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यूपी के गरीब परिवार में जन्मे सत्यपाल मलिक का मेरठ से गहरा नाता, जम्मू-कश्मीर के बने राज्यपाल

Wed, 22 Aug 2018 03:07 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 22 Aug 2018 03:07 PM IST
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Satyapal Malik is the first politician governor of Jammu and Kashmir know his meerut connection
सत्यपाल मलिक - फोटो : ANI

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के रहने वाले सत्यपाल मलिक जम्मू कश्मीर के नए राज्यपाल होंगे। इससे पहले उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बिहार का राज्यपाल बनाया था। उनका कार्यकाल 30 सितंबर 2017 से शुरू हुआ था। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को सात राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति की। जिसके बाद सत्यपाल मलिक अब जम्मू-कश्मीर के नए नियुक्त किए गए हैं।

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जानें उनके राजनीतिक सफर से जुड़ी खास बातें:-

बागपत के गरीब परिवार में जन्में सत्यपाल  मलिक
बागपत के हिसावदा गांव में एक गरीब परिवार में सत्यपाल मलिक का जन्म हुआ था। उनके पिता बुध सिंह एक किसान थे। बुध सिंह के निधन के बाद सतपाल मलिक का पालन पोषण उनकी माता जगबीरी देवी ने किया था। उन्होंने मेरठ कॉलेज से बीएससी और कानून की पढ़ाई की। यहीं से एक समाजवादी छात्र नेता के तौर पर राम मनोहर लोहिया से प्रेरणा लेकर उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी।

सत्यपाल मलिक ने पहली बार 1968 में छात्र संघ का चुनाव लड़ा और वह मेरठ कॉलेज के पहले अध्यक्ष चुने गए थे। मेरठ कॉलेज में वह दो बार छात्र संघ के अध्यक्ष रहे हैं। बीकेडी के टिकट पर बागपत से साल 1974 में चुनाव लड़ा और चरण सिंह के भारतीय क्रांति दल से जनता ने उन्हें विधायक के रूप में चुना। इस दौरान समाजवादी नेता के तौर पर सत्यपाल मलिक ने किसान मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। 

इसके बाद वह सन् 1980-86 और सन् 1986-1992 के दो कार्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य रहे। वह साल 1989 में जनता दल के टिकट पर अलीगढ़ से संसद सदस्य रहे। उन्हें कुल वोटों में से 2,33,465 (51.5 प्रतिशत) वोट मिले। उन्हें प्रतिद्वंद्वी आईएनसी उम्मीदवार उषा रानी तोमर ने 77,958 वोटों के अंतर से हराया, जिन्होंने 1,55,507 (34.2 प्रतिशत) वोट प्राप्त किए। उन्होंने फिर से समाजवादी पार्टी टिकट पर 1996 में अलीगढ़ से चुनाव लड़ा, लेकिन केवल 40,789 वोट हासिल कर चौथा स्थान प्राप्त किया। 

वर्ष 1990 से 1990 तक केंद्रीय पर्यटन एवं संसदीय राज्यमंत्री रह चुके हैं। भाजपा में वह विभिन्न पदों पर रहे।  उन्हें 21 मार्च 2018 को 28 मई 2018 तक ओडिशा के गवर्नर के रूप में अपनी सेवाएं देने के लिए अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था। राजस्थान के विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई थी। 

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सत्यपाल मलिक

1984 में कांग्रेस में हुए शामिल
सन् 1984 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। हालांकि तीन साल तक पार्टी के राज्यसभा सांसद बने रहे। बताया जाता है कि बोफार्स घोटाले के मामले के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।  इसके बाद 1988 में जनता दल में शामिल हो गए और 1989 में अलीगढ़ से सांसद बने। सन् 1990 से 1990 तक केंद्रीय पर्यटन एवं संसदीय राज्यमंत्री रह चुके हैं  

साल 2004 में भाजपा में शामिल हो गए और लोकसभा के लिए चुनाव लड़ा लेकिन इसमें उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह से हार का सामना करना पड़ा था। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। इससे पहले राजस्थान के विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई थी। वर्ष 2017 को बिहार के राज्यपाल का पद संभालने के पहले वह भाजपा के किसान मोर्चा के प्रभारी थे।

जम्मू कश्मीर का राज्यपाल नियुक्त होने पर सत्यपाल मलिक बोले कि कश्मीरी नेताओं से मेरे निजी संबंध है, पीएम की सोच पर अमल करना है और लोगों का भरोसा जीतना है। कश्मीर की जनता पर मुझे पूरा भरोसा है। वह एनएन वोहरा की जगह लेंगे, जो दस साल से वहां राज्यपाल हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी राजनीतिक व्यक्ति को सूबे का राज्यपाल बनाया गया है। अब तक जम्मू-कश्मीर में पूर्व सैन्य अधिकारी या अफसरशाह को ही राज्यपाल बनाया जाता रहा है। 

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