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Meerut News: तीमारदारों से मारपीट के मामले में चार डॉक्टरों पर लगा एससी-एसटी एक्ट
Thu, 26 Oct 2023 02:33 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Thu, 26 Oct 2023 02:33 AM IST
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मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में हुई तीमारदारों के साथ हुई मारपीट मामले में बुधवार को चार डॉक्टरों अभिषेक वर्मा, आदित्य यादव और अब्दुल मनान और अंशुल कुमार मित्तल के खिलाफ मारपीट और बलवे के अलावा एससी-एसटी एक्ट की धारा बढ़ा दी गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच के लिए मेडिकल में बनाई गई समिति ने बुधवार को पीड़ितों और डॉक्टराें बयान दर्ज किए।
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में सोमवार शाम जूनियर डॉक्टरों ने कहासुनी होने पर मारपीट की गई थी। देंवेंद्र ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपने साले अंकित के बेटे कुणाल (5) का इलाज कराने आए थे। उसकी हाथ की उंगली में चोट थी। इलाज के दौरान बच्चा रोने लगा तो उन्होंने सही से इलाज करने को कहा। इस पर चार-पांच चिकित्सक भड़क गए और उनके एवं उनकी पत्नी मंजू, मां राजवती, छोटे भाई दीपक और दीपक की पत्नी प्रीति को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने तीन जूनियर डॉक्टरों अभिषेक वर्मा, आदित्य यादव और अब्दुल मनान को निलंबित कर दिया था।
एसएसपी से मिले पीड़ित, भाजपा नेता ने दिया ज्ञापन
मामले में पीड़ित देवेंद्र ने बुधवार को पुलिस ऑफिस पहुंचकर एसएसपी से शिकायत करते हुए एससी-एसटी एक्ट बढ़ाने की मांग की। भाजपा नेता अंकित चौधरी ने इस मामले में सीओ सिविल लाइन अरविंद चौरसिया को ज्ञापन देकर डॉक्टरों पर एससी-एसटी की धारा बढ़ाने की मांग की। छात्र नेता विनीत चपराणा भी पीड़ितों के पक्ष में पुलिस ऑफिस पहुंचे। सचिन सिरोही भी पीड़ित से मिलने उनके घर पहुंचे, डॉक्टरों की गिरफ्तारी की मांग की। मेडिकल थानाध्यक्ष अवधेश कुमार ने बताया कि मारपीट में शामिल चार डॉक्टरों की पहचान हो गई है। इन पर मारपीट, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी देने के अलावा बलवा और एससी-एसटी एक्ट की धारा बढ़ा दी गई है। इस मामले में जांच के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी तीन सदस्य समिति गठित की है। इसमें अध्यक्ष हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञानेश्वर टांक हैं, जबकि दो सदस्यों में इमरजेंसी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. वैभव तिवारी और प्रभारी आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. हर्षवर्धन हैं।
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मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में सोमवार शाम जूनियर डॉक्टरों ने कहासुनी होने पर मारपीट की गई थी। देंवेंद्र ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपने साले अंकित के बेटे कुणाल (5) का इलाज कराने आए थे। उसकी हाथ की उंगली में चोट थी। इलाज के दौरान बच्चा रोने लगा तो उन्होंने सही से इलाज करने को कहा। इस पर चार-पांच चिकित्सक भड़क गए और उनके एवं उनकी पत्नी मंजू, मां राजवती, छोटे भाई दीपक और दीपक की पत्नी प्रीति को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने तीन जूनियर डॉक्टरों अभिषेक वर्मा, आदित्य यादव और अब्दुल मनान को निलंबित कर दिया था।
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एसएसपी से मिले पीड़ित, भाजपा नेता ने दिया ज्ञापन
मामले में पीड़ित देवेंद्र ने बुधवार को पुलिस ऑफिस पहुंचकर एसएसपी से शिकायत करते हुए एससी-एसटी एक्ट बढ़ाने की मांग की। भाजपा नेता अंकित चौधरी ने इस मामले में सीओ सिविल लाइन अरविंद चौरसिया को ज्ञापन देकर डॉक्टरों पर एससी-एसटी की धारा बढ़ाने की मांग की। छात्र नेता विनीत चपराणा भी पीड़ितों के पक्ष में पुलिस ऑफिस पहुंचे। सचिन सिरोही भी पीड़ित से मिलने उनके घर पहुंचे, डॉक्टरों की गिरफ्तारी की मांग की। मेडिकल थानाध्यक्ष अवधेश कुमार ने बताया कि मारपीट में शामिल चार डॉक्टरों की पहचान हो गई है। इन पर मारपीट, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी देने के अलावा बलवा और एससी-एसटी एक्ट की धारा बढ़ा दी गई है। इस मामले में जांच के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी तीन सदस्य समिति गठित की है। इसमें अध्यक्ष हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञानेश्वर टांक हैं, जबकि दो सदस्यों में इमरजेंसी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. वैभव तिवारी और प्रभारी आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. हर्षवर्धन हैं।
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