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UP: दौड़ की जिद रुपल को ले गई कोलंबिया, जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में डेब्यू करेगी मेरठ की बेटी

Mon, 01 Aug 2022 02:07 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 01 Aug 2022 02:07 PM IST
सार

रोहटा क्षेत्र के शाहपुर जैनपुर निवासी 17 वर्षीय एथलीट रुपल चौधरी जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगी। परिवार का खेलों में भेजने का मन नहीं था। लेकिन रुपल ने खेलों में जाने की जिद पकड़ ली। आखिरकार पिता उन्हें स्टेडियम ले आए। बस यहीं से रूपल के जीवन में खेल का नया अध्याय शुरू हुआ।

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Rupal from Meerut will participate in Under-20 World Athletics Championships
रूपल चौधरी, एथलेटिक्स - फोटो : amar ujala

विस्तार

मेरठ की उड़न परी रुपल चौधरी परिवार से जिद्द पूरी कर अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में डेब्यू करने जा रहीं हैं। एक से 6 अगस्त तक कोलंबिया में आयोजित होने अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रुपल तीन अलग अलग स्पर्धाओं में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। रुपल अब यूपी राज्य के बाद पहली बार टीम इंडिया की टी-शर्ट पहनेंगी।

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रोहटा क्षेत्र के शाहपुर जैनपुर निवासी 17 वर्षीय एथलीट रुपल चौधरी अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में मेरठ के साथ देश का नाम रोशन करने वाली हैं। रविवार को वह कोलंबिया पहुंच गईं हैं। जहां एक अगस्त से 6 अगस्त तक तीन स्पर्धा बालिका वर्ग रिले, मिक्स रिले और 400 मीटर में प्रतिभाग करेंगी। एक अगस्त से ही रुपल के इवेंट शुरू हो जाएंगे। इस सफलता के पीछे रुपल की जिद और दौड़ के प्रति उनका शौक है।
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पिता ओमवीर सिंह ने बताया रुपल ने किसान इंटर कॉलेज मढ़ी से पढ़ाई की है। परिवार का खेलों में भेजने का मन नहीं था। वहीं रुपल ने खेलों में जाने की जिद पकड़ ली। पिता 2017 में रुपल को कैलाश प्रकाश स्टेडियम में कोच विशाल सक्सेना के पास ले आए। यहीं से उसके जीवन में खेल का नया अध्याय शुरू हुआ।

रुपल ने राष्ट्रीय स्तर पर 9 पदक झटके हैं, जिनमें 5 स्वर्ण, 3 रजत व 1 कांस्य पदक शामिल है। इनमें राष्ट्रीय स्तर पर सीनियर स्पर्धा में रजत पदक भी उनके नाम है। रुपल की माता ममता गृहिणी हैं, जबकि पिता ओमवीर सिंह किसान हैं। भाई परमजीत यूपी पुलिस में हैं। दादी ईश्वर कौर व ताऊ तंत सिंह सहित परिवार की निगाहें रुपल की जीत पर टिकी हैं।

पिता के साथ कोच ने निभाई अहम भूमिका
पिता ओमवीर सिंह ने रुपल को गांव से प्रतिदिन 30 किमी. का सफर तय कर कैलाश प्रकाश स्टेडियम लाना और ले जाने की जिम्मेदारी निभाई। कोच विशाल सक्सेना व उनकी पत्नी अमिता सक्सेना ने रुपल को यहां तक पहुंचाने में दिन रात एक कर दिया। स्टेडियम में मिट्टी का ट्रैक होने के चलते सप्ताह में दो दिन दिल्ली जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक पर अभ्यास के लिए भी गए।

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