद्यालय झुठला रहा है। स्कूल में प्रसाधन केंद्र तक नहीं है। इससे छात्राओं के साथ ही शिक्षक-शिक्षिकाओं के सामने विकट स्थिति है। स्कूल स्टाफ का कहना है कि समय-समय पर इस समस्या से अधिकारियों को अवगत कराया गया है। लेकिन अब तक स्कूल में शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया।
जर्जर स्कूलों में शामिल नहीं नाम
बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले में 92 स्कूल जर्जर घोषित किए हैं। जर्जर भवन वाले स्कूलों में तुगाना का नाम शामिल नहीं किया गया है। बीएसए योगराज सिंह का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी।
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