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शहादत को प्रणाम: 56 वर्ष बाद पैतृक आवास पहुंचा मलखान सिंह का पार्थिव शरीर, सैन्य सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई

Wed, 02 Oct 2024 04:32 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: डिंपल सिरोही Updated Wed, 02 Oct 2024 04:32 PM IST
सार

सेना के जवान जब गांव पहुंचे और परिजनों को जानकार दी तो मलखान सिंह के छोटे भाई इसमपाल सिंह की आंखों से आंसू छलक पड़े। यह एक ऐसा घटनाक्रम है, जिस पर यकीन करना भी मुश्किल है। आज शहीर का प

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Salute to martyrdom: Malkhan Singh's body reached his ancestral home after 56 years
अंतिम यात्रा में शामिल क्षेत्रवासी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सात फरवरी 1968 का वह दिन आज भी याद है, जब बड़े भाई मलखान सिंह (23) की विमान हादसे में निधन की सूचना मिली। उस समय मेरी उम्र करीब 12 साल होगी, लेकिन परिवार के हालातों से वाकिफ था। देखता रहता था कि माता-पिता और भाभी समेत परिवार के अन्य सदस्य किस तरह कोने में जाकर रोते-बिलखते थे। क्योंकि अंतिम समय में परिवार का कोई सदस्य उनका चेहरा भी नहीं देख सका और न ही अंत्येष्टी कर सके।

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56 साल बाद जब सेना के जवानों ने आकर पार्थिव शरीर मिलने के जानकारी दी तो दर्द ताजा हो गया। समझ ही नहीं आया कि आखिर भाई के निधन पर अब दुख जताऊं या फिर यह सब्र करूं कि कम से कम अब अंत्येष्टी तो कर सकेंगे। यह कहते-कहते मलखान सिंह के छोटे भाई इसमपाल सिंह की आंखों से आंसू छलक पड़े। यह एक ऐसा घटनाक्रम है, जिस पर यकीन करना भी मुश्किल है। 

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विश्व के सबसे ऊंचे तथा दुर्गम बर्फीले युद्ध क्षेत्र सियाचिन में 56 वर्ष पूर्व हवाई दुर्घटना में मृत्यु का शिकार हुए जवान मलखान सिंह का पार्थिव शरीर लद्दाख से भारतीय वायुसेना के वायुयान से एयरफोर्स स्टेशन सरसावा लाया गया। जहां दोपहर सवा 12 बजे पार्थिव शरीर को वायुयान से उतार कर सशस्त्र जवानों ने अंतिम सलामी दी।

इसके पश्चात पार्थिव शरीर को एक सैन्य वाहन में पूरे सम्मान के साथ रख कर शहीद सैनिक की अंतिम यात्रा काफिले के साथ वायुसेना स्टेशन से नानौता क्षेत्र में उनके पैतृक गांव फतेहपुर पहुंची। जहां भारत माता की जय और शहीद मलखान सिंह अमर रहे के नारों के बीच उनके पार्थिव शरीर को घर तक ले जाया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने गांव के बाहर से घर तक पार्थिव शरीर पर पुष्प वर्षा की। बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शनों के लिए पहुंचे।

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