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सांपों के इस मौसम में सावधानी ही बचाव
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Wed, 10 Aug 2016 01:57 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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अगर आपको सांप डस ले तो डरें नहीं। संयम से काम लें और तुरंत अस्पताल पहुंचें। सही समय पर इलाज मिलने से जान का खतरा टाला जा सकता है। सांपों के बारे में और उनके डसने पर इलाज को लेकर ‘अमर उजाला’ ने एक्सपर्ट और डॉक्टरों से बात की।
अक्तूबर तक बरतें सावधानी
मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश कुमार के मुताबिक सांप कोल्ड ब्लडेड होते हैं। मौजूदा मौसम इनके बाहर आने के लिए मुफीद है। 22 से 32 डिग्री के बीच का तापमान इन्हें सूट करता है। मेंढक, चूहे आदि खाने के लिए ये बाहर निकलते हैं। जुलाई से सितंबर तक यह जंगल और आसपास आबादी में आसानी से नजर आते हैं। इसी बीच यह मिथ है कि सांपों की सुरक्षा के लिए नागपंचमी पर दूध पिलाने की परंपरा रही है। अक्तूबर माह में सांप बिल में चले जाते हैं।
कहां हो सकते हैं सांप
सुनसान जगह या जहां इंसान की आवाजाही कम है। जैसे गोदाम आदि में सांप हो सकते हैं। भोजन में चूहे की तलाश में घरों तक पहुंच सकते हैं। यह रात में ज्यादा एक्टिव रहते हैं। जानकारों की मानें तो सांप खतरा महसूस होने पर ही हमला करते हैं।
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सर्पदंश पर ये होता है
अगर सांप डस ले तो जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचें। हाथ या पैर में डस ले तो बंध लगा सकते हैं। जिस जगह बाइट किया है, वहां हल्का सा कट लगाकर सिरिंज से निडिल निकालकर उससे निकाल सकते हैं। इससे खून के माध्यम से जहर बाहर निकलेगा। घबराहट और भागने-दौड़ने से नुकसान होगा। जहर तेजी से फैलेगा। सांप जिस जगह डसता है, वहां दर्द शुरू हो जाता है। 15-20 मिनट बाद सूजन आ जाती है। एक घंटे बाद पूरे शरीर पर सूजन आनी शुरू हो जाती है। सांस लेने में मुश्किल होने लगती है। दिखाई देना कम हो जाता है। सांप डसने की स्थिति में तीन तरह की एंटी वैनम हीमोटॉक्सिन, न्यूरोटॉक्सिन, साइकोटॉक्सिन दी जाती हैं।
नहीं रखा जाता रिकॉर्ड
सांप के डसने और उसके बाद मौत होने का कोई रिकॉर्ड तक नहीं रखा जाता है। जानकारों के अनुसार सांप द्वारा डसना और उससे मौत होना अलग-अलग मामले हैं। देश भर में सालाना करीब ढाई लाख लोग सर्पदंश का शिकार होते हैं। हालांकि इनमें कितनों की मौत होती है, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है।
मेरठ में 4-5 प्रकार के सांप जहरीले
दुनिया में दो हजार प्रकार तो भारत में करीब 272 प्रकार के सांप मिलते हैं। इनमें 80 प्रतिशत जहरीले नहीं होते। भारत में 58 प्रकार के सांप हीं जहरीले हैं, जिनके डसने से मौत हो सकती है। मेरठ और आसपास में चार-पांच प्रकार के सांप हैं, जो जहरीले हैं। इसमें कोबरा शामिल है। जहरीले सांपों में कॉमन इंडियन करैथ है। यह कोबरा से भी 15 गुना जहरीला है। मेरठ और आसपास रैट स्नैक अधिक हैं, जिनसे इंसान को खतरा नहीं है।
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अक्तूबर तक बरतें सावधानी
मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश कुमार के मुताबिक सांप कोल्ड ब्लडेड होते हैं। मौजूदा मौसम इनके बाहर आने के लिए मुफीद है। 22 से 32 डिग्री के बीच का तापमान इन्हें सूट करता है। मेंढक, चूहे आदि खाने के लिए ये बाहर निकलते हैं। जुलाई से सितंबर तक यह जंगल और आसपास आबादी में आसानी से नजर आते हैं। इसी बीच यह मिथ है कि सांपों की सुरक्षा के लिए नागपंचमी पर दूध पिलाने की परंपरा रही है। अक्तूबर माह में सांप बिल में चले जाते हैं।
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कहां हो सकते हैं सांप
सुनसान जगह या जहां इंसान की आवाजाही कम है। जैसे गोदाम आदि में सांप हो सकते हैं। भोजन में चूहे की तलाश में घरों तक पहुंच सकते हैं। यह रात में ज्यादा एक्टिव रहते हैं। जानकारों की मानें तो सांप खतरा महसूस होने पर ही हमला करते हैं।
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सर्पदंश पर ये होता है
अगर सांप डस ले तो जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचें। हाथ या पैर में डस ले तो बंध लगा सकते हैं। जिस जगह बाइट किया है, वहां हल्का सा कट लगाकर सिरिंज से निडिल निकालकर उससे निकाल सकते हैं। इससे खून के माध्यम से जहर बाहर निकलेगा। घबराहट और भागने-दौड़ने से नुकसान होगा। जहर तेजी से फैलेगा। सांप जिस जगह डसता है, वहां दर्द शुरू हो जाता है। 15-20 मिनट बाद सूजन आ जाती है। एक घंटे बाद पूरे शरीर पर सूजन आनी शुरू हो जाती है। सांस लेने में मुश्किल होने लगती है। दिखाई देना कम हो जाता है। सांप डसने की स्थिति में तीन तरह की एंटी वैनम हीमोटॉक्सिन, न्यूरोटॉक्सिन, साइकोटॉक्सिन दी जाती हैं।
नहीं रखा जाता रिकॉर्ड
सांप के डसने और उसके बाद मौत होने का कोई रिकॉर्ड तक नहीं रखा जाता है। जानकारों के अनुसार सांप द्वारा डसना और उससे मौत होना अलग-अलग मामले हैं। देश भर में सालाना करीब ढाई लाख लोग सर्पदंश का शिकार होते हैं। हालांकि इनमें कितनों की मौत होती है, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है।
मेरठ में 4-5 प्रकार के सांप जहरीले
दुनिया में दो हजार प्रकार तो भारत में करीब 272 प्रकार के सांप मिलते हैं। इनमें 80 प्रतिशत जहरीले नहीं होते। भारत में 58 प्रकार के सांप हीं जहरीले हैं, जिनके डसने से मौत हो सकती है। मेरठ और आसपास में चार-पांच प्रकार के सांप हैं, जो जहरीले हैं। इसमें कोबरा शामिल है। जहरीले सांपों में कॉमन इंडियन करैथ है। यह कोबरा से भी 15 गुना जहरीला है। मेरठ और आसपास रैट स्नैक अधिक हैं, जिनसे इंसान को खतरा नहीं है।