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सहारनपुर : तीन गांवों के दलितों ने अपनाया बौद्ध धर्म, नहर में विसर्जित की देवताओं की मूर्तियां

Fri, 19 May 2017 06:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर Updated Fri, 19 May 2017 06:20 PM IST
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Saharanpur: Buddhists, adopted by Dalits of three villages, statues of gods immersed in the canal
नहर में विसर्जित की देवताओं की मूर्तियां

शब्बीरपुर के बाद सहारनपुर में हुए बवाल में भीम आर्मी पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का विरोध करते हुए तीन गांवों के दलित समाज के कुछ परिवारों ने बौद्ध धर्म अपना किया है। बृहस्पतिवार को मानकमऊ स्थित बड़ी नहर पर ग्राम रूपड़ी, कपूरपुर और ईघरी के दलित समाज के लोगों ने देवी-देवताओं की मूर्तियों एवं कलेंडर का विसर्जन किया। इस दौरान 180 परिवारों के बौद्ध धर्म अपनाने का दावा किया गया है। दलितों की इस कार्रवाई से पुलिस एवं प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।

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भीम आर्मी का समर्थन करते हुए दलित समाज के कुछ लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाने की चेतावनी बृहस्पतिवार सुबह ही दे दी थी। जिससे पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। प्रशासनिक अधिकारी उच्चाधिकारियों से संपर्क कर मामले की जानकारी देते रहे। पूर्व निर्धारित घोषणा के अनुसार दोपहर लगभग ढाई बजे ग्राम रूपड़ी, कपूरपुर और ईघरी के लोग मानकमऊ स्थित बड़ी नहर पर पहुंचे और नहर में उन्होंने देवी-देवताओं की मूर्तियों एवं कलेंडरों का विसर्जन किया। इसके बाद दलितों ने मूर्ति पूजा त्यागने का एलान कर दिया। इस दौरान दलितों के लगभग 180 परिवारों के बौद्ध धर्म अपनाए जाने का दावा किया गया। इस दौरान नरेंद्र गौतम, रोहित गौतम, दीपक कुमार, पंकित गौतम, अश्वनी गौतम, कुलदीप गौतम, सोनी गौतम, कल्पना गौतम, रचना गौतम, आरती गौतम, अनारकली, मनोज, लोकेश, डा. बलराम, नरेंद्र, सुदेश, मैना, रीना, सावित्री, शुभम समेत अनेक लोग शामिल रहे।

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भीम आर्मी को साजिश के तहत फंसाने का आरोप

Saharanpur: Buddhists, adopted by Dalits of three villages, statues of gods immersed in the canal
दलितों ने विसर्जित की देवताओं की मूर्तियां

मानकमऊ स्थित बड़ी नहर पर बौद्ध धर्म अपनाने वाले दलित समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि भीम आर्मी को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। दलित एवं पिछड़े समाज के शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाली भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद एवं कार्यकर्ताओं पर संगीन धाराएं लगाकर जेल भेजा जा रहा है। जो गलत है। जब भी दलित समाज पर शोषण और अत्याचार हुआ, गरीब लड़की की शादी, पढ़ाई का मामला हुआ तो भीम आर्मी आगे आती है। भीम आर्मी निशुल्क पाठशालाएं चला रही है, शहीद होने वाले सैनिकों के लिए कैंडल मार्च निकालती है। लेकिन सरकार दोहरा रवैया अपना रही है। 

ऐसी कोई जानकारी नहीं है : एसएसपी
एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे का कहना है कि दलित समाज द्वारा बौद्ध अपनाने की पुलिस को कोई सूचना नहीं है। किसी भी समाज के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा। जो दोषी है सिर्फ उस पर कार्रवाई हो रही है। सभी लोग समाज का अंग हैं।

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