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इंटीग्रेटेड टाउनशिप के मामले में विकासकर्ता को राहत
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मुजफ्फरनगर। इंटीग्रेटेड टाउनशिप के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नया आदेश जारी किया है। नए आदेश से विकासकर्ता को बड़ी राहत मिली है। याचिकाकर्ता की भूमि को छोड़कर टाउनशिप में कहीं भी निर्माण और विकास कार्य कराए जाने की छूट प्रदान की गई है। नए आदेश से द्वारिका सिटी में निवास कर रहे लोगों की परेशानियां भी दूर हो जाएंगी।
शहर के शेरनगर और बीबीपुर में द्वारिका बालाजी कंसोर्टियम कंपनी की ओर से करीब 100 एकड़ भूमि में इंटीग्रेटेड टाउनशिप की स्थापना की गई है। टाउनशिप का 90 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। कंपनी को करीब 30 बीघा भूमि खरीदनी शेष है। जानसठ रोड पर बस रही कॉलोनी द्वारिका सिटी को लेकर विवाद चल रहा है। कॉलोनी के मध्य में स्थित करीब सात बीघा भूमि के स्वामी की ओर से कई मामलों को लेकर शासन में शिकायत की गई थी।
मंडलायुक्त और हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद मामले में शिकायतकर्ता उत्तरी सिविल लाइन निवासी गुंजन गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। सुनवाई के बाद 27 मई को सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति का आदेश जारी किया। इस मामले में सुनवाई की तिथि आठ अगस्त निर्धारित कर दी गई थी। शुक्रवार को चली सुनवाई के दौरान स्टेट काउंसिल की ओर से एमडीए का पक्ष रखा गया। सुनवाई उपरांत सुप्रीम कोर्ट की ओर से याचिकाकर्ता की भूमि को छोड़कर टाउनशिप में निर्माण और विकास कार्य पर लगी रोक हटा ली।
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शिकायतकर्ता की भूमि को छोड़कर कहीं भी करा सकेंगे निर्माण
एमडीए सचिव कुंवर बहादुर सिंह का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के मुताबिक याचिकाकर्ता की भूमि को छोड़कर टाउनशिप में अन्य स्थान पर निर्माण कराने की छूट प्रदान की गई है। इससे कॉलोनी में निवास कर रहे लोगों को काफी राहत मिलेगी।
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शहर के शेरनगर और बीबीपुर में द्वारिका बालाजी कंसोर्टियम कंपनी की ओर से करीब 100 एकड़ भूमि में इंटीग्रेटेड टाउनशिप की स्थापना की गई है। टाउनशिप का 90 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। कंपनी को करीब 30 बीघा भूमि खरीदनी शेष है। जानसठ रोड पर बस रही कॉलोनी द्वारिका सिटी को लेकर विवाद चल रहा है। कॉलोनी के मध्य में स्थित करीब सात बीघा भूमि के स्वामी की ओर से कई मामलों को लेकर शासन में शिकायत की गई थी।
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मंडलायुक्त और हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद मामले में शिकायतकर्ता उत्तरी सिविल लाइन निवासी गुंजन गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। सुनवाई के बाद 27 मई को सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति का आदेश जारी किया। इस मामले में सुनवाई की तिथि आठ अगस्त निर्धारित कर दी गई थी। शुक्रवार को चली सुनवाई के दौरान स्टेट काउंसिल की ओर से एमडीए का पक्ष रखा गया। सुनवाई उपरांत सुप्रीम कोर्ट की ओर से याचिकाकर्ता की भूमि को छोड़कर टाउनशिप में निर्माण और विकास कार्य पर लगी रोक हटा ली।
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शिकायतकर्ता की भूमि को छोड़कर कहीं भी करा सकेंगे निर्माण
एमडीए सचिव कुंवर बहादुर सिंह का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के मुताबिक याचिकाकर्ता की भूमि को छोड़कर टाउनशिप में अन्य स्थान पर निर्माण कराने की छूट प्रदान की गई है। इससे कॉलोनी में निवास कर रहे लोगों को काफी राहत मिलेगी।